This era is of psychological attack on the human mind which is being played through social media. This has been working well for past years. See how social media affected 2024 election of India and america as well. It is Very dangerous and needs to be stopped ASAP.
@AnilYadavmedia1 जाती को हमेशा समाप्त करने का कुछ उपाय है? क्या है?
ताकि जाती का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए?
खुद यादवजी बन रहे है। सिर्फ अनिल ही नाम रखते तो अच्छा होता। यादव क्यों ही लगाना है। किसी को भी अपनी ��ाती नहीं लगानी चाहिए।
@SupriyaShrinate Ask him to distribut his wealth first to poor. How many billions are there in his accounts. If you really want to favour people then ask him to distribut his wealth first. Where from he making money despite having no Business.
Stop making fool people.
@AshwiniUpadhyay झूठे बेर नहीं खिलाये थे सबरीजी ने। ये झूठ फैलाया गया है। कोई सबरी जैसी भक्त अपने भगवान को झूठा कैसे खिला सकती है। ये गलत बात है। पक्ति मे झूठे बेर का मतलब चुन चुन कर दिए थे उससे है।
@SonuSood झूठे बेर नहीं खाये थे। कुछ भी मतलब निकाल लेते है लोग। शबरीजी ने चुन चुन कर बेरो को अलग करके के भगवान को दिए थे। पंक्ति मे झूठे का मतलब चुनना है, न की चखकर बताना। और कोई भला अपने भगवान को झूठा खिला सकता है क्या? और वो भी सबरी जैसी महान भक्त! कॉमन सेंस की बात है सर।
@LogicalSanatan@GautamKhattar सही क��ा आपने
गूगल भी 100% सही नहीं है बताता है। तो कम से कम जो किताब का नाम है या सोर्स है वो तो बताये की कहा लिखा है। उसके बाद अपना अपना विवेक।
@INCIndia@RahulGandhi जूते चप्पल पहन कर कौन भाई शिवजी का फोटो पकड़ता है।
थोड़ी बहुत भी भगवान के लिए इज्जत नहीं है कोंग्रेसियो मे।
और आप ये पेज पर उसका समर्थन कर रहे है
@Pawankhera ओ पवन खेडाजी
अपने आपमें इतना दम है तो खुद अकेले बीजेपी को कोसो, राहुल गाँधी और कांग्रेस का सहारा मत लो।
��प इतने कमजोर है क्या आपको राहुल गांधी का सहारा लेना पड़ता है. विरोध करो लेकिन अपने दम पर करो। बनाओ अपनी पार्टी। विरोध करने मे बुराई नहीं है लेकिन माध्यम गलत पकड़ा है।
@alwaysbegaurav@GautamKhattar ये तो सही है भाई
लेकिन वो अंतिम संस्कार वाली बात नहीं मिल रही है जो गौतमजी ने वीडियो मे बोली है ?
और मेरे को रिजर्वेशन नहीं मिलता है भाई।
@GautamKhattar आपको तो पता ही है की दो अलग अलग पुस्तकों में अलग अलग बाते मिलती है,किसको ऑथेंटिक माने?आजकल तो इतनी घालमेल हो गई है पुस्तकों में की अगले वाले को समझाना मुश्किल है।इसलिए कोई भी बात रखने से पहल��� वेरिफाई करना जरूरी है। झूठ भी तो बहुत बिक रहे है बाजार में।