इतना तो अब स्वीकार कर ही लीजिए कि सोशल मीडिया में आप कमजोर हो गए हैं। फेसबुक पर आप बहुत पीछे हैं, इंस्टा पर नहीं के बराबर हैं, ट्विटर की मैं नहीं जानता।
आपकी सत्ता के शुरुआती दिनों में आपके लिए निस्वार्थ बोलने, लिखने वालों की बड़ी फौज थी। उनको पढ़ने सुनने वालों की भी बड़ी संख्या थी। यह संख्या इतनी बड़ी थी कि आम लोगों का मन भी यहां की चर्चा से ही बनने बिगड़ने लगा था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह उलट गई है। कारण? कारण तो यह भी है कि आपने कभी कारण ढूंढा ही नहीं।
आपके लिए बोलने वाले लोग कहां गए? वे सब के सब यहीं हैं, बस बोलते नहीं। वे आपके कार्यकर्ता नहीं थे, अपनी इच्छा से आपके लिए बोलते थे। आपका काम था उनका ध्यान रखना, उन्हें सहेज कर चलना, पर आपने छोड़ दिया... आपके उन निस्वार्थ समर्थकों ने जिसदिन सोचा कि "मैं उनके क्यों बोल रहा हूं? इनके लिए गाली खाने से क्या लाभ है?" उसी दिन वे पीछे हो गए।
इस आंदोलन में यह तक देखा गया कि लगभग सारे वामी लेखक और पत्रकार भी लड़कियों द्वारा दी गई गंदी गंदी गालियों को डिफेंड कर रहे हैं। इतने अश्लील शब्द जिन्हें कोई भी सभ्य, पढ़ा लिखा व्यक्ति सामाजिक रूप से बोलना नहीं चाहेगा उसका भी इन कथित बौद्धिक लोगों ने समर्थन किया, बल्कि ऐसा करने के लिए उकसाया। वे बच्चों को इस अभद्रता के लिए सार्वजनिक रूप से उकसाते रहे और आप देखते रह गए। मजा यह कि ये वो लोग हैं जिनकी संस्थाएं आपसे साल में करोड़ों का काम लेती हैं।
विपक्ष का अपना ग्लैमर होता है, प्रतिरोध का अपना आनंद... तरुणाई स्वाभाविक रूप से सदैव विपक्ष के साथ होती है। आपके लिए बोलने लिखने वालों ने भी अपनी शुरुआत पिछली सरकार के विरोध में ही की थी। तो जो युवा, बच्चे आपके विरोध में सड़कों पर थे उनका विरोध कोई बहुत आश्चर्यजनक घटना नहीं थी। आगे भी विपक्ष जब जब उन्हें आपकी गलती समझा देने में सफल होगा, वे आपके विरुद्ध इसी तरह मुखर हो जाएंगे। बात बस यह है कि आपका पक्ष, आपकी बात, उन तक नहीं पहुंच पा रही है। सोचिए न, आपने अपनी बात उन तक पहुंचाने के लिए क्या प्रयास किया?
टीवी वाली मीडिया के लिए विपक्ष यह सिद्ध करने में सफल हो चुका है कि वे गोदी मीडिया हैं। यह ठप्पा अब आसानी से नहीं हटेगा। दूसरी बात कि नई पीढ़ी टीवी से अधिक सोशल मीडिया की ही सुनती है, उसके ऊपर असर टीवी का नहीं सोशल मीडिया का ही है। इस बार का आंदोलन सोशल मीडिया से ही शुरू हुआ है। तो क्या यहां आपका कमजोर होना चिंता का विषय नहीं?
ऐसा नहीं है कि चीजें एकाएक बिल्कुल बिगड़ गई हैं और देश आपके विरुद्ध खड़ा हो गया है। केंद्र के साथ साथ बाइस राज्यों में सरकार है आपकी, आसाम बंगाल को जीते अभी कुछ ही महीने हुए हैं। पर यह जरूर है कि विपक्ष युवा पीढ़ी को आपके विरुद्ध करने में सफल होने लगा है। उस युवा पीढ़ी तक अपना पक्ष पहुंचाना भी आपका ही काम है।
रास्ता ढूंढिए, बहुत कठिन तो नहीं ही है।
है कि नहीं? 🙂
साभार
इन सब 2 कौड़ी की लड़कियों को इतना फेमस करो कि इनका बाहर निकलना मुश्किल हो जाए , इनके घरवालों को ऐसी औलाद पैदा करने के लिए शर्म आए
इनको इनके मोहल्ले वाले ही न रहने दे मोहल्ले में ,
मोहल्ले का दुकानदार सामान तक देने से मना कर दे
गलियाँ बहुत ज्यादा हैं , वीडियो को अपने रिस्क पर देखें ।
और शेयर करना बहुत जरूरी है ताकि सब इनको पहचान ले , इनकी सजा इनको इनके अपने और पहचान वाले ही देंगे ।।
आज के बाद भी हमारे हिन्दुस्थान के बच्चे आगे भी अरबी रेगिस्तानी कबिलाई लुटेरे डकैत बलात्कारी हत्यारे शैतानी राक्षसी मज़हबी कीड़ों को महान पढ़ते रहेंगे।
पहली बार किसी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सत्य की मशाल उठाई थी एक कदम चले देश द्रोही गद्दारों के शिकार हो लिए।
मै तो खुश नहीं आप अपने राय दीजिये।
खड़गे जी संसद में आकर बैठो तो ,
संसद में सवाल जवाब करो तो,
सड़कों पे बोलने के लिए जनता ने आपको संसद नहीं भेजा ,
संसद में चर्चा के लिए इस (मोदी जी) बंदे ने सत्र शुरू होने से पहले ही बोला था ...
