Associate Professor. Special invitee National Executive Council, ABVP. Member Board of managment, Dr. RPCAU PUSA. Member, Board of Governor, NIT Patna.
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद समर्थित मैथिली मृणालिनी को अध्यक्ष पद जीत की हार्दिक बधाई। विद्यार्थी परिषद की वर्तमान पीढ़ी को हम सभी की वर्षों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए बधाई तथा आभार
"मोदी का दूसरा प्रहार आ रहा है,
धारा 30 समाप्त हो सकती है!"
मोदी ने हिंदुओं के साथ नेहरू द्वारा किए गए विश्वासघात को सुधारने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
क्या आपने "धारा 30" के बारे में सुना है?
क्या आप जानते हैं कि धारा 30 का मतलब क्या है?
'धारा 30' एक हिंदू-विरोधी कानून है, जिसे नेहरू ने अन्यायपूर्ण तरीके से संविधान में शामिल किया था!
जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने का प्रयास किया, तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा था,
"यह कानून हिंदुओं के साथ विश्वासघात है; अगर यह कानून संविधान में लाया गया तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा!"
आखिरकार, नेहरू को सरदार पटेल के प्रतिरोध के सामने झुकना पड़ा।
लेकिन दुर्भाग्यवश, इस घटना के कुछ समय बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल का अचानक निधन हो गया...!!
पटेल की मृत्यु के बाद नेहरू ने तुरंत इस कानून को संविधान में शामिल कर दिया! 😡
अब जानिए धारा 30 की विशेषताएँ...
इस कानून के अनुसार, हिंदू अपने 'सनातन धर्म' की शिक्षा स्कूलों और कॉलेजों में न तो दे सकते हैं और न ही ले सकते हैं!
क्या यह अजीब नहीं लगता?
"धारा 30" के तहत, मुसलमान और ईसाई अपने धर्म की शिक्षा देने के लिए इस्लामिक (मदरसा) और ईसाई (कॉन्वेंट) स्कूल चला सकते हैं, लेकिन हिंदू अपने गुरुकुल या वैदिक शिक्षा पर आधारित पारंपरिक स्कूल नहीं चला सकते, जो देश के मुख्य धर्म सनातन या हिंदू धर्म और संस्कृति को संरक्षित कर सके। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें इस कानून के तहत दंडित किया जाएगा!
साथ ही, मस्जिदों और चर्चों में दान से जमा सारा पैसा और सोना केवल उन्हीं का होता है। वे उस संपत्ति का उपयोग अपने अनुयायियों को बढ़ावा देने और अशिक्षित या कम शिक्षित हिंदुओं को धन के लालच में धर्मांतरण के लिए करते हैं। लेकिन हिंदू मंदिरों में जमा धन और सोने पर सरकार का नियंत्रण होता है!
नेहरू ने यह सब उस कुटिल गांधी के साथ मिलकर किया ताकि मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदुओं के धर्मांतरण में सुविधा हो सके।
"धारा 30" हिंदुओं के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया विश्वासघात है!
मुस्लिम बच्चों के लिए अपनी धार्मिक पुस्तक, कुरान पढ़ना और सीखना अनिवार्य है, और यही नियम ईसाइयों पर लागू होता है! लेकिन हमारे हिंदुओं के बारे में क्या? हमें अपने एकमात्र धर्म, जो इस प्राचीन विज्ञान पर आधारित है, की सही समझ भी नहीं है!
आइए, हम सभी सनातन धर्म की रक्षा करें। इस लेख को पढ़ें, समझें और नेहरू और कुटिल गांधी द्वारा किए गए इस अन्याय के बारे में हर जगह जागरूकता फैलाएँ।
क्योंकि धारा 30 के कारण, हम अपने स्कूलों और कॉलेजों में भगवद गीता नहीं पढ़ा सकते हैं, जबकि यह हमारा सनातन धर्म देश है।
🙏 धन्यवाद 🙏
संविधान सभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर गहन चर्चा की।
इसके बाद निर्णय किया कि जो भी सरकार चुनकर आए वो निर्णय करे और देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करें।
धार्मिक आधार पर बने पर्सनल लॉ को खत्म करने की बाबा साहेब ने जोरदार वकालत की थी।
: नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री
बांग्लादेश हिंसा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ :
◆ बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार तत्काल बंद हों।
◆ श्री चिन्मय कृष्ण दास जी को अन्यायपूर्ण कारावास से मुक्त करें।
◆ बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों, हत्या, लूट, आगजनी और महिलाओं पर अमानवीय अत्याचार चिंताजनक हैं।
◆ यह अत्याचार इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हो रहे हैं और वर्तमान बांग्लादेश सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
: दत्तात्रेय होसबाले, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
Heartiest congratulations my friend @realDonaldTrump on your historic election victory. As you build on the successes of your previous term, I look forward to renewing our collaboration to further strengthen the India-US Comprehensive Global and Strategic Partnership. Together, let’s work for the betterment of our people and to promote global peace, stability and prosperity.
