My friends hate me for this, but since 2015 my refrain is simple.
Pappu is what, 55? Fit and healthy, he has at least another 30 years in politics.
Even the most popular PM since 1947 could not secure full majority thanks to anti incumbency and the SC / ST vote switching,
Pappu being PM is a question of WHEN, not IF. 2034? 2039? Or sometime inbetween? or 2043? it is never in doubt.
Sad reality for India.
Two days ago, a video circulated on social media showing doodh-daatas in Maharashtra spilling their milk after a rumor of an FDA raid spread.
I wondered what they could have adulterated the milk with to make them get rid of it in such a panic over a mere rumor. I initially thought it might just be water or milk powder, but there had to be more to it.
Yesterday, the Maharashtra FDA uncovered a massive synthetic milk racket, with an estimated 2.3 crore liters of fake milk manufactured using detergent powder and chemicals like sodium bicarbonate.
By now, you probably have a clear idea of how much these ann-daatas, doodh-daatas, and fal-sabzi-daatas truly care about your health. That's why it's our responsibility to support every policy made that apparently benefits these daatas, even if it means putting ethanol in your non-compliant car. Don't complain. Just do it. Long live daatas.
Amazing how celebrity activism works on a strict 16-day routine.
Sonam Wangchuk hasn't been eating for over two weeks in silence, but on Day 17, the collective Google Calendar reminder hits everyone’s inbox at the exact same time. Ek saath posts dhadadhad!
🚨UP Police Action: Serious Questions Raised Over Destruction of CCTV Cameras
A viral video from Kanpur's Ghatampur area shows a severe land dispute. Why is Munna Lal Kushwaha's family allegedly facing day and night harassment?
Why are individuals in uniform seen damaging private CCTV cameras in the footage?
Will senior officials investigate these actions clarify the facts and ensure a fair inquiry to protect public trust?
@dgpup Please look into this serious matter and order a fair investigation
अयोध्या श्रीराम मंदिर चंदा चोरी से थोड़ा आगे. गांव में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगती है उसका रेट 14 रुपये से ज्यादा नहीं है लेकिन JE साहब लोग उसे 27.75 रुपए में पास करते हैं. जो स्ट्रीट लाइट कंपनी 1450 का बेचती है उसका सरकारी भुगतान 3770 का होता है.
जो सोलर टंकी 2.5 लाख में तैयार होती है उसका भुगतान साहब लोग 7 लाख का करवाते हैं. जो हाई मास्ट लाइट 1 लाख की उजाला करती है उसका बिल अंधेरे में 2.5 लाख का बनता है.
जगह-जगह लगीं सोलर लाइट को ��ंपनी 10 हजार में इंस्टाल करती, सरकारी बाबू उसे 32 हजार में खरीदते हैं. जो वाटर कूलर कंपनी गारंटी के साथ 1.5 लाख में लगाकर जाती है सरकार उसका भुगतान 3.5 लाख में करती है. लब्बोलुआब यह कि सरकारी कर्मचारी दूध के धुले हैं.
उक्त बातें हमारे पत्रकार साथी @manojpublic जी ने लिखी है।
अयोध्या र��म मंदिर चढ़ावा मामले में नया खुलासा हुआ है. जांच में आरोपियों की निशानदेही पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम से छपवाई गई कथित फर्जी चंदा रसीद बुक बरामद हुई है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने श्रद्धालुओं से फर्जी रसीद देकर दान वसूलने की बात भी स्वीकार की है। मामले की जांच जारी है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब जरा सोचिए इस पूरे गिरोह में कितने सुनियोजित तरीके से चंदा चोरी का खेल चल रहा था. अब देखना ये है कि ��ंदा चोरी का ये नेटवर्क और कहां तक जाता है.?
#Ayodhya #RamMandir #DonationCase #UttarPradesh #BreakingNews
#DeepakChaurasia #deepakchaurasia
@ShriRamTeerth
@VHPDigital
@RSSorg
@ShriAyodhya_
@ChampatRaiVHP
यदि सरकार का उद्देश्य सड़क सुरक्षा है, तो स्पीड कैमरे से पहले स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाइए।
लेकिन यदि उद्देश्य केवल चालान काटना है, तो कैमरे को पेड़ों, मोड़ों और पुलों के पीछे छिपाकर ही रखिए।
नियमों का प��लन कराने का सबसे अच्छा तरीका लोगों को पहले सचेत करना है, न कि उन्हें अनजाने में उल्लंघन करने देना।
सड़क सुरक्षा जागरूकता से आती है, अचानक मिलने वाले चालान से नहीं।
One Very Senior Railway bureaucrat's kid posts on reddit on how his parents who are Gazetted officers at HAG+ level (Higher Administrative Grade)
