@ipanank श्री भगवान् ने कहा—"हे पार्थ! उस पुरुष (आध्यात्मिक साधक) का न तो इस लोक में नाश होता है और न परलोक में ही। क्योंकि हे प्यारे! आत्मोद्धार (भगवत्प्राप्ति) के लिए कर्म करने वाला कोई भी मनुष्य दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।"
इंसान फल छोड़कर फास्टफूड खाता है, फिर बीमार होकर अस्पताल जाता है।
अस्पताल में बिस्तर पर वह रिश्तेदारों द्वारा लाए हुए सेब, संतरे खाता है और रिश्तेदार बाहर बैठकर फास्टफूड खाते है।
बस यही जीवन का चक्र है 🥲