Delhi: The Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) has officially announced its candidates for the Delhi University Students Union (DUSU) Election 2024 in the presence of Yagywalkya Shukla, National General Secretary of ABVP.
अगर आप मेरे देश की राजनीति पर टिप्पणी करेंगे
तो मैं भी आपके देश की राजनीति पर टिप्पणी करूँगा, आप भी उस टिप्पणी के लिए तैयार रहिए।
जब आप दूसरों पर बोलते हैं तो आपको खुद के बारे में सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
भारत में 6 दशकों में पहली बार कोई सरकार लगातार तीसरी बार वापस आयी है, ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
: एस जयशंकर, जेनेवा में
CJI चंद्रचूड़ के घर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
गणपति पूजा में शामिल होकर की बप्पा की आरती।
CJI चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी ने हाथ जोड़कर किया PM मोदी का स्वागत।
विद्यार्थी विकास परिषद, पटना महानगर द्वारा प्रा. रविंद्र केसरी शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन अनुग्रह नारायण महाविद्यालय, पटना परिसर में किया गया। जिसमें केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय जी, महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अभाविप पटना महानगर के कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण को अंग वस्त्र एवं विद्यार्थी परिषद की #ध्येय_यात्रा पुस्तक देकर सम्मानित किया।
@nityanandraibjp
केवल जय फलीस्तीन बोलने से क्या होगा !
ओवैसी कितनी बार फलीस्तीन गए !
ओवैसी कितनी बार गाज़ा और राफाह गए !
ओवैसी ने खुद फलीस्तीन के लोगों की कितनी मदद करी !
जय फलीस्तीन बोलने से गाज़ा के लोगों को रोटी नहीं मिलेगी।
जय फलीस्तीन बोलकर मुसलमानों की सहानुभूति लेना बंद करें।
ढोंग कर के मुसलमानों को गुमराह करना बंद करें ओवैसी।
: हितेश शंकर, संपादक, पाञ्चजन्य
नरपिशाच...और नालन्दा विश्वविद्यालय
तुर्की का सैन्य कमांडर बख्तियार खिलजी गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। सारे हकीम हार गए परंतु बीमारी का पता नहीं चल पाया। खिलजी दिनों दिन कमजोर पड़ता गया और उसने बिस्तर पकड़ लिया। उसे लगा कि अब उसके आखिरी दिन आ गए हैं।
एक दिन उससे मिलने आए एक बुज़ुर्ग ने सलाह दी कि दूर भारत के मगध साम्राज्य में अवस्थित नालंदा महाविद्यालय के एक ज्ञानी शीलभद्र को एक बार दिखा लें, वे आपको ठीक कर देंगे। खिलजी तैयार नहीं हुआ। उसने कहा कि मैं किसी काफ़िर के हाथ की दवा नहीं ले सकता हूँ, चाहे मर क्यों न जाऊं!!
मगर बीबी बच्चों की जिद के आगे झुक गया शीलभद्र जी तुर्की आए। खिलजी ने उनसे कहा कि दूर से ही देखो मुझे छूना मत क्योंकि तुम काफिर हो और दवा मैं लूंगा नहीं। शीलभद्र जी ने उसका चेहरा देखा, शरीर का मुआयना किया, बलगम से भरे बर्तन को देखा, सांसों के उतार चढ़ाव का अध्ययन किया और बाहर चले गए।
फिर लौटे और पूछा कि कुरान पढ़ते हैं?
खिलजी ने कहा दिन रात पढ़ते हैं!
पन्ने कैसे पलटते हैं?
उंगलियों से जीभ को छूकर सफे पलटते हैं!!