1. Misuse ticket booking systems and confirm tickets on any route, any train, for friends and family using VIP quota.
2. Misuse Saloon cars for personal purpose, though it is available only for official inspections. In his words, they have used them for personal trips, birthdays, vacations, with personal cooks and servants
3. Have made a phone call and the train they are travelling on gets priority, have helpers and attendants fawning over them and receiving them at stations
4. Misuse VIP quota in Railway hospitals and get direct instant, appointments, where B,C and D class workers have to wait in line for 4-5 hours to see a doctor.
5. Even managed to get him a job as a Special Class Railway Apprentice thru UPSC. But he left it within a year. Again his words.
6. Openly says his family has accumulated enough wealth for 10 generations and the guy who wrote this is now in Germany having fun
And the best part is, whom does he blame for all of this?
Us the common people.
Because, in his words, "You People don't even want to change it. You happily accept this slave mentality"
Also he says, "The common man himself is enabling the system that exploits him. We don't force good governance through criticism and accountability"
Apparently it is our fault that his family is corrupt.
Apparently we are hypocrites, for we criticize but do nothing to change it.
I guess now we are to blame for Bureaucratic Corruption, inefficiency, power tripping and incompetence too.
Read this very enlightening post on how a child of a high level bureaucrat thinks. I know it doesn't represent everyone, but it sure gives a glimpse on their thought and attitude.
https://t.co/eIvF97Z14J
रेल गाड़ी में पैंट्री कार वालों की लूट का नया तरीका! (सभी रेल यात्री ध्यान दें)
दोस्तों, आज कल ट्रेनों में पैंट्री कार वा��ों ने यात्रियों को लूटने का एक नया और बेहद चालाकी भरा तरीका निकाल लिया है। पहले समझिए कि यह पूरा खेल क्या है—
IRCTC के नियम के मुताबिक साधारण चाय (Ready Tea) या टी-बैग वाली चाय की आधिकारिक दर आज भी **₹10** ही है। लेकिन पैंट्री वालों ने ₹10 वाली साधारण चाय को मेन्यू से गायब ही कर दिया है। अब ये नया धंधा लेकर आए हैं—'प्रीमिक्स चाय और कॉफी'। चाय ₹20 और कॉफी ₹25 वसूल रहे हैं।
पिछले दिनों मैं 22308 बीकानेर हावड़ा एक्सप्रेस में सफर कर रहा था। सुबह-सुबह "चाय-चाय" की आवाज सुन आँख खुली। मैंने कहा—"एक चाय दो।"
वेंडर ने पूछा—"कौन सी? मसाला या इलायची?"
मैंने मसाला कह दिया।
उसने चाय दी और ₹20 लेकर चलता बना।
अगली ब���र वह फिर आया,
तो मैंने पूछ ही लिया—"भाई क्या बात है, जितने भी चाय वाले घूम रहे हैं सभी प्रीमिक्स ही बेच रहे हैं, ₹10 वाली रेडी चाय नहीं आएगी क्या?"
उसका जवाब सुनकर मेरा सर घूम गया!
