@sapnajoshi122 इश्क़ की खुशबू फैली है सारी कायनात में
आखिर इज़हार-ए-इश्क़ की ज़रूरत क्या है
सुलगते रहते हैं अरमान तन्हा सारी रात भर
चराग़ों को जलाने की आखिर जरूरत क्या है
भीगी पलकें ही बयां कर देती हैं जब पूरी दास्तां को
आखिर स्याही, दवात और कलम की ज़रूरत क्या है
@sapnajoshi122@niranjanmisra81 बेवजह इन तस्वीरों को बनाना छोड़, तू जीना सीख
भूल जा नासमझों की सभी नसीहतें, तू पीना सीख
बड़ी बेरहम है ये दुनिया, हरदम कुरेदती रहेगी ज़ख्मों को तेरे
अश्क़ों के धागों से अपने तमाम ज़ख्मों को, तू सीना सीख
@sapnajoshi122 मोहब्बत में दर्द सहने की अब हमें कुछ आदत सी हो गई है
रोज़ उनका इंतज़ार करने की मजबूरी इबादत सी हो गई है
करते हैं शिकायत तो ये उनकी नज़रों में हिमाकत हो गई है
कभी लगती थी सौगात-ए-मोहब्बत आज मगर आफ़त हो गई है
@sapnajoshi122 उनके दिल में बस जाने की हमारी चाहत हरगिज़ पूरी न हो सकी
मोहब्बत में हमारा भी नाम होता मगर हमसे कभी जी हुजूरी न हो सकी
लाख मजबूरियाँ थीं उनकी जो हमारी मोहब्बत को यूँ बेवजह ठुकरा दिया
हमारी बदनसीबी देखिए हमारी कभी भी ऐसी कोई मजबूरी न हो सकी
@sapnajoshi122 हाथ छोड़ भी दें मगर ख़यालो से हरगिज़ निकाल न पाएंगे।
तुम ख़ुद को ग़ैर न समझो वरना मेरे जज़्बात बुरा मान जाएंगे।।
मेरी बेइंतहा मोहब्बत को कैसे छिपा पाओगी इस दुनिया से तुम।
ज़रा भी नजरें चुराओगी मुझसे तो यक़ीनन सब लोग जान जाएंगे।।
@sapnajoshi122 हमें किसी से मोहब्बत क्या हुई, ये जिंदगी बेहाल हो गई
लगती नहीं नज़र भी हमें, इस बीमारी के लग जाने के बाद
सारी दुनिया को ख़बर थी, महज़ इक उसी को इल्म न था
अफ़सोस राज़ जाना ये उसने, मेरे ख़ाक हो जाने के बाद
@Haresh12345678S@sapnajoshi122 जितना भी आगे (दूर) निकल जाए कोई
चला था कहाँ से, ये हरगिज़ भुलाता नहीं है
मिट भी जाएँ ज़मीं से, ग़र निशाँ क़दमों के उसके
यादें गुज़रे लम्हों की वो हरगिज़ भुलाता नहीं है
@sapnajoshi122 लाख कोशिश कर ले, तू मेरे जज़्बात हरगिज़ समझ न पाएगी
मेरी ज़िंदगी की पेचीदा पहेली तुझसे हरगिज़ सुलझ न पाएगी
जो इन आँखों को दिखता है, वही सच हो ये ज़रूरी तो नहीं
बेवफ़ाई के तूफ़ानों से ये शमा हरगिज़ बुझ न पाएगी