एपिस्टीन फाइल में जिन बच्चियों के जिस्म और मांस को अमीरों द्वारा नोचा खाया गया ,
उनमें से 6 पीड़ित लड़कियों ने अपने साथ हुई हैवानियत को एक न्यूज चैनल पर शेयर किया जिसे सुन सच में रूह कांप जाएगी ,
इतने क्रूर और हैवान राक्षस भी नहीं होंगे जितने ये थे।
https://t.co/rsBdvTgFnZ
Reality of Hemanta Biswa Sharma.💥
हेमंत विस्वा शर्मा अपनी जवानी के समय में आतंकवादी संगठन ULFA के लिए काम करता था ,
इस पर TADA लगाया गया और पॉलिटिकल मर्डर और घोटालों के आरोप लगे।
जो हिंदू हृदय सम्राट बना घूम रहा उसका बैकग्राउड इतना गंदा।😱
BREAKING : Sandeep Chaudhary gave belt treatment to BJP on contaminated water issue
"People died due to incompetence of govt and Kailash Vijayvargiya was mocking a question asked on that" 🔥
100% use of spine in journalism 🫡
पूरे बिहार के बच्चों के लिए जिनके दिल में ममता हो ऐसी माँ बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीया श्रीमती राबड़ी देवी जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई।
भगवान से प्रार्थना है कि आप स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों।
BPSC पेपर लीक मामले में जब सरकार हीटर जला गहरी नींद में सोई हुई थी और BPSC के बच्चे ठंड में गर्दनीबाग में धरना दे रहे थे तो श्रीमति @RabriDeviRJD जी ने सदन में मामला उठाकर बच्चों के पक्ष में पुरजोर तरीके से आवाज उठाई।
कुछ लोग सवाल करते हैं कि भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस के नाम पर आज़ाद भारत में अंग्रेज़ों की जीत का जश्न क्यों मनाया जाता है?
ऐसे लोगों को यह वीडियो ज़रूर देखना चाहिए क्योंकि यहीं से भ्रम टूटता है और सच सामने आता है।
भीमा कोरेगांव किसी साम्राज्य की विजय का उत्सव नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण की याद है जब महार सैनिकों ने पेशवाशाही की ब्राह्मणवादी अत्याचार-व्यवस्था को चुनौती दी।
यह शौर्य सत्ता की नहीं, आत्मसम्मान की जीत का प्रतीक है। यही वजह है कि इसे श्रद्धा से याद किया जाता है क्योंकि यह लड़ाई बराबरी, इंसाफ़ और मानवीय गरिमा के लिए थी।
बाबा साहब डॉ. आंबेडकर ने भी भीमा कोरेगांव स्मारक को दलित स्वाभिमान का प्रतीक माना।
जो इसे ‘अंग्रेज़ों की जीत’ कहकर खारिज करते हैं, वे इतिहास के संदर्भ और सामाजिक सच्चाई दोनों को नज़रअंदाज़ करते हैं। यह वीडियो देखिए, सारे जवाब मिल जाएंगे। ✊
#शौर्य_दिवस #BhimaKoregaonShauryaDivas
कुछ लोग सवाल करते हैं कि भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस के नाम पर आज़ाद भारत में अंग्रेज़ों की जीत का जश्न क्यों मनाया जाता है?
ऐसे लोगों को यह वीडियो ज़रूर देखना चाहिए क्योंकि यहीं से भ्रम टूटता है और सच सामने आता है।
भीमा कोरेगांव किसी साम्राज्य की विजय का उत्सव नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण की याद है जब महार सैनिकों ने पेशवाशाही की ब्राह्मणवादी अत्याचार-व्यवस्था को चुनौती दी।
यह शौर्य सत्ता की नहीं, आत्मसम्मान की जीत का प्रतीक है। यही वजह है कि इसे श्रद्धा से याद किया जाता है क्योंकि यह लड़ाई बराबरी, इंसाफ़ और मानवीय गरिमा के लिए थी।
बाबा साहब डॉ. आंबेडकर ने भी भीमा कोरेगांव स्मारक को दलित स्वाभिमान का प्रतीक माना।
जो इसे ‘अंग्रेज़ों की जीत’ कहकर खारिज करते हैं, वे इतिहास के संदर्भ और सामाजिक सच्चाई दोनों को नज़रअंदाज़ करते हैं। यह वीडियो देखिए, सारे जवाब मिल जाएंगे। ✊
#शौर्य_दिवस #BhimaKoregaonShauryaDivas
भाजपा का “बेटी बचाओ” से “बेटी का Rate लगाओ” तक का सफ़र देश के लिए भयावह है।
अगर महिला एवं बाल विकास मंत्री के पति बिहार की महिलाओं का “Rate” बता रहे हैं तब तो उत्तराखंड की महिलाओं के लिए भी ख़तरनाक है! अंकिता भंडारी का केस तो हम सबने देखा!
सवाल बिहार के भाजपा नेताओं और नेत्रियों से है। कब तक पार्टी लाइन से बंध कर चुप रहेंगे, आपके घर में भी तो महिलायें हैं।
महिला सम्मान से बड़ी है पार्टी?
BJP नेता कह रहे है कि 10 हजार ₹ में महिलाओं का वोट खरीदने के बाद अब बिहार से ₹20-25 हजार में लड़की ले आएंगे।भाजपाइयों की बिहार और महिलाओं के प्रति सदा से ही ऐसी विषैली सोच रही है।