शीलभद्र जी ने खिलजी को एक कुरान भेंट किया और कहा कि आज से आप इसे पढ़ें और शीलभद्र जी वापस भारत लौट आए।
उधर दूसरे दिन से ही खिलजी की तबीयत ठीक होने लगी और एक हफ्ते में वह भला चंगा हो गया। दरअसल शीलभद्र जी ने कुरान के पन्नों पर दवा लगा दी थी जिसे उंगलियों से जीभ तक पढ़ने के दौरान पहुंचाने का अनोखा तरीका अपनाया गया था।
खिलजी अचंभित था मगर उससे भी ज्यादा ईर्ष्या और जलन से मरा जा रहा था कि आखिर एक काफिर ईमानवालों से ज्यादा काबिल कैसे हो गया?
अगले ही साल 1192 में मोहम्मद गोरी उसने सेना तैयार की और जा पहुंचा नालंदा महाविद्यालय मगध क्षेत्र। पूरी दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञान और विज्ञान का केंद्र। जहां 10000 छात्र और 1000 शिक्षक एक बड़े परिसर में रहते थे। जहां एक तीन मंजिला इमारत में विशालकाय पुस्तकालय था, जिसमें एक करोड़ पुस्तकें, पांडुलिपियां एवं ग्रंथ थे।
खिलजी जब वहां पहूँचा तो शिक्षक और छात्र उसके स्वागत में बाहर आए, क्योंकि उन्हें लगा कि वह कृतज्ञता व्यक्त करने आया है।
खिलजी ने उन्हें देखा और मुस्कुराया और तलवार से भिक्षु श्रेष्ठ की गर्दन काट दी (क्योंकि वह पूरी तैयारी के साथ आया था)। फिर हजारों छात्र और शिक्षक गाजर मूली की तरह काट डाले गए (क्योंकि कि वह सब अचानक हुए हमले से अनभिज्ञ थे)। खिलजी ने फिर ज्ञान विज्ञान के केंद्र पुस्तकालय में आग लगा दी। कहा जाता है कि पूरे तीन महीने तक पुस्तकें जलती रहीं।
खिलजी चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था कि तुम काफिरों की हिम्मत कैसे हुई इतनी पुस्तकें पांडुलिपियां इकट्ठा करने की? बस एक दीन रहेगा धरती पर बाकी सब को नष्ट कर दूंगा।
पूरे नालंदा को तहस नहस कर जब वह लौटा तो रास्ते में विक्रम शिला विश्वविद्यालय को भी जलाते हुए लौटा। मगध क्षेत्र के बाहर बंगाल में वह रूक गया और वहां खिलजी साम्राज्य की स्थापना की।
जब वह लद्दाख क्षेत्र होते हुए तिब्बत पर आक्रमण करने की योजना बना रहा था तभी एक रात उसके एक कमांडर ने उसकी निद्रा में हत्या कर दी। आज भी बंगाल के पश्चिमी दिनाजपुर में उसकी कब्र है जहां उसे दफनाया गया था।
और सबसे हैरत की बात है कि उसी दुर्दांत हत्यारे के नाम पर बिहार में बख्तियारपुर नामक जगह है जहां रेलवे जंक्शन भी है जहां से नालंदा की ट्रेन जाती है।
यह थी एक भारतीय बौद्ध भिक्षु शीलभद्र की शीलता, जिन्होंने तुर्की तक जाकर तथा दुत्कारे जाने के पश्चात भी एक शत्रु की प्राण रक्षा अपने चिकित्सकीय ज्ञान व बुद्धि कौशल से की।
बदले में क्या मिला?
शांतिप्रिय समुदाय की एहसान फरामोशी, प्राण, समाज व संस्कृति पर घात!
दुर्भाग्यवश तबसे अब तक कुछ नहीं बदला। हम आज भी उस क्रूर विदेशी आक्रांता के नाम पर बसाये गये शहर का नाम तक नहीं बदल सके।
क्योंकि देश में सुशासन और तृप्तिकरण का राज है!!
"राष्ट्रहित सर्वोपरि"
जय श्री राम 🙏
हर हर महादेव 🔱
दैनिक जागरण में प्रकाशित यह समाचार पूर्णतः निराधार है। पूजनीय सरसंघचालक जी ने गोरखपुर में कोई सार्वजनिक वक्तव्य नहीं दिया है। वे वर्तमान में संघ के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु देशव्यापी प्रवास पर हैं।
https://t.co/SHsJwdAcEt