इस बिटिया का दर्द मानसिक स्थिति का जिम्मेदार कौन है ?
क्या इसकी जिम्मेदारी केजरीवाल, अखिलेश यादव,आम आदमी पार्टी योगेन्द्र यादव दीपके लेंगे जिनके आह्वान पे ये वह है और भी इसकी जैसे न जाने कितने बच्चे बच्चियों को जो कुछ वहां सहना पड़ रहा है।
कोई नहीं आयेगा वह आपको बचाने ।
Hello Generals,
Remember, our issue more than paper chori is Seat chori.
Seat chori issue biggest issue for General category people.
It's a time to End Reservation.
मेरे शर्ट के नीचे फटी बनियान हैं आपके स्टूडियो में मै इज्जत ढक के आया हु - नीट टॉपर हर्ष दुबे
हमने परमिशन मांगी इस सरकार ने नहीं दिया
और आतंकियों को परमिशन एयरपोर्ट पर जाके पहुंचाया जाता है
इस देश में 90% बच्चे आत्म हत्या करते है वो सामान्य वर्ग के होते हैं NEET पेपर लीक में जो मरे हैं वो अधिकतर सामान्य वर्ग के है
कोई नहीं बात करना चाहता इसपर
मेरे साथ पढ़ने वाले जिनके बाप हॉस्पिटल हैं बड़ी बड़ी नौकरी थी उनका सिलेक्शन आधे आधे नंबर पर हुआ
आरक्षण केवल जाति आधारित नहीं राज्य अनुसार भी है इस लेवल तक आरक्षण को सिस्टम में घुसा दिया गया है
560 में यूपी बिहार के बच्चों का सिलेक्शन नहीं होगा
लेकिन 530-540 में अलग राज्य के बच्चों का सिलेक्शन हो जाएगा
अब बताओ सवर्णों तुम्हारे अंदर शर्म की पानी है कि नहीं कब हम बोलेंगे ?
*🚨✅ CJP का राज खुल गया! 😂*
*कॉकरोच 🪳 अभिजीत दीपके ने खुद कबूल किया:*
“अमेरिका में बेरोजगार था, 5 दिन पहले नौकरी ढूंढ रहा था....
केजरीवाल ने फोन किया और CJP का प्रोजेक्ट दे दिया!”
*ये NEET का आंदोलन नहीं, AAP का paid 💰 प्रोजेक्ट है।*
बेरोजगारों को AAP में ही प्रोटेस्ट करने की “नौकरी” मिल जाती है!
🪳🪳🪳🪳
धर्मेंद्र प्रधान ने मुगलों के इतिहास को किताबों से उखाड़ फेंका
उसकी जगह सनातन का गौरवशाली इतिहास जोड़ा है
और आपातकाल के काले अध्याय को भी जोड़ा गया है
इसीलिए देश विरोधियों को बेचैनी है और उनका इस्तीफा मांग रहे हैं
क्या आप रंगराजन जी से सहमत है
अगर धर्मेन्द्र प्रधान के साथ साथ
पंजाब और केरल के शिक्षामंत्री का इस्तीफा होना चाहिए ।
विजेता देहिया , हीं हीं हीं...........
अरि बेशर्म बुढ़िया अस्थमा के रोगी को तो आफे मक्का मदीना भी जाने की इजाजत नहीं है फिर तू कहे प्रोटेस्ट में गई।
वहां कोई जमजम बटेगा .....
आंसू गैस या लठ ही मिलेंगे।
वांगचुक ने बिना किसी तिलचट्टे को खबर किए अनशन तोड़ दिया.....पुलिस के लव लेटर अब दंगाइयों के घर पहुंचने शुरू हो गए....बेचारे वीडियो डाल डाल के माफ़ी मांग रहे हैं....
तो कुल मिला के किरान्ति की असली शुरुआत अब हुई है अब पता चलेगा कि पुलिस के लव लेटर का क्या मतलब होता है
लेकिन.....
क्या ये जो कुछ भी हुआ उसकी वजह Paper leak था...!!
वो तो पहले भी होते रहे हैं, असल वजह कुछ और थी जिसका नाम FCRA है
शुरू से समझते हैं....