बोला—"IRCTC ने बंद कर दी, अब यही बिकती है।"
मैंने वहीं उसका झूठ पकड़ा और
पैंतरा बदलते हुए कहा—"मैं खुद IRCTC से जुड़ा हूँ, तुम्हारे मैनेजर को बुलाओ।"
यह सुनते ही वह घबरा गया
और बहानों की झड़ी लगा दी—"दूध नहीं है... चूल्हा खाली नहीं है... चूल्हा खराब है।"
मैंने कड़े लहजे में कहा—"तुम्हारा दिमाग खराब है! एलएचबी (LHB) पैंट्री में अब खाना बनाने का सिस्टम ही नहीं होता, सिर्फ वाटर बॉयलर होता है, तो चूल्हा कहाँ से खराब हो गया? पहले ₹10 वाली चाय लाओ और मैनेजर को भेजो, नहीं तो अभी शिकायत म��ल करता हूँ।"
वह चला गया। मेरे सामने बैठे एक परिवार ने बताया कि वे 6 लोग हैं और सुबह से सिर्फ दो बार चाय पीने में उनके ₹200 खर्च हो गए! सोचिए, आम जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
थोड़ी देर में वही वेंडर आया और बोला—"लीजिए ₹10 वाली चाय।" उसने तुरंत एक 'एव्रीडे' का दूध पाउच फाड़ा, गर्म पानी में ��िलाया, टी-बैग डाला और दे दिया। यानी दूध भी था और सामान भी, बस छिपाकर रखा था! मैंने पूछा—"मैनेजर कहाँ है?" तो बोला—"अभी सोकर नहीं उठे हैं।"
मैंने उसे साफ कहा—"तुम्हारा मैनेजर सोया है और तुम पैसेंजर्स को सुबह 5 बजे से चिल्लाकर जगा रहे हो? जबकि IRCTC का सख्त नियम है कि रात 11 से सुबह 6 बजे तक कोई वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेचेगा।" वह चुपचाप खिसक गया।
करीब सवा छह बजे पैंट्री कार के मैनेजर साहब खुद ��ए। चेहरे पर हवाईयाँ उड़ रही थीं।
बनावटी मुस्कान के साथ बोले—"सर नमस्कार, मैं पैंट्री मैनेजर हूँ। वेंडर छोटा लड़का है, गलती हो गई।"
मैंने उन्हें सीधे शब्दों में आइना दिखाया—"गलती वेंडर की नहीं, तुम्हारी है। तुम लोग मिलकर पूरे सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे हो। एक तो सुबह 5 बजे चिल्लाकर नियम तोड़ रहे हो,
ऊपर से ₹10 वाली चाय छुपाकर ₹20 का प्रीमिक्स जबरन बेच रहे हो (Forced Selling)। स्टॉक कम होने का बहाना मत बनाना, क्योंकि मेरे टोकते ही तुरंत पाउच और टी-बैग बाहर आ गए।"
मैनेजर पूरी तरह सकपका गया और हाथ जोड़कर बोला—"सर प्लीज शिकायत मत कीजिए, आइंदा से पूरी ट्रेन में सबको ₹10 वाली चाय ही मिलेगी और टाइमिंग का पूरा ध्यान रखेंगे।"
मैंने कहा—"शिकायत तो मैं फिर भी करूंगा ताकि तुम लोगों को सबक मिले, लेकिन फिलहाल इस पूरे कोच में जो भी चाय मांगेगा, उसे ₹10 वाली ऑफिशियल चाय ही दोगे।
��गर दोबारा कोई ₹20 प्रीमिक्स चिल्लाता मिला, तो सीधा RailMadad' ऐप पर तुम्हारी पैंट्री का लाइसेंस सस्पेंड करने की कंप्लेंट डालूंगा।"
मैनेजर 'जी सर, बिल्कुल सर' करता हुआ वेंडर को लेकर दबे पाँव भाग खड़ा हुआ।
साथियों, यह लड़ाई सिर्फ ₹10 की नहीं है, यह हमारे हक की है। जब भी ट्रेन में सफर करें, सजग रहें:
1. सुबह 6 बजे से पहले और रात 11 बजे के बाद वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेच सकते।
2. ₹10 वाली साधारण चाय मां��ना ��पका हक है।
3. कोई वेंडर मनमानी करे तो बिल मांगिए। नियम है—"No Bill, No Earnings"।
4. वेंडर न माने तो तुरंत RailMadad' ऐप या टोल-फ्री नंबर 139 पर शिकायत दर्ज करें।
एक बात और ध्यान रखें कि आईआरसीटीसी के खाने की थाली की रेट 80 रुपये ही है अगली बार जब आप ट्रेन में खाना खरीदे तो 80 वाली थाली की ही मांग करें अगर नहीं देवें तो तुरन्त शिकायत करें. हाथ जोड़कर 80 वाली थाली देकर जाएगा
जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, ये पैंट्री वाले ऐसे ��ी आम यात्रियों को लूटते रहेंगे। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर रेल यात्री अपने अधिकारों को जान सके!
आपकी क्या राय है कॉमेंट में बताए....Read News
This was my exact fear that's why I posted last month. What if bad actors are making it worse? And as per Dainik bhaskar report, yes some of them are doing so. They are mixing extra ethanol in regular petrol. This is happening in Rajasthan, imagine the situation in other states.
#BREAKING: Tibetan activist Lobga Rangzen has died after setting himself on fire outside the United Nations headquarters in New York in protest against China’s occupation over Tibet. Moments before the act, he livestreamed an appeal for Tibetan independence and unity.
