कहीं छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं।
कहीं किसान अपनी ज़मीन के लिए लड़ रहे हैं।
कहीं आशा कार्यकर्ता महीनों से मानदेय की मांग कर रही हैं।
कहीं आदिवासी अपने जंगल बचाने के लिए खड़े हैं।
हर आंदोलन अपनी अलग लड़ाई लड़ रहा है इसलिए हर आंदोलन को लगता है कि वो अकेला है।
इसलिए 'सत्याग्रह' - आपका आंदोलन जहाँ भी चल रहा हो, उसकी बात सीधे मुझ तक पहुँचाइए। दो मिनट लगेंगे - दिल्ली आने की ज़रूरत नहीं।
आपका आंदोलन नक्शे पर आ जाएगा - और आप देख पाएँगे कि देश में और कौन-कौन वही लड़ाई लड़ रहा है।
बिखरे हुए आंदोलन दबा दिए जाते हैं। जुड़े हुए आंदोलन सरकारें झुका देते हैं।
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देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
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आज गांधी जयंती है।
और आज ही, हज़ारों नौजवान वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं - शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए।
उनकी माँग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। लोकतंत्र बचाओ।
और Modi-Shah सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ़ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा।
बापू ने यही सिखाया था - सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज़्यादा डराता है।
क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।
ज्ञानेश कुमार जाएँगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।
पूरा देश वोट चोरी के खिलाफ़ गुस्से में है - मगर फिर भी BJP-EC की बेशर्मी देखिए कैसे खुलेआम वही किए जा रहे हैं।
कर्नाटक के बेलगावी में एक झटके में लगभग 15 हजार वोटरों के नाम मिटाने की साजिश चल रही थी।
सिर्फ़ तीन दिनों - 22, 23 और 24 सितंबर - में इतने नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए Form 7 की बाढ़ आ गई।
और निशाने पर कौन? मुसलमान, SC, ST और OBC। क्योंकि इनमें से ज़्यादातर लोग BJP के खिलाफ वोट डालते हैं।
मैंने वोट चोरी के इस तरीके का पहले ही पर्दाफाश किया था - Centralized तरीके से software के जरिए वोट delete किए जाते हैं। "चुनिंदा" लोगों के खिलाफ BJP और EC के लोगों द्वारा मिलकर automated तरीके से थोक में Form 7 भरे जाते हैं - और देखते ही देखते लाखों वोटर लिस्ट से गायब हो जाते हैं। और ये सब ऊपर से नियंत्रित किया जाता है।
कर्नाटक कांग्रेस के नेता इस वक्त कर्नाटक CEO के दफ़्तर में इसके दोषियों के ख़िलाफ़ FIR की मांग कर रहे हैं। CEO इस FIR से मना क्यों कर रहे हैं?
इस तरह से मोदी, शाह और ज्ञानेश मिल कर SIR के ज़रिए लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। ये देशद्रोह है।
इसलिए मैं कह रहा हूं ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे कर approver बन जाना चाहिए, और मोदी शाह के खिलाफ जांच होनी चाहिए।
The problems we are going through in the economy and markets are due both to self inflicted wounds and to headwinds over which we have no control.
What is really unfortunate is that there are no regular formal press meets by the Finance Minister discussing the problems and how we are going to approach them.
There are no meetings or opinion seeking with various stakeholders, including both domestic and foreign investors.
There is no brainstorming with experts on the economy about how to revive animal spirits. And I do not consider people like Shamika Ravi economic experts.
Till date, my assessment of our Finance Minister is only getting validated.
In post liberalisation India, she is the worst performing Finance Minister.
"Rarely in the annals of Indian constitutional history have two key institutions, the Supreme Court of India and the Election Commission, acted in tandem with such shameless disregard for the constitutional purpose of their office, inflicting administrative cruelty on citizens and disenfranchising them."
https://t.co/Y3BELHCvlU
मोदी जी का ‘कैश-मुक्त’ भारत दरअसल ‘मज़दूर-किसान-छोटा व्यापारी’ मुक्त भारत है।
जो पाँसा 8 नवंबर 2016 को फेंका गया था, उसका एक भयानक नतीजा 31 अगस्त 2020 को सामने आया।
GDP में गिरावट के अलावा नोटबंदी ने देश की असंगठित अर्थव्यवस्था को कैसे तोड़ा ये जानने के लिए मेरा वीडियो देखिए।
@himantabiswa "No Chief Minister's passage should....." wait!!
"a life in need of urgent care" can only be preceded by "a life in need of MORE urgent care." no?
i mean thats literally the right to life!