सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 4 पेज 99 में 11 पुरुषों तक स्त्री को और 11 स्त्रियों तक पुरुष को पशु तुल्य कर्म नियोग (दुष्कर्म) करने को कहा है। बलात्कारी मासूम शर्मा बता, आर्य समाज और दयानंद सरस्वती की इस करतूत पर तेरी जुबान पर ताला क्यों लगा है?
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Balat
दुष्कर्मी मासूम शर्मा जैसे बदमाश, जिससे बहन, बेटियाँ, महिलायें ही सुरक्षित नहीं है। वह पाखंड का क्या नाश करेगा बल्कि यह तो बहन, बेटियों को अपनी हवस का शिकार ही बना सकता है।
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Balatkari Bhand Masoom Sharma
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 4 पेज 100 में लिखा है कि यदि पति कमाने के लिए बाहर गया हो तो स्त्री 3 वर्ष इंतजार करे फिर उसके बाद किसी और पुरुष के साथ नियोग करके संतान उत्पत्ति कर ले और वह संतान उसी पति की मानी जाएगी। बलात्कारी मासूम शर्मा, तेरे मुख में दही जम गया क्या, दम है तो दिखा
विधवा महिलाओं के विषय में सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 4 पेज 101 में लिखा है कि यदि पत्नी गर्भवती हो और पुरुष से ना रहा जाए तो वह विधवा से नियोग कर उसके लिए पुत्र उत्पन्न कर दे। दुष्कर्मी मासूम शर्मा जवाब दे, आर्य समाज की इस विवादित सोच पर तुझे सांप सूंघ गया
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11 पेज 289 के अनुसार आर्य समाज का कहना है कि श्रीराम, श्रीकृष्ण, विष्णु, शिव आदि की मूर्ति मंदिर में रखकर और उनके नाम पर भीख मांगकर पुजारी देवी-देवताओं को भिखारी बनाते हैं। बलात्कारी मासूम शर्मा जवाब दे, देवी-देवताओं के अपमान पर तेरी कलम और आवाज़ खामोश
रिपोर्टर : अच्छा, संत रामपाल जी महाराज इतना कुछ कर रहे हैं। लोग ये बोल रहे हैं कि ये पैसा कहाँ से आ रहा है? कोई और बिज़नेस चलता है, विदेश से फंडिंग हो रही है?
संत रामपाल जी महाराज: देखो ऐसा होता ना, सरकार बड़ी तेज होती है। इतने दिन पहले सीआईडी छोड़ के सारी जांच करा
ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा उनके अवतारों का सम्मान करते हैं संत रामपाल जी महाराज
दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में पवित्र हिन्दू धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा उनके अवतारों का घोर अपमान किया। शिव जी को हिजड़ा, विष्णु उपासकों को चोरमंडली, श्रीकृष्ण को भगन्
संत रामपाल जी महाराज देते हैं शास्त्र अनुकूल ज्ञान
दयानंद सरस्वती अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में कहता है कि स्तुति, प्रार्थना, उपासना करनी चाहिए लेकिन इससे परमात्मा पाप नाश नहीं कर सकता। जब पाप अर्थात दुख समाप्त होने ही नहीं है। तो फिर आर्य समाजियों कोई व्यक्ति उपासना क्यों
दयानंद सरस्वती माता पिता की सेवा करने के भी पक्ष में नहीं थे।
संत रामपाल जी महाराज जी ने अपने शिष्यों को ये सिखाया है कि माता पिता की सेवा परम् कर्तव्य है।
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दयानंद को नहीं था भगवान का ज्ञान
दयानंद सरस्वती अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में लिखते हैं कि परमात्मा निराकार है। कहीं लिखते है कि स्तुति से परमात्मा का साक्षात्कार होता है। इससे पता चलता है यह अज्ञानी व्यक्ति थे।
जबकि संत रामपाल जी महाराज द्वारा ऋग्वेद मण्डल 1 सूक्त 31 मंत्र 1
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 142 पर लिखा है कि जब श्रद्धालु ने शिव पर जल चढ़ाने हेतु लोटा माँगा, तो दयानंद जी द्वारा कहा गया—‘अपने मुख में कुल्ला भर ले जाओ और उसके ऊपर डाल दो!’
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 296 पर दयानंद सरस्वती ने संत शिरोमणि कबीर साहेब, जिन्होंने पूरे समाज को समरसता का मार्ग दिखाया, उनके विषय में जातिगत संदर्भ लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
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