इस देश की अदालतें हों या सरकारें सभी कर दाताओं के पैसे से चलती हैं। आप कह सकते हैं कि इंसानों द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे से चलती हैं। लेकिन इंसानों के साथ हुई बर्बरता को सुनने के लिए मदर ऑफ डेमोक्रेसी की न्यायपालिका के पास समय नहीं है।
कल रात जंतर मंतर प्रोटेस्ट से लौट रहे जामिया यूनिवर्सिटी के 5 मुस्लिम छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सोशल एक्टिविस्ट जेबा खान ने पुलिस की गाड़ी का पीछा करके उन्हें छुड़ाया।
शहस्ता परवीन:- बच्चो को क्यो रोका है
दिल्ली पुलिस:- ये प्रोटेस्ट में गए थे
शहस्ता:- प्रोटेस्ट में जाना तो संवैधानिक अधिकार है
दिल्ली पुलिस:- मै...मै...मैडम हम पकरे नही है पूछताछ के लिए बिठाया है
(कैमरे पर हाथ मारते हुए) ये हैलो कैमरा बंद कर 😳
पत्रकार:- हम मीडिया से है
शहस्ता:- आप पुलिस गाडी मे बिठाकर कौन सी पूछताछ कर रहे थे
पीडित छात्र:- ये हमे अरेस्ट करने को बोल कर ले जा रहे थे सर का नाम सुधीर सिंह है
दिल्ली पुलिस अब जंतर-मंतर पर आने जाने वाले छात्रो को गिरफ्तार करने पर ऊतारू हो गई है...
वो तो भला हो शहस्ता परवीन जी और मो• अफजल आलम भाई का जिन्होने बच्चो को बचा लिया !!
जंतर मंतर प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारियों को खाना बांटने में सहयोग कर रहे जुनैद ने दावा किया है कि UP पुलिस ने उनके परिजनों को हिरासत में लिया है और बैंक खातों की जांच की है। हालांकि UP पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
जुनैद ने BBC रिपोर्टर @dilnawazpasha से क्या कहा, सुनिए। Video कई दिन पुराना है।
जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाई शुरू होती है, बड़ी दबाव बनाने के बाद जैसे ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष @kharge जी को माइक मिलता है, वो बस इतना बोलते हैं कि हम देश के छात्रों के साथ हैं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा होना चाहिये, अगले सेकेंड में सदन स्थगित कर दी जाती है।
आख़िर कितना डरती है ये सरकार
बरेली, यूपी में डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित भारद्वाज जंतर मंतर पर छात्रों के प्रोटेस्ट में शामिल हुए। अगले दिन कॉलेज पहुंचे तो उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
सरकार से बातचीत के बाद:–
"केंद्र सरकार ने मृतक छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की सहमति जताई है,
लेकिन हमें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं है। इस पर विचार करने के लिए हमने सरकार को 24 घंटे का वक्त दिया है"
ये तस्वीर 15-16 दिसंबर 2019 की रात की है। ये वो मुसलमान छात्र हैं जो NRC, CAA के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे थे और कुछ वो छात्र हैं जो सिर्फ़ जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लाइब्रेरी में पढ़ने बैठे थे।
जब पुलिस ने मुसलमानों पर लाठीचार्ज किया और मुस्लिम बच्चों ने वहां से निकलने की कोशिश की तो दिल्ली पुलिस ने इन छात्रों को इस तरह हाथ ऊपर करवाकर जाने दिया जैसे ये कोई आतंक'वादी हो।
बहुसंख्यक समाज के एक बड़े तबके ने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खूब खिल्ली उड़ाई गयी थी।
डरपोक, उपद्रवी और ना जाने क्या-क्या कहकर मुसलमानों के जज़्बात और दुःख-दर्द का मज़ाक बनाया गया।
और मीडिया, मीडिया के मुंह से बस मुसलमानों के लिए 'उपद्रवी और उग्रवादी' ही निकलता था।
ख़ैर, अगर आप उस वक़्त दिल्ली पुलिस की दहशतगर्दी का विरोध करते तो आज दिल्ली पुलिस की हिम्मत न होती कि वो इस तरह एहतिजाज करने वाले छोटे बच्चों/बच्चियों पर भी लाठी चलाती।
आज दिल्ली पुलिस ख़्वातीन के साथ दुर्व्यवहार ना करती। उनको सरेआम सड़क पर ना घसीटती।
DU ने पूरी निर्लज्जता के साथ लिखा है~
“अगर आप जंतर-मंतर जाएँगे तो आपकी academic progress और opportunities ख़तरे में होगी।”
देश के सभी कॉलेज-विश्वविद्यालय पर RSS क़ब्ज़ा कर रही है और संघियों को हर पद पर बिठा रही है ताकि शिक्षा व्यवस्था और उसके लोग RSS के सामने दण्डवत प्रणाम करें और ये भाजपा के आने के बाद ही शुरू हो गया था। उसका असर अब खुल कर दिख रहा है।
DU के पोस्ट से समझ सकते है ,रेंगना क्या होता है।
अरे Sir आ गए आप आपका टाइम तो 8 बजे का रहता है, आप तो आज 12 बजे प्रकट हुए महाराज अच्छा आपको “मुसद्दा” भी मिल गया, मैंने तो सोचा आपको मसौदा मिला होगा, कोई बात नही।
ये फास्ट ट्रैक कोर्ट की नौटंकी आप न करें,
कोर्ट के सामने आपकी CBI सबूत ही नहीं रखेगी तो कोर्ट क्या कर लेगी?
आज ही आपकी CBI ने कहा “पेपर लीक में पकड़े गए संजीव मुखिया के ख़िलाफ़ कोई सबूत नही”
2024 पेपर लीक में तो आपकी CBI ने 90 दिन तक चार्ज शीट ही दाख़िल नही की और सारे “पेपर चोर” छूट गए।
15 दिसंबर, 2019 को जामिया मिल्लिया में CAA NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सबसे क्रूर पुलिस कार्रवाई देखी
छह साल बाद भी न्याय का पता नहीं चल पाया है।
AMU छात्रों ने जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए धरना दिया है। छात्रों का कहना है कि जौहर यूनिवर्सिटी के संस्थापक अलीग बिरादरी से हैं, जिन्होंने सर सैयद अहमद खान से प्रेरित होकर जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना की है। छात्रों का नेतृत्व कर रहे @aligFaisalTyagi ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए अगर AMU छात्रों को रामपुर भी जाना पड़ा, तो भी वो पीछे नहीं रहेंगे।
रिटायर्ड सेना के एक पूर्व अधिकारी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पहुंचकर जिस दर्द, पीड़ा और गुस्से का इज़हार किया, और चुनाव आयोग पर जो गंभीर सवाल उठाए, उन्हें देश के हर नागरिक को सुनना चाहिए। उन्होंने देश, लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उनकी पूरी बातचीत और यह विशेष वीडियो Millat Times की पत्रकार निखत अली @INikhatAli के साथ YouTube पर देखी जा सकती है।