सुनो ! इस बार,
तुम्हारे शहर से लौटना
भी अजीब रहा
रास्ते भर
तुमसे दूर जा रहा था,
लेकिन सच था कि तुम्हारी यादों के
और करीब आ रहा था ।
वैसे, तुम्हें अलविदा
कह तो दिया था,
मगर कुछ रिश्तों से, अपनों से
विदा लेना इतना भी आसान नही
होता ।
#सफर
आज शाम में आसमान के रंग इतने गहरे थे कि कुछ देर के लिए शहर की सारी बेरंग चीजें भी उनमें शामिल थी ।
शीशों पर ठहरी हुई शाम की रोशनी, पेड़ों पर उतरता धुँधलका और ऊपर आसमान में बिखरा हुआ नारंगी रंग..किसी काम के बीच अचानक सिर उठाने पर सामने का आसमान आपको कुछ क्षणों के लिए बाकी सब भूलने पर मजबूर कर देता है।
#शाम
वो जहां हैं वहां आबाद रहें, इतना काफी है,
हमारे पहले जैसे हालात हो, जरूरी तो नहीं।
उसे बस ख्यालों में रहने दिया है बड़ी मुद्दत से,
हर एक शख्स से मुलाकात हो, जरूरी तो नहीं।
कभी तो कुछ मन का हो,
जैसा सोचूं वैसा हो।
आंख खुले तो धूप मिले,
दिन थोड़ा सा अच्छा हो ।
कोई भूला मीत मिले,
मन फिर से थोड़ा बच्चा हो
जिंदगी अपनी चाल चले
बस रास्ता मेरा अपना हो ।
#मन