The Election Commission of India is under fire like never before.
The SIR has struck 13 crore names off draft rolls, putting the EC at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
HOWEVER, what nobody knew: through that same period, some of the sharpest questions were being asked from inside.
Out today, after months of work. Our #ExpressInvestigation 🧵
(1/10)
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।
ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।
यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
मोदी जी, जन्मदिन का एक और तोहफ़ा मेरी तरफ से,
ये बूढ़ी अम्मा का आज शाम का विडियो 👇
इसे देखने के बाद थोड़ी सी भी शर्म बची हो तो आज जो 100 करोड़ रुपए के दिए जलाए गये उनके बचे हुए तेल में डूब मरना।
Kancha Ilaih ने किताब लिखी "Why I am not a Hindu"
इंग्लिश में किताब जब तक बिक रही थी किसी को कोई दिक्कत नही थी. इस किताब का जब हिन्दी मे अनुवाद हुआ,
और ये किताब उत्तर भारत में पढ़ी जाने लगी गयी तो इसे Amazon और फ्लिपकार्ट से गायब कर दिया गया.
Why I am not a Hindu के जवाब में शशि थरूर ने किताब लिखी Why I am a Hindu. इस किताब का जब हिन्दी में अनुवाद हुआ तब Amazon या फ्लिपकार्ट से नही हटाया गया.
Why I am a Hindu बाद में कन्नड़ तमिल मलयालम और अब नेपाली भाषा में अनुवाद हुआ है.
Mama,
I last saw you and Papa together more than 35 years ago. Since the day Papa left, I have watched you face everything life threw at you with never-ending courage and dignity. Only Priyanka and I really know what you have been through, and how difficult your life after Papa truly was.
I am happy, and so proud, that your story - “Belonging: A Journey of Love” - will finally be read by the millions of people who love you. I know how hard it was for someone as private as you to tell the world your beautiful story.
Today, on his birthday, I can see Papa smiling and looking down proudly at his beautiful Sonia.
Love,
Rahul
जवळ जवळ 200 वर्षांची नागपंचमी ला नागांची मिरवणूक असलेली परंपरा बत्तीस शिराळ्या गावातल्या जुन्या पिढीने पाहीली आहे .
आता ही बघा निळ्या पेहरावतली नागीण कशी सळसळतेय आणी इतर नागोबांना पण डोलवतेय तिच्या तालावर ??
मी तुम्हाला एक सत्य सांगतोय की जितकी विटंबना मुगल शासकांनी हिंदू देवळे आणि धर्माची केली त्या पेक्षा 50 पटीने
हिंदुलोक आता हिंदू धर्माची करत आहे .
#कमनीयबांध्याचीनागीन
Alexander को पूरी दुनिया ढोल बजाकर विश्व विजेता कहती है.
जबकि उसने केवल केवल मकदूनिया से दक्षिण सेंट्रल एशिया समेत भारत के पंजाब को जीता था.
क्यों कि आज से 2300 साल पहले पूरी दुनिया की अवधारणा एशिया में सिकुड़ी हुई थी. एशिया का इलाका समृद्ध था. जर्मनी फ्रांस स्पेन और इंग्लैंड के लोग कबीलाई जीवन जी रहे थे. यहां लूटने को कुछ नही था.
अमेरिका तब विश्व के नक्शे से गायब था. तथागत Buddha का जन्म Alexander से पहला हुआ,
अगर एशिया को तलवार के नोक पर जीतने वाला Alexander विश्व विजेता है तो पूरे एशिया में धम्म विजय करने वाले Buddha विश्व विजेता क्यों नही हैं ?
भारत की जनसंख्या 1772 में अखंड भारत की जनसंख्या 18-20 करोड़ थी. इसी साल ब्रिटिश हुकूमत ने बंगाल में जिले बनाए और हर जिले में भूमि राजस्व वसूलने के लिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया.
यही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के शासन व्यवस्था की नींव बने.
1855 में भारत की प्रथम आदिवासी क्रांति के समय कुल 1,50,000 के करीब ब्रिटिश भारत में थे. इनमें 45,000 यूरोपीय सैनिक थे.
इतने बड़े भारत को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा जिलों को बनाना शुरू किया, 230 के आसपास जिलों को बनाया. हर जिले में एक ब्रिटिश मूल का कलेक्टर बनाया जाता.
ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में बनाई हर संस्था और संगठन का मुखिया किसी न किसी अंग्रेज को बनाते. 1931 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में 1,10,000 भारतीय सिपाही थे. लेकिन बड़े अधिकारी अंग्रेज होते थे.
1947 के बाद अंग्रेजों का स्थान सवर्ण जातियों ने ले लिया है. उनकी आबादी अंग्रेजों की तरह है लेकिन बड़े पदों पर विराजमान होकर बहुसंख्यक बहुजन समाज पर वर्चस्व बनाए हुए हैं.
नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए लगातार छात्रों के मुद्दों को उठा रहे हैं।
इसी कड़ी में कोटा और देहरादून के बाद प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' का आयोजन होने वाला है, लेकिन BJP सरकार इसे रद्द करवाने की भरसक कोशिश कर रही है।
ग्राउंंड मैनेजमेंट का कहना है कि प्रशासन उन्हें डरा-धमकाकर, परमिशन कैंसिल करने का दबाव बना रहा है।
इस संवाद कार्यक्रम के लिए लाखों छात्र रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। पूरे देश के छात्र इसका इंतजार कर रहे हैं। इसलिए हम साफ कर दें कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम वहीं पर होगा।
: उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी @AdvRajendraPal जी
📍 दिल्ली