क्या तुम चाहते हो,
कि मानवों को अकर्मण्य बनाने वाली,
समस्त सब्सिडी का नंगा नाच बंद हो ?
अगर हाँ !
तो धर्म की शरण में आओ !
महादेव व माता के शरण में आओ
भावी महादेव-दूत के शरण में आओ.
तुम अपना सब कुछ धर्म को दे दो.
धर्म ! तुम्हें अपना सब कुछ दे देगा.
✍️ सत्यानंद
टैक्स-मुक्त* भारत चाहिये ?
यानि टैक्स का सरलीकरण चाहिये ?
१७वें चरण वाली आत्मा के शरण में आओ.
यानि, भावी-महादेव-दूत के शरण में आओ.
सभी को आने की आवश्यकता नहीं है. केवल दस हजार मानव पर्याप्त हैं. यानि प्रत्येक दस लाख की जनसंख्या में से, केवल एक की आवश्यकता है.
✍️ सत्यानंद
आत्मा-यात्रा के १७वें चरण वाली, आत्मा के मूल प्रतिनिधि द्वारा धारण किये गये वस्त्र को, केवल दस हजार मनुष्य चाहिये. यानि समग्र वैश्विक आबादी के, प्रत्येक दस लाख में से, केवल एक मनुष्य चाहिये. केवल इतने भर से ही, पृथ्वी ग्रह पर, धर्म की पुनर्स्थापना हो जायेगी. ______ ✍️ सत्यानंद
हवा चाहिये ?
पानी चाहिये ?
भोजन चाहिये ?
आवास चाहिये ?
देशाटन चाहिये ?
गुरु-सानिध्य चाहिये ?
अलौकिक उन्नति चाहिये ?
अगर ‘हाँ’
तो जो भी तुम्हारे पास है ! सभी कुछ ले कर के आ जाओ. आने से पहले, आ कर समझ लो कि, लायक हो भी या नहीं ? या लायक बनने लायक, हो भी या नहीं ?
✍️ सत्यानंद
धर्म क्यों आवश्यक है ?
धर्म की पुनर्स्थापना क्यों होनी चाहिये ?
क्योंकि,
असुरों-दानवों अधर्मियों-पापियों का,
उपचार कैसे किया जाता है ?
यह फार्मूला !
वर्तमान न्यायिक व्यस्था से संभव नहीं है.
प्रत्येक पाप का, प्रत्येक पापी का,
एक ही उपाय ! धर्म-दंड का भय !!
✍️ स्वामी सत्यानंद
Sahil Singh Suryavanshi
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#शिवशक्तिशिवालयधर्मपुनर्स्थापनकाजपुण्यप्रकल्प
“लोमड़ी रानी !
जरा उधर तो देख.
कुछ साधु आ रहे हैं.
तुम बीच में मत बोलना.
बस चुप-चाप देखती रहना.”
: फल विक्रेता लोमड़ ने, लोमड़ी से कहा.
लोमड़ी ने पूछा :
“क्या देखना है ?”
लोमड़ बोला : “यहीं कि, मैं कैसे उन्हें ठगता हूँ. उनको पचास रुपये दर्जन वाले केले, सौ रुपये के भाव से बेचता हूँ. क्योंकि वे तो साधु हैं ! उन्हें कौन सा, केले के रेट की जानकारी होगी.”
लोमड़ी मुस्कुरा कर,
एक ओर थोड़ा परे बैठ गयी.
तब तक वो साधु !
अपने चार शिष्यों के साथ,
केले के दुकान पर पहुँचे.
गुरु साधु ! एक पचास का नोट,
लोमड़ की ओर, बढ़ाते हुये बोले :
“इस मुद्रा के केले दे दो.”
दुकानदार लोमड़ बोला :
“महाराज जी, केले आज से,
सौ रुपये के दर्जन हो गये हैं.”
साधु बाबा बोले :
“बच्चे ! मैंने रेट तो पूछा ही नहीं,
इस मुद्रा के बदले, जितने आते हैं, उतने दे दो.”
लोमड़ ने कुल छः केले साधु को दिये. तथा धूर्ततापूर्ण तिरछी दृष्टि से, प्रशंसा की चाह में, लोमड़ी की ओर देखा. परंतु लोमड़ी का ध्यान तो, साधु की गतिविधियों पर था.
साधु महाराज ने, कुल छह केलों में से, एक-एक केले, अपने चारों शिष्यों को दे दिया ! तथा एक केला स्वयं रखा ! और एक केला लोमड़ी की देते हुये बोले : “हमारे पास अतिरिक्त हैं, इसे तुम खा लो”
अब तक ! चुप बैठी लोमड़ी, कौतूहलवश साधु से पूछ बैठी : “साधु महाराज ! अगर आपको पचास रुपये में, छः के बजाये बारह केले मिलते, तब आप क्या करते ?”
अपने मार्ग बढ़ना आरंभ कर चुके, साधु बाबा सहज भाव से बोले : “तब ! तुम्हें एक के स्थान पर, मैं सात केले दे देता. क्योंकि तब हमारे पास, सात अतिरिक्त होते. और हम सभी को, एक-एक की ही आवश्यकता थी. मेरे गुरुदेव ! आर्यम्बापुत्र महाराज ने, मुझे सिखाया है कि……. जो अतिरिक्त है ! वह मेरा नहीं है.”
ऐसा बोल कर,
साधु बाबा आगे बढ़ गये.
………..और
लोमड़ी सोचने लगी.
असली मूर्ख कौन ?
वह साधु महाराज !
अथवा मेरा लोमड़.
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✍️ स्वामी सत्यानंद
Sahil Singh Suryavanshi
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अपने जीवन भर की,
गाढ़ी कमाई को,
कहीं निवेश करने से पूर्व !
इस हादसे को जानें.
तथा सदैव ध्यान रखें !
धर्म में किये गये निवेश से,
अथवा धर्म-सम्मत किये गये निवेश से,
बेहतर व सुरक्षित निवेश कोई नहीं होता.
✍️
स्वामी सत्यानंद शाश्वत
+91 9313 246 190
S. S. Suryavanshi
सही मायने में "शत्रुबोध" पर रोंगटे खड़े करने वाली स्पीच ..
इस अकेले काफी ने पूरे लिब्रांडू गैंग को औकात दिखाने के लिए क्या गजब का धोया है
आनंद रंगनाथन जी 🔥🙌
अधिकतर वह चीजें छलावा साबित होती आयीं हैं ! या होती हैं. जिनको पाने के लिये, मानव अत्यधिक व्याकुल होता है. अत्यंत अनमोल चीजें तो, सहजता से ही मिल जाया करती है.
पर इसका यह अर्थ ! कदापि ना लगायें कि, जो छलावा साबित होगी. उसको पाने का प्रयास क्यों करना ?
प्रयास तो इसलिये करना चाहिये. क्योंकि हमारे द्वारा, किया गया प्रयास, ही हमारी अचीवमेंट या सिद्धि है. सबसे अनमोल “प्रयास का करना” ही है.
यानि जब हम कुछ पाने का प्रयास करते हैं. तथा उसको पा लेते हैं. तो उस “पाये-हुये” को अचीवमेंट मानते हैं.
जबकि असली अचीवमेंट तो, वो प्रयास है ! जो उस “पाये-हुये” को, पाने के लिये किया गया.
और उस “किये-हुये-प्रयास” की संतुष्टि ! तो आपको हर हाल में मिलेगी. चाहे आप तथाकथित सफल हों ! या नहीं हों.
॥ जय शिवशक्ति ॥
✍️ स्वामी सत्यानंद शाश्वत
+91 9313 246 190