Soon Bollywood will make a movie on the Flydubai flight terrorist attack.
The Caste:
-Omani Muslim pilot : shown as Hindu man “Ram Kumar”
-Indian Hindu pilot Smit Machchhar : shown as “Md. Aftab”
-Passengers : conveniently shown as a perfect mix of Muslims, Hindus, Christians & other religions.
The Story:
The Hindu guy will be portrayed as a hardcore bigoted Sanghi, a BJP voter who hates Muslims, watches Modi Ji’s speeches, visits temples, attends Shakhas and has connections with senior Hindu leaders.
Later, we discover that he works for a “terrorist organisation with no religion” and has been given a huge amount of money to hijack/crash the plane.
When he tries to carry out the attack, the Muslim pilot courageously stops him.
He then gives him a long lecture on “humanity, love and brotherhood” before finally killing him with tears in his eyes because, apparently, he never wanted to kill him.
Meanwhile, a few Muslim passengers will be portrayed as the only passengers helping everyone, calming people down and saving lives.
And, of course, there will be a dramatic Dua/Namaz sequence during the chaos, symbolically showing that prayers saved everyone.
By the climax, the audience will be made to believe that:
Muslim = Hero
Hindu = Villain
BJP voter = Potential terrorist
Modi supporter = Brainwashed extremist
Temple = Radicalisation centre
Shakha = Terror training
Dua = Heroic moment
And then, just before the credits:
“Terrorism has no religion.”
My salute to the Indian pilot Captain Smit Machchhar for his extraordinary bravery.
Despite being stabbed and seriously injured, he fought back, resisted, opened the cockpit door, and enabled passengers and crew to overpower the attacker — preventing a catastrophic mid-air disaster.
He saved the lives of 174 people, including Israeli citizens and other nationals.
I wish Captain Machchhar a speedy and full recovery.
He is a true hero.
निशु आजाद के एक-एक ट्वीट पर हर जिले में ईशनिंदा कानून के तहत BNS 299/IPC 295A में केस होना चाहिए। ‘हिन्दू लीगल फंड’ को इसमें मोबिलाइज किया जाए।
इसके बाप पर काउंटर FIR होनी चाहिए। उसको बहुत ‘दो मिनट पुलिस नहीं आती’ करना है न, क्या @DelhiPolice इतनी नकारी है कि कोई भी गुं��ा प्रवृत्ति का व्यक्ति खुलेआम वीडियो बना कर धमकी देगा?
जब इनको FIR-FIR ही खेलना है, तो यही सही। फिर देखते हैं कि रावण और राहुल कितने थाने घेर लेता है। नरेन्द्र मो��ी ने जो बवासीर बना दिया है, वह अब हिन्दू समाज हर दिन झेल रहा है। दुर्भाग्य यह है कि जो इसका प्रयोग कर रहे हैं वो मोदी के वोटर हैं ही नहीं।
भैंस पूंछ उठायी तो गाना नहीं गायेगी.....
..@ReallySwara ने अपना मुँह खोला और एक बार फिर जौहर को लेकर अपनी भयावह अज्ञानता दिखा दी।
मध्यकाल की महिलाओं पर 21वीं सदी की नैतिकता थोपना बिल्कुल बेतुका है। जिन राजपूत महिलाओं ने जौहर चुना, उन्होंने कैद, गुलामी, यौन हिंसा, या अपने भाग्य पर से नियंत्रण खोने का सामना करने के बजाय मौत को चुना।
स्वरा की जौहर के बारे में च���हे जो भी राय हो, लेकिन उन महिलाओं को शर्मिंदा करने का उसे कोई हक नहीं है, जिन्होंने अपने समय की क्रूर हकीकतों में वो फैसला लिया था।
मध्यकाल की महिलाओं को अपनी 21वीं सदी की आरामदायक नजर से जज करना बंद करो।
मुल्ले शवों के साथ भी रेप करते थे। पाकिस्तान में आज भी वही हो रहा है। इसलिए हिन्दू स्त्रियाँ जौहर करती थीं। किसी दो कौड़ी की मुल्ला प्रेमी, करियर में फुँक चुकी लौंडी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि उसके लिए उसकी ‘पुसी फॉर अ रेंट’ ही जीवन का सत्य है।
ऐसी लौंडियाँ सेक्स को स्वतंत्रता मानती हैं, जितनों के सा�� सेक्स, उतनी अधिक स्वतंत्र। हर स्त्री ऐसा नहीं मानती। उनके लिए अरब के बाजारों में सेक्स स्लेव बनना उतना अडवेंचरस और फुलफुलिंग नहीं दिखा होगा, जितना आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझती, भैया कह कर सैंया बनाने वाली के लिए दