कुछ बातें अधूरी रह जायेंगीं
कुछ शिकायतें मन में दब जायेंगीं
कुछ वादे पूरे नहीं हो पायेंगे
कुछ रास्ते अधूरे ही छूट जायेंगे
मगर इस बात का यक़ीन रखना
तुम्हारी हथेलियों और मेरी उँगलियों का
सफ़र आख़िरी साँस तक पूरा रहेगा
एहसास जो हमारे तुम्हारे बीच पनपे
पन्नों पर उतरे तो कविता बन गये
अलग अलग थे हम दोनों के शब्द सारे
मगर एक दिन
नज़दीकियाँ तुमसे उतनी हुईं
कि सारे शब्दों को पंक्तियों में पिरो गये
जानते हो
“प्रेम” दो विभिन्न लोगों को भी समतुल्य
बना जाता है…
❤️❤️