Oh really? Teesta Setalvad was about to be arrested. She ran to the Supreme Court. A two judge bench heard her the same day. Verdict was split. News reached Chief Justice. He stepped out of a dance concert and ordered a three judge bench. Bench sat at 10 pm and stayed her arrest.
ज्ञानेश कुमार: जब वे कांग्रेस की पसंद थे… तब कोई खतरा नहीं था।
एक समय था जब कांग्रेस की नजर में ज्ञानेश कुमार सबसे भरोसेमंद और सक्षम अधिकारियों में से एक थे।
केरल कैडर के IAS अधिकारी।
एर्नाकुलम के कलेक्टर।
दिल्ली में केरल के रेजिडेंट कमिश्नर।
उस समय किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। कोई घबराहट नहीं थी।
2007 से 2012 तक…
उन्होंने UPA सरकार में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के संयुक्त सचिव के रूप में काम किया।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। तब भी कोई खतरे की घंटी नहीं बजी।
इसके बाद वे गृह मंत्रालय गए… और तब भी सब शांत रहा।
लेकिन जैसे ही वे चुनाव आयोग पहुंचे…
अचानक वही अधिकारी “लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा” बन गए!
जिस अधिकारी का करियर एंटनी के कार्यालय में रहते हुए शानदार माना जाता था, वही अचानक संदिग्ध हो गया।
आखिर ऐसा क्या बदल गया?
व्यक्ति नहीं बदला।
सिर्फ सत्ता से कांग्रेस की दूरी बदल गई।
कांग्रेस की नजर में ईमानदारी कमाई नहीं जाती… वह जारी की जाती है।
और जैसे ही चुनाव हारते हैं, उसकी वैधता की तारीख खत्म हो जाती है।
यही कांग्रेस का असली चेहरा है!
अगर आपको भी यह दोहरा मापदंड परेशान करता है…
तो इस पोस्ट को रिपोस्ट करें और इसे आगे पहुंचाएं।
आपको Low IQ और Woke लोगो की पहचान बताता हूँ-
वो जनरल बात करेंगे जैसे - पूरा सिस्टम ही खराब है, इस देश का कुछ नहीं हो सकता, पूरी सरकार करप्ट है आदि आदि।
लेकिन जो बड़े विज़न के साथ काम करते है वो स्पेसिफिक मुद्दे पर बात करके उसका समाधान खोजते है, सब कमियों में भी Positivity ढूँढते है, वो लोकतंत्र में “Best among worst” चुनकर भविष्य का निर्माण करते है।
आज की बढ़िया वीडियो आई है- भाई ने “Aunty National” को respectful तरीके से धो डाला 👏👏
Must watch वीडियो है 👇
The first image shows Supreme Court judge Abdul Nazeer, who dissented and declined to strike down instant triple talaq as unconstitutional.
The second shows former Vice President Hamid Ansari, whom ex-R&AW officer N.K. Sood has accused of compromising Indian intelligence officers in Iran.
The third shows former Chief Election Commissioner S.Y. Quraishi, during whose term the largest number of illegal Bangladeshi Muslim names entered voter lists in Jharkhand and Bengal.
Whether they are educated or illiterate,
when it comes to religion, they are all the same…
For them, religion matters more than the nation.
यह तस्वीर सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि सत्ता के चरित्र पर एक बड़ा सवाल है।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एयरपोर्ट पर फ्लाईदुबई के यात्रियों से मिलने पहुँचे।
न कोई अनावश्यक दिखावा, न दूरी का प्रदर्शन।
लोगों से हाथ मिलाया, हाय-फाइव किया, सहजता से बातचीत की और फिर एक यात्री के साथ वहीं जमीन पर बैठकर बतियाने लगे।
लोग पास आए तो वहीं समूह-चित्र भी हो गया।
नेतन्याहू का यह सहज व्यवहार सचमुच प्रशंसनीय है।
सत्ता के शिखर पर बैठकर भी आम नागरिक के बीच इतनी सहजता और आत्मीयता, नेतृत्व की एक अलग ही तस्वीर प्रस्तुत करती है। 🇮🇱👏
बात VIP संस्कृति की नहीं है।
सुरक्षा और प्रोटोकॉल हर देश की अपनी आवश्यकता हैं।
सवाल कहीं अधिक गहरा है...
क्या पद बड़ा होने के साथ इंसान और जनता के बीच दूरी भी बढ़नी चाहिए?
हमारे यहाँ कई बार किसी बलिदानी सैनिक को श्रद्धांजलि देने पहुँचे मंत्री या मुख्यमंत्री के लिए पहले महँगे सोफे, विशेष व्यवस्था और औपचारिकताओं की पूरी कतार खड़ी कर दी जाती है।
श्रद्धांजलि देने वाला जनप्रतिनिधि मंच पर,
और जिसके बलिदान को नमन करने आया है, उसके परिवार के लिए दूसरी कतार...
फिर स्वयं को ‘जननायक’ कहलवाने का प्रदर्शन!
नेतृत्व का अर्थ केवल बड़े काफिले, सुरक्षा घेरे और प्रोटोकॉल नहीं है।
कभी-कभी जमीन पर बैठकर किसी नागरिक की बात सुन लेना ही बता देता है कि सत्ता के भीतर ‘जन’ अभी कितना जीवित है।
नेतन्याहू का यह छोटा-सा व्यवहार इसलिए बड़ा दिखाई देता है। 🇮🇱
योगेंद्र यादव जी, आप चैनलों पर बैठकर रोज़ सबको संविधान समझाते हैं—आपको तो ये पता ही होगा:
Can the Government simply sack the CEC? — NO
Can the President simply sack the CEC? — NO
Can the Supreme Court simply order the CEC removed? — NO
CEC को हटाने का संवैधानिक रास्ता वही है जो Supreme Court Judge के लिए है—Parliament में special-majority removal process, फिर President का order.
