बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है।
संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।
मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए।
बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है।
मिलावटी दवाइयां और जहरीली अवैध शराब सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही हैं।
मैं इंदौर आ रहा हूं और लगातार प्रदेश के छात्रों, युवाओं और आम लोगों से feedback ले रहा हूं। सामने आ रही भयावह घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज देश भर में सबसे ज़्यादा बर्बाद है।
छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं - हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं।
मध्य प्रदेश सरकार आज भारत की सबसे भ्रष्ट और सबसे कुशासित सरकार है - यही सच्चाई है।
ये सुधीर चौधरी 15 करोड़ रुपये की सैलरी लेकर बता रहे हैं कि पैसा दुकानदारों से लिया जाएगा तो आम आदमी को क्या फर्क पड़ेगा। 😂
अरे भाई, दुकानदार ही तो पूछ रहा है जो Charge मुझसे लोगे, वो मैं कहाँ से दूँगा? अपनी जेब से, या अपने सामान और सेवाओं की कीमत में उसका हिसाब करूँगा?
सरकार ने कभी नाई को आदेश नहीं दिया कि ₹30 की haircut आज से ₹150 की कर दो। फिर ₹30 की haircut ₹150–₹200 कैसे हो गई?
क्योंकि दुकान का किराया, बिजली, सामान, कर्मचारी की salary और बाकी खर्च बढ़ते गए। नाई ने बढ़ी हुई cost अपनी service की कीमत में जोड़ दी।
सरकार ने कभी आदेश निकालकर नहीं कहा कि आज से ₹5 की चाय ₹15 की कर दो। फिर ₹5 की चाय ₹15 की कैसे हो गई?
क्योंकि चाय सिर्फ चायपत्ती से नहीं बनती- दूध, चीनी, गैस, दुकान का किराया, बिजली, मजदूरी, transportation… इन सबकी लागत मिलकर एक कप चाय की कीमत तय करती है।इनमें लागत बढ़ती गई, दुकानदार ने अपना हिसाब कीमत में adjust किया और ₹5 की चाय ₹10–₹15 होती गई।
तुम सही में इतने अनपढ़ हो क्या? चिल्लाए जा रहे हो- आपसे नहीं लिया जाएगा, दुकानदार से लिया जाएगा।
दुकानदार देश का नहीं है क्या? उसकी जेब, जेब नहीं है क्या? उसका पैसा, पैसा नहीं है क्या?
आम आदमी का मतलब सिर्फ ग्राहक होता है क्या?
गज़ब तर्क है-पैसा जनता से ही लो और फिर जनता को समझाओ कि आपसे नहीं लिया जा रहा।
चुनाव आयोग लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने के लिए फ़ैसले ले तो उसके मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
और कुछ नहीं कहना है… बस इतना पूछना है कि हमारे द्वारा इलेक्शन कमीशन में जमा किये गये एफ़िडेविट मिले क्या?
तेल खाने को मना किया पीएम मोदी ने तो जलाने को क्यों नहीं मना किया?
बहरहाल 7.8 ग्रोथ रेट वाली अर्थव्यवस्था में आम जन के लिए दीए के तेल की क़ीमत जाननी हो तो ये वीडियो देखिए…
इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव असल मायने में Student Vs Government है।
Government बोलें तो ABVP/BJP/RSS/DU Admin/दिल्ली पुलिस/दिल्ली सरकार/केंद्र सरकार।
फिर भी NSUI ने पूरी ताक़त से विद्यार्थियों का साथ दिया है। शिक्षा के अधिकार की ये लड़ाई रुकने वाली नहीं है।
इस बार DUSU-6️⃣4️⃣1️⃣2️⃣
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।
ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।
यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन हो और एक्स पर अगर ये हैशटैग ट्रेंड ना करे तो समझ लीजिए आज जन्मदिन है ही नहीं।
आप सब भी जन्मदिन की शुभकामनाएँ जरूर दीजिए।
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
अगर सो कर जाग गए हैं तो इन्हें राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की बधाई दे और बधाई के पात्र बने!
ये वही शख्स है जिनके राज में लाखों कंपनियां बंद होकर करोड़ो लोग बेरोजगार हो गए या न्युनतम मजदूरी पर काम कर रहे हैं।
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
नया भारत Paper leak, unemployment, महंगाई, भुखमरी, में Full Speed में आगे बढ़ रहा है। अब इस बर्बादी की रफ्तार में ब्रेक लगाना जरूरी है!
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस