महापुरुषों ने जो सहा और जो लिखा नही गया हम वो बताते हैं ।
भारत के मूलनिवासी के सच्चे इतिहास को बताने के लिए अर्थात अपने बहुजन समाज को जगाने हेतु myTHs Explained
दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक नगर ग्योजू से बुद्ध की यह खंडित प्रतिमा जमीन के अंदर से मिली है।
पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार यह प्रतिमा उत्तर सिला काल की है। सातवीं से दसवीं सदी के बीच की यह प्रतिमा है। तब बुद्ध की विचारधारा दक्षिण कोरिया में धड़ल्ले से बह रही थी।
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लुम्बिनी' का नाम बुद्ध माता माहमाया से लिया गया है। महामाया सिर्फ एक उपाधि है, उनका असली नाम रूममन देई है। रुम्मिनदेई स्तम्भलेख या लुम्बिनी स्तम्भलेख (Lumbini pillar inscription) नेपाल के लुम्बिनी में स्थित एक अशोक स्तम्भ पर ब्राह्मी लिपि में अंकित है उनका नाम।
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यह महाराष्ट्र के कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर है उसमें तथागत बुद्ध की मां महामाया की मूर्ति है। महामाया को महालक्ष्मी कहते है। ब्राह्मणों ने बुद्धमाता महामाया को काल्पनिक महालक्ष्मी के नाम से प्रचार किया।
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जापान की सन 1677 की तथागत बुद्ध की यह प्रतिमा जिसके नीचे तीन बंदर को देख सकते हैं। तथाकथित लोगों ने इसे गाँधी के तीन बंदर नाम से प्रचारित किया है किंतु यह तो बुद्ध के विचार हैं।
कितना मूर्ख बनाया हमें इन चालकों ने देश की जनता को।
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ऋग्वेद के ऋषियों को अपने धर्म का नाम नहीं पता था। पूरे ऋग्वेद में कहीं किसी ऋषि ने सनातन शब्द ही प्रयोग नहीं किया। असल में प्राचीन भारत में सनातन शब्द जैसा कोई शब्द ही नहीं था। बुद्ध ने अपने वचन में सनातन शब्द प्रयोग किया।
अस्स धम्मो सनंतनो
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खबर कैमूर जिला के एक गांव से है। बुद्ध को यहां स्थानीय लोग देवी माई के रूप में पूजा अर्चना करते हैं। जरा ठीक से देखकर बताओ तो, कौन है ये, माई या फिर बुद्ध ?
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बिहार के कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड का मिंव गांव आज हमारी गौरवशाली बौद्ध विरासत के साथ हो रही धोखाधड़ी का गवाह बन रहा है। वहां मौजूद तथागत बुद्ध की प्राचीन प्रतिमा को स्थानीय लोगों द्वारा हनुमान के नाम से पूजा जा रहा है।
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मात्र 5,000 रूपये के लिए वीरभद्र तिवारी ने चन्द्रशेखर आजाद की मुखबिरी की थी जिसके चलते इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में चारों तरफ से अंग्रेजों ने चन्द्रशेखर आज़ाद को घेर लिया। चंद्रशेखर आजाद ने ख़ुद की कनपटी पर गोली मार ली,
गद्दारी का इतिहास लंबा है ब्राह्मणों का। #चन्द्रशेखर_आजाद
तुलजाभवानी मंदिर के अंदर बुद्धमाता महामाया का शिल्प साबित करता है कि तुलनाभवानी असल में महामाया ही है और यह छत्रपति शिवाजी महाराज तथा महाराष्ट्र के सभी बहुजनों का कुलदैवत है। हिन्दू धर्म के नाम पर दूसरे की विरासत को ऐसे हिन्दू लोग हड़पते हैं।
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ब्योडो-इन मंदिर का फीनिक्स हॉल एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और इसे जापानी दस-येन सिक्के पर दर्शाया गया है। भारत में कॉपी पेस्ट करके कौन से भगवान का निर्माण किया गया है?
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बोधिसत्व की इन मूर्तियों का निर्माण जापान के एक प्रसिद्ध मूर्तिकार जोचो द्वारा 1050 में हीनयान काल में हुआ था।जोचो का यह शौक था कि वे बोधिसत्वों का निर्माण वाद्ययंत्रों के साथ ही करते थे। इन मूर्तियों में बोधिसत्व वाद्ययंत्र बांसुरी बजा रहे हैं।
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जापान के क्योटो में ब्योडो-इन मंदिर के फीनिक्स हॉल (होओडो) से उंचू कुयो बोधिसत्व (बादलों में बोधिसत्व) की 52 लकड़ी की मूर्तियों में से एक को दर्शाता है।
मूर्ति अनुप्रस्थ बांसुरी बजा रही है।
किसी अदालती आदेश या सर्वे की जरुरत नहीं है। बस उन प्राचीन छोटे-बड़े मंदिर में चले जाओ जहां मूर्तियां भी प्राचीन रखी हुई हैं। उन मूर्तियों को पहनाए, ओढ़ाए गए वस्त्र और श्रृंगार हटा दो। उस मंदिर की असलियत उजागर हो जाएगी। कहीं पर बुद्ध की मूर्ति दिखेगी तो कहीं जैन तीर्थंकरों की।
पहला चित्र तामिळनाडू का हैं जिसमें बुद्ध नाग लोगों के उपर दिख रहे हैं। इस मूर्ति को कृष्ण की मूर्ति कहा जा रहा हैं क्योंकि इसमें किसी को नाग के ऊपर दिखाया गया है
दूसरा चित्र कृष्ण का हैं कृष्ण की इस लीला को कालिया मर्दन के नाम से जाना जाता हैं।
असली वाला कौन सा है ?