2004 मे जब कॉंग्रेस की सरकार बनी थी तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन सब जानते हैं कि वो सिर्फ एक मुखौटा थे असली सरकार NAC ( National Advisory Committee) चला रही थी जिसकी मुखिया थी उनकी राजमाता और इस NAC के पीछे अधिकांश NGO थे जो विदेशों से चंदा लेते थे
बेहिसाब चंदा, और देने वाले उनसे अपना मकसद पूरा कर रहे थे भारत की तरक्की को रोकने का मकसद भारत को तोड़ने का मकसद, सनातन को खत्म करने का मकसद....
2010 के बाद इन विदेशी दानदाताओं को ये समझ मे आ गया कि कॉंग्रेस के प्रति जनता मे बेहद नाराजगी है और वो सत्ता मे वापस नहीं आने वाली, मोदी की लोकप्रियता चरम पर है तब उन्होंने अपने ही कुछ मोहरों को आगे किया
आप याद कीजिए हैंडसम सिसोदिया और नटवरलाल NGO वाले हैं, कबीर और परिवर्तन इनके NGO हैं, और यही क्यूँ इनकी तो पूरी पार्टी ही NGO की पार्टी है
तो मकसद ये था कि कॉंग्रेस से नाराज वोटर सीधा मोदी की तरफ ना चला जाए उसमे से कुछ उसके मोहरों की तरफ shift हो जाए ताकि मोदी अगर आए भी तो कमजोर सरकार के साथ जैसे अटलजी आए थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं देश की जनता ने एकतरफा फैसला सुनाया और इनके सारे किए धरे पर पानी फिर गया यहां से इनके पतन की शुरुआत होती है जो 2020 मे FCRA के संशोधन तक पहुंचती है.....
* FCRA कानून इंदिरा गांधी की सरकार ने Emergency के दौरान बनाया था...विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए.
* 2020 मे सरकार ने इसमे संशोधन करके NGO के प्रशासनिक खर्च यानि उनका खुद का खर्च 50% से घटाकर 20% कर दिया सारी विदेशी फंडिंग अब दिल्ली के एक SBI ब्रांच मे ही आएंगी, आधार जरूरी किया.
* इस संशोधन के बाद लगभग 6000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए 2019-20 के दौरान भी लगभग 2000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए और सरकार के सामने एक नई समस्या खड़ी हुई कि जिनके लाइसेंस रद्द हुए हैं उनकी संपत्ति का क्या करें ये जो पूरे देश में चर्च सेंट जेवियर सेंट मार्टिन जैसे स्कुल-कॉलेज खोल रखे हैं उनका क्या किया जाए....!!....
* तो अब सरकार एक संशोधन लाना चाहती है कि यदि यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द हो जाए तो विदेशी फंड से बनी सारी संपत्ती सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के पास चली जाएंगी.
सारा फसाद इसी बात का है अब ना पैसा आ पाएगा और ना यहां जो empire बना रखा है वो बचेगा ये तो सड़क पर आ जाएंगे, आ जाएंगे क्या आ गए सबसे बड़ा नेता मोदी के घर के सामने जमीन पर लोट रहा है चमचे बीच चौराहे नंगे नाच रहे हैं मुजरा कर रहे हैं पागलों जैसी हरकते कर रहे हैं क्या बोल रहे हैं उन्हें खुद नहीं पता....
इतिहास पूछेगा....
कितने आदमी थे
ज़वाब मिलेगा : सरदार सिर्फ 2.....और उन दोनों ने ही पूरे के पूरे विपक्ष को पागल बना के सड़क पर नचा दिया था...
बिल्कुल आज भी देश प्रधानमंत्री जी के साथ है।
दिल्ली और पंजाब की जनता के साथ साथ पूरा देश तुम्हारी अवसरवाद की राजनीति देख चुका है।
पहले अन्ना आन्दोलन की आड़ में अपनी रोटियां सेकी
अब काकरोच जनता पार्टी बना के दिखावा कर करके छात्रों को भड़काकर अपनी रोटियां सेकना चाहते हो पर होगा नहीं।
सवाल यह है कि कांग्रेस का उद्देश्य समाधान था या राजनीतिक अवसर? अगर प्राथमिकता युवाओं के हित होते, तो संवाद का स्वागत किया जाता।
मोदी सरकार की ‘संवाद से समाधान’ की नीति ने कांग्रेस की राजनीति को बेनकाब कर दिया है!
@ArvindKejriwal
पंजाब के अभिभावक पूछ रहे है पेन ड्राइव , पेन कैमरा पेपर लीक और सफाई कर्मचारियों पे लाठी चार्ज पे किसका इस्तीफा हो रहा है या मांग रहे हो?
पंजाब की जनता जानना चाह रही है!
इन दलालों की दोगलापन देखिये ,
इनको नीट पे तो धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए।
परन्तु
पंजाब के पेपर लीक पे बात ही नहीं करनी ।
पूरी तरह पत्रकार के सवाल को इग्नोर कर रहे हैं
ये क्या साबित नहीं करता के ये केवल सेलेक्टिव है बस अपना (आप पार्टी)का एजेंडा चलना है।
इन्हें छात्राओं से कुछ नहीं लेना देना।