Paradox of the decade is, bank employees are on strike on Saturday & Monday demanding five days week and banks’ management has asked the employees to work tomorrow which is Sunday
देश के बड़े बड़े स्टैंडअप कॉमेडियनों से लेकर व्हाट्सएप मैसेजेस और फेसबुक पोस्टों पर बैंक कर्मियों की कार्यशैली का खूब मजाक बना ,लोगों ने ठहाके लगाए,
लेकिन आज जब वहीं बैंक कर्मी जब काम के बोझ के तले दबकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा और सुसाइड कर रहा तो लोगों ने मुंह में फेवी क्विक डाल रखी है।
अरे हाँ SBI वालों, पता चल गया कि 28-30 तुम्हारी ब्रांच बन्द रहेंगी, हड़ताल है। और उसके बदले तुम रविवार को काम करने वाले हो।
धन्यवाद🙏
बस कर जाओ सुसरों🙏 चार दिन से टेक्स्ट, व्हाट्सएप मैसेज, मेल, सब जगह 10-10 नोटिफिकेशन भर डाले। अब बस कबूतर के चिट्ठी बाँधकर भेजना बचा है।
1 दिन स्ट्राइक की तो ₹4,500 कटेंगे
रविवार को बैंक खोलकर काम किया तो ₹2000 मिलेंगे।
वाह! क्या शानदार गणित है—
हड़ताल करो तो ₹4,500 का दंड,
छुट्टी के दिन काम करो तो ₹2,000 का इनाम!
यानी कर्मचारी की मेहनत की कीमत ₹2,000,
और उसके अधिकार की कीमत ₹4,500?
#5DaysBanking#UFBU#PLI
सरकार और बैंक, जनता को Sunday को बैंक खुलने के messages इतनी शिद्दत से ऐसे भेज रही हैं, जैसे ये कोई *144* साल बाद आने वाला *कुंभ का मेला* हो ।
इस sunday को अगर वो लोग बैंक नहीं गए तो ये मौका उनके जीवन में दोवारा नहीं आएगा ...
और स्वर्गलोक से आए हुए बैंकर देवता अमृत पिलाएंगे सभी Customer को ...😄
This government has zero respect for bank employees.
Forcing banks to open on Sunday is a complete betrayal. This will be remembered as a BLACK DAY in Indian banking history.
Politically, India is exhausted. There's nothing left in its political discourse except for reservations, feminism, wokeism. Indian polity is a failed story. BJP, INC or any other party, they're all failures. India needs a reset.