Warning: Below video contains graphic and distressing footage. Viewer discretion is strongly advised.
>ब्रो का नाम दीपक गहलावत है
>ब्रो 2012 बैच का हरियाणा कैडर का IPS अधिकारी ��ै
>ब्रो ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन में रीजनल डायरेक्टर है
>ब्रो पर 5000 करोड़ के फर्जी दवाई का मामला CBI से हल करवाने के लिए 3 करोड़ माँगने का आरोप है,
>ब्रो को दबोच कर गिरफ़्तार कर लिया गया है
>ब्रो के ऊपर आरोप है कि मुख्य आरोपी N राजा से मिले और कहा चिंता मत कर ब्रो मैं हल कराऊंगा तेरा केस , CBI में अपना सिस्टम है
>ब्रो के ऊपर आरोप है कि ब्रो ने एक इंस्पेक्टर की मदद से हवाला के रास्ते 1 करोड़ ले भी लिया
>अब सम��� आया कि ब्रो लोग करोड़ों का पैके�� छोड़कर देश सेवा क्यूँ चुनते है,
>ब्रो अब खुद का केस मैनेज करने का सिस्टम लगाएगा
>ब्रो जैसे लोग असली राजा होते है,कभी विचलित नहीं होते है, दुनिया को विचलित कर देते है,
>ब्रो बाहर आएगा, और लंबा गेम करके अपना,अपने लोगों का नाम रौशन करेगा
जब कभी भी पुलिसिया हरकत के खिलाफ कोई पोस्ट करता हूं तो पोस्ट में आए लगभग 99% कमेंट पुलिस के खिलाफ होते हैं।
जब अन्य किसी की भी पोस्ट देखता हूं तो भी उस पोस्ट में आए 99% कमेंट पुलिस के खिलाफ होते हैं।
यानी देश की 99% जनता पुलिस कार्यवाही से खुश नहीं है।
फिर भी पुलिस वालों को शर्म नहीं आती है, सरकारों को शर्म नहीं आती है।
ऐसा क्यों?
क्यों सरकारें पुलिस रिफॉर्म नहीं करती हैं, क्या ���ब अंधे हैं? गूंगे हैं? बहरे हैं?
In a fitting rebuke to the Supreme court, the @narendramodi govt (SIA) has reopened cases of Kashmiri Hindu genocide.
Prominent ones being probed are the brutal murders of Nurse Sarla Bhat and Judge Neelkanth Ganjoo by Yasin Malik's terror group, shown here in the Kashmir Files.
>नाम रंजीत कुमार हिमांशु
>पद सन 2004 से बोकारो में चपरासी (संविदा कर्मी)
>जुर्म 4 साल पहले बचे हुए बिस्किट और चाय की पत्ती घर ले गए
>सजा नौकरी से बर्खास्तगी
>��रोप लगाया गया कि सरकारी सामान निजी इस्तेमाल के लिए लिया गया
>हिमांशु ने बाद में सामान वापस भी कर दिया था
>अब हाईकोर्ट ने नौकरी बहाल की है
>इतने बड़े अपराध के लिए फाँसी से कम की सजा नहीं होनी चाहिए
>जिस देश में अधिकारी 100 करोड़ का घोटाला करते हों वहाँ ये बिस्किट चुरा रहा
>क्या इसको इतनी छोटी चोरी करते हुए शर्म नहीं आयी
(चोरी चोरी होती है चाहे छोटी हो या बड़ी, काश ! बड़े चोरों को भी नौकरी से निकालना इतना आसान होता)
>ब्रो का नाम मुकेश चौधरी है
>ब्रो नकुर विधानसभा यूपी से भाजपा विधायक है
>ब्रो ने लखनऊ से चंडीगढ जाने सुपरफास्ट में टिकट बुक कराया
>ब्रो को फर्स्ट AC में लोअर बर्थ नहीं मिली
>ब्रो नाराज हो गया और भोंगा पसार दिया
>ब्रो ने 15 मिनट तक ट्रेन नहीं चलने दी
>बाद में बहुत मुश्किल से ब्रो को लोअर बर्थ दी गयी
>ब्रो ने तब ट्रेन लखनऊ से आगे बढ़ने दी
>काश ब्रो जनता के कामों के लिए भी इतना जिद्दी होता
>काश देश का हर नागरिक सीट न मिलने पर रेल्वे से लड़ पाता