@TripathiMandal पहलगाम नरसंहार – सोचने की बात है!
10-20 मिनट तक गोलियां चलती रहीं, लेकिन न कोई घोड़ेवाला, न दुकानदार, न शाल या ड्राई फ्रूट बेचने वाला — किसी ने वीडियो नहीं बनाया।
क्यों?
क्या चुप रहकर उन्होंने आतंकियों का साथ नहीं दिया?
सोचिए — ये खामोशी क्या कहती है?
@TripathiMandal पहलगाम नरसंहार – सोचने की बात है!
10-20 मिनट तक गोलियां चलती रहीं, लेकिन न कोई घोड़ेवाला, न दुकानदार, न शाल या ड्राई फ्रूट बेचने वाला — किसी ने वीडियो नहीं बनाया।
क्यों?
क्या चुप रहकर उन्होंने आतंकियों का साथ नहीं दिया?
सोचिए — ये खामोशी क्या कहती है?