तो जो काम संविधान ने Parliament को दिया है, उसे आप “भीड़-तंत्र” से कैसे करवाना चाह रहे हैं?
संविधान पर इतना ज्ञान देते हैं—Article 324(5) भी एक बार पढ़ लीजिए।
@_YogendraYadav
@Thakur312Manish एक कहावत ऐसे नहीं कही गई है कि जब तक मूर्ख रहेंगे बुद्धिमान भूखे नहीं रहेंगे। ऐसे ही मूर्ख लोग के कारण ऐसे वकील मालामाल रहते है, साथ में राज्यसभा की सीट फ्री।
गाड़ी की रूफ में चढ़के किसी जिले के CO से तू तड़ाक करने जाते नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण जी
अगर किसी ने मोटर वाहन अधिनियम की बात की तो इतनी धाराओं में मुक़दमा दर्ज होगा कि जीवन कचहरी में ही बीतेगा।
अभी तक हमें FLYDUBAI के आतंकवादी सह-पायलट (को-पायलट) का नाम और पहचान नहीं पता है।
विमान को क्रैश करना। इज़राइलियों को मारना। बिना किसी सबूत के इसका दोष भारतीय पायलट पर मढ़ना। मुझे लगता है कि यही योजना थी।
हम महसूस कर सकते थे कि ग्लिस्को (GLISCO) द्वारा घुसपैठ की गई पूरी मीडिया और भारत-विरोधी सोशल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र तैयार और मुस्तैद था।
एक बार जब विमान बच गया, तो इन कायरों के लिए दुर्भाग्य से, जिस तरह से उन्होंने हमलावर का नाम और बचाने वाले की राष्ट्रीयता छिपाकर खबर को कवर किया, उससे सब साफ हो जाता है।
कैप्टन स्मित ने सबसे महत्वपूर्ण और बहादुरी भरा काम यह किया कि उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। वरना, हम जानते हैं कि अगर दरवाजा बंद रहने के दौरान कोई भयानक घटना घट जाती, तो क्या दुष्प्रचार होता।
दुर्घटना किसी गैर-इज़राइली क्षेत्र में होती, और यहाँ तक कि ब्लैक बॉक्स के साथ भी छेड़छाड़ की जाती या उसे किसी पाकिस्तान द्वारा संचालित यूके/यूएस लैब में भेजा जाता ताकि भारत-विरोधी प्रोपेगैंडा खड़ा करने के लिए इसे "भारतीय कैप्टन की हरकतें संदिग्ध हैं" में बदला जा सके।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पायलटों, डॉक्टरों, नाविकों, इंजीनियरों आदि पर लगातार हमले हो रहे हैं। यह भारतीय प्रवासियों वाले देशों में उन्हें बाहर निकालने के लिए चुनिंदा रूप से भड़काए जा रहे भारत-विरोधी नस्लवाद के अलावा है।
ताकि कुछ अन्य लोग, जिनका गृह देश आर्थिक रूप से पिछड़ रहा है, वे अवसर प्राप्त कर सकें जबकि भारत की एनआरआई-आधारित अर्थव्यवस्था प्रभावित हो। यदि आप इस पैटर्न को ध्यान से देखें, तो दुनिया भर में यही योजना चल रही है।
आइए इस सह-पायलट के इरादों और संबंधों का खुलासा होने का इंतज़ार करें। यह कहने में कोई हैरानी नहीं होगी कि उसका रूममेट, पड़ोसी, दोस्त या इन्फ्लुएंसर 'आतंकिस्तान' से होगा।
अब तक भारत के किसी हिंदू विरोधी इको सिस्टम, लेफ्टीस्ट मीडिया चैनल और युटयुबर्स ने इस घटना की निंदा नहीं की है।
आपको नहीं लगता के एक इलेक्शन कमिश्नर नवीन चावला चुनाव को प्रभावित कर सकता है -जबकि ख़ुद Chief Election Commissioner गोपालस्वामी ने उनकी शिकायत राष्ट्रपति से की
सिंघवी जी का जवाब - बिल्कुल नहीं
कैसे बचाव किया जा रहा है 👇
राजस्थान में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव करवाने के लिए मतदाता सूचियों में उजागर लाखों की तादाद में फर्जी वोटरों को चिन्हित करना और उनके नाम लिस्ट से बाहर करना जरूरी है। चुनाव आयोग को ये भी देखना चाहिए कि इतने फ़र्जी वोटर सूचियों में कैसे जुड़ गए?
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@DCEastSinghbhum सर, शहर में सड़कों की स्थिति बहुत ही खराब हो रही है। अब तो बरसात भी समाप्त प्राय है। कृपया संज्ञान ले कर इनकी मरम्मत कराने का कृपा करे।
Yesterday I saw a meme on Instagram: “What if SC-ST thieves enter my home and we catch them, can they slap the SC-ST Act?” Damn, this Haryana news is the same. A family caught a thief in their home; the thief even confessed, saying his two companions ran away leaving him there alone. After three days the thief filed a case against the owners under the SC-ST Act after a Congress leader encouraged him to do so.