Tumhe dekhun ya chand dekhun
Baat ek he hai ,
Tumhe dekhun ya khwaab dekhun
Baat ek he hai,,
Mukammal hasil kuch nahi iss jahan mai
Fr tumhe maangu ya khuda ko baat ek he hai...
लट बनकर तेरी ज़ुल्फों की,
मैं बिखर जाऊँ,
कभी तेरे गालों को चूमूँ,
तो कभी तेरी आँखों के आगे आकर निखर जाऊँ।
तू सिमट कर बाँध लेना मुझे अपने हाथों से,
मैं फ��र बिखर कर फिर तेरे सिने से लिपट जाऊं।|
ना दिन लिखते, ना रात लिखते,
अगर गालिब ज़िंदा होते तो,
तेरे लिए सारा आसमान लिखते।
हर सितारे में तेरी खूबसूरती का दीदार होता,
हर रात चाँद तेरी रोशनी से निखर होता।
हर सुबह की किरणें से रोशन ये जहाँ होता,
अगर हर सुबह मेरी आँखों से तेरी सूरत का दीदार होता।
लट बनकर तेरी ज़ुल्फों की,
मैं बिखर जाऊँ,
कभी तेरे गालों को चूमूँ,
तो कभी तेरी आँखों के आगे आकर निखर जाऊँ।
तू सिमट कर बाँध लेना मुझे अपने हाथों से,
मैं फिर बिखर क��� तेरे सिने से लिपट जाऊं।|