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Government Acts to Curb Sugar Price Rise, Ensure Adequate Availability During Festive Season
Sugar prices have increased in recent weeks, from ₹48.18 per kg on 20 July 2026 to ₹55.70 per kg on 20 August 2026. The Government is closely monitoring the situation and has taken a series of measures to ensure adequate availability of sugar and stable prices for consumers.
More details: https://t.co/qy1BEIel9q
#SugarPrice #FestiveSeason
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आज का ब्रह्म ज्ञान आपको जरूरी चीजों के असली और नकली में फ़र्क कैसे करें, इस बात को समर्पित है 🙏 अपनी अक्ल लगाये और नकली से स्वयं को और अपने प्रियजनों को बचायें। धन्यवाद 🙏
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, डीडी यूपी का स्पेशल शो 'Trillion Tracker' पहुंच चुका है बाराबंकी! 🌾📈
इस शनिवार शाम 5 बजे DD News UP पर देखिए...
बाराबंकी जिले की खास ग्राउंड रिपोर्ट और जानिए यूपी के इस जिले के विकास की पूरी कहानी।
@UPGovt@MIB_Hindi@PIB_India@PibLucknow@DDNewsHindi@sshahideepti
#TrillionTracker #UttarPradesh #Barabanki #YogiAdityanath #UPEconomy #DDNewsUP
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हंसी हंसी में सीखिये योगी से स्वास्थ्य के साधन।
वीडियो में नीचे जमीन पर श्री श्री रविशंकर भी बैठे हैं।
स्वामी देवमूर्ति जी की उम्र इस वीडियो के समय 106 वर्ष थी।उन्होंने 2011 में 108 वर्ष की आयु में शरीर त्यागा।
🕉️ स्वामी देवमूर्ति जी — वह योगऋषि जिनकी साधना की गूंज भारत से यूरोप तक पहुँची
आज जब योग को अक्सर केवल आसन, फिटनेस और शरीर को लचीला बनाने के माध्यम के रूप में देखा जाता है, तब स्वामी देवमूर्ति जी की योग-दृष्टि हमें योग के उस गहरे आध्यात्मिक स्वरूप की याद दिलाती है जिसमें शरीर केवल साधन है और लक्ष्य है — प्राण, मन और चेतना की साधना।
स्वामी देवमूर्ति जी 20वीं शताब्दी के उन अग्रणी भारतीय योगाचार्यों में थे जिन्होंने यूरोप में भारतीय योग, ध्यान और प्राणायाम की परंपरा को पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उसी दौर के थे जिसमें B.K.S. Iyengar जैसे महान योगाचार्य भी पश्चिम में योग को स्थापित कर रहे थे; लेकिन देवमूर्ति जी की विशेषता यह थी कि उनका जोर केवल आसनों पर नहीं, बल्कि योग के आंतरिक और अनुभवात्मक पक्ष पर था।
उनकी साधना में प्राणायाम, ध्यान, श्वास की शक्ति और चेतना का विकास विशेष महत्व रखते थे। उनके द्वारा सिखाई गई परंपराओं का प्रभाव यूरोप के योग-जगत में आगे उनके शिष्यों के माध्यम से भी दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, European Yoga Union के योग-इतिहास में J. Čumpelík को स्वामी देवमूर्ति जी का शिष्य बताया गया है।
यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि देवमूर्ति जी की शिक्षाएँ केवल “योगासन” तक सीमित नहीं थीं। उनकी दृष्टि में योग एक जीवंत आध्यात्मिक अनुशासन था—श्वास से प्राण तक, प्राण से मन तक और मन से चेतना की गहराइयों तक जाने की यात्रा।
आज के समय में जब योग विश्वभर में लोकप्रिय है, ऐसे अग्रदूतों को याद करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उन्होंने उस समय भारतीय योग की गहराई को दुनिया तक पहुँचाया जब पश्चिम में योग अभी अपनी पहचान बना ही रहा था।
🙏 स्वामी देवमूर्ति जी को नमन — उन साधकों में से एक, जिन्होंने योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण की साधना के रूप में दुनिया के सामने रखा।