यद्यपि इन शब्दों में बाह्य भेद है;लेकिन वक्ताओं के मस्तिष्क में लगभग एक ही प्रकार का गाय का चित्र उपस्थित होता है।वक्ता का वैशिष्ट्य है कि उसको किस भाषा में प्रस्तुत करता है।अतः वास्तव में बहुभाषी होना एक कला और साक्षात् उत्सव है।यह हमारी कमजोरी नहीं;शक्ति है।
#भारतीय_भाषा_उत्सव
#भारतीय_भाषा_उत्सव
भाषाएं विभेद नहीं; बौद्धिक चिन्तन की पराकाष्ठा का स्वरूप हैं। वास्तव में विविध भाषाएं केवल बाह्य रूप से ही अलग-अलग है; भाषा का आन्तरिक पक्ष जिसे भारतीय ऋषियों ने परा, पश्यन्ती और मध्यमा कहा है उस स्तर पर सभी प्रकार की भाषाओं में एकरूपता है; साम्य है।
#भाषा
भेद केवल वैखरी;अर्थात् जिसे हम अपने मुख से ध्वनि रूप में प्रस्तुत करते हैं उसी में भेद प्रतीत होता है।उदाहरण के लिए जैसे 'गाय' को कहने के लिए अंग्रेजी भाषा में Cow,हिन्दी में गाय,संस्कृत में गौः,तमिल में பசு, और अन्य भाषाओं में कोई और शब्द प्रस्तुत किया जाएगा।
#भारतीय_भाषा_उत्सव
जिन तथाकथित बुद्धिजीवियों, तथाकथित राजनेताओं को #राममन्दिर की जगह विद्यालय,अस्पताल,विश्वविद्यालय चाहिए था।वे बंगाल के मुर्शिदाबाद में मजहबी स्थाननिर्माण तथा उस हेतु लाखों-करोड़ों रूपये आने पर;उस स्थान और पैसे से अस्पताल,विद्यालय इत्यादि की आवश्यकता नहीं है।
#Murshidabad#bangal
आज भारतवर्ष के अनेकानेक ऋषि-मुनियों,तपस्वियों,राजाओं,स्वतन्त्रतासंग्राम सेनानियों व करोङों बलिदानियों को याद करने का दिन है।जिनकी अप्रतिम श्रद्धा,साधना एवं बलिदान के कारण पांच हजार वर्ष पूर्वसे चली रही परम्परा को अक्षुण्ण बनाए रखने में सफल हुए।
#स्वतंत्रता_दिवस#IndependenceDay
दिल्ली पेङ विहीन होते जा रही; वोटबैंक के लिए हजारों बस्तियां बसा दी गयी!गंदगी से यमुना नदी को पाट दिया गया।इन सामान्य विषयों पर ध्यान न देकर केवल १० साल पुराने वाहनों को बैन करना;मूर्खता ही है।प्रदूषण जांच केन्द्र क्यों हैं?क्या उपयोगी और हानिकारक की पहचान भी हम नहीं कर पा रहे?
@DrSKPathak1@MediaHarshVT बिल्कुल सत्य। कुलगुरु शब्द का प्रयोग सर्वथा भिन्न है। शास्त्र एवं लोक सर्वदा अनुपूरक हैं। कुलपति शब्द शास्त्र एवं लोक दोनों जगह प्रयुक्त है।अत एव इस प्रकार के अवाञ्छित परिवर्तन के स्थान पर शिक्षा समस्याओं को दूर करने के उपायों पर अधिक प्रयास होना चाहिए।
(कुलस्य वंशस्य गोत्रस्य वा पतिः स्वामी) कुलस्वामी। गोत्रप्रधानः। कुलनाथः।
(कुलस्य छात्रवर्गस्य पतिः पालकः)
शब्दकल्पद्रुम,वाचस्पत्यम् नामक कोश-ग्रन्थों के अनुसार भी कुलपति शब्द उचित है।भागवत एवं कालिदास के ग्रन्थ में 'कुलपति'शब्द का ही प्रयोग है @JNU_official_50@MediaHarshVT
नव मङ्गल नव उत्कर्ष प्रखर,
नवसंवत्सर का प्रथम प्रहर।
प्रकृति प्रदत्त अनोखी वेला
नवोत्साह युक्त यह सबेरा।
आओ विश्व में फैलाए,
भारत की वैज्ञानिक विशेषताए।
जन जन में गुणगान करें,
भारतवर्ष महान् बने।
भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 💐
#नववर्ष#नवरात्रि#NewYear#नववर्षाभिनंदन
उसे पुनः युगानुकुल प्रवचन के माध्यम से आज समझने की आवश्यकता है। मैं से हम तक की यात्रा का यह ज्ञान प्रवाह है। विस्तार ही जीवन एवं सङ्कुचन ही मृत्यु है। यही सप्तसिन्धु संवाद है।
@CentralSanskrit@shrivarakhedi@mukulkanitkar@IKS_Media
#सप्तसिन्धु_संवादः
अन्ताराष्ट्रिय राजनीति, भूमण्डलीकरण के सम्बन्ध में प्राकृतिक सम्पदाएं ही दांव पर लगीं हैं।अन्न, भूमि, व्यापार, एक दूसरे पर प्रभुत्व और सुरक्षा ही सर्वत्र युद्ध के कारण हैं।इनसे इतर भारतवर्ष (सप्तसिन्धु संस्कृति)शान्ति का वाहक व ज्ञानक्षेत्र है।
@mukulkanitkar
विश्व को देखने की दृष्टि भारत ही देता है;जिसमें अपनत्व,सर्वकल्याण के भावना निहित है।सप्त सिन्धु का संवाद प्राचीन नहीं वर्तमान है। यह सतत चलने वाली वर्तमान प्रकिया है।आज विश्व को इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है।चिरकालीन सत्य व ऋत को जिसे ऋषियों ने अपने व्यवहार में लाकर प्रचारित किया....
ऋत, धर्म, सत्य, ज्ञान, यज्ञ, दान, व्रत इत्यादि की सनातन संस्कृति के अङ्ग है। ये सप्ताङ्ग सप्तसिन्धु क्षेत्र की देन है जो अद्यापि भारतवर्ष में व्याप्त हैं। संस्कृत , दविङ, मागधी इत्यादि सप्त भाषा संस्कृतियां भी इसी का प्रवाह हैं - @shrivarakhedi@mukulkanitkar
#सप्तसिन्धु_संवादः
सप्त सिन्धु क्षेत्र के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में व्यास (विपाशा)नदी के तट पर यह महत्त्वपूर्ण संवाद आयोजित हो रहा है;यह क्षेत्र केवल नदी प्रवाहमान संस्कृति नहीं है अपितु ज्ञान की प्रवाहता को यह धारण की हुई है।
@shrivarakhedi@CentralSanskrit#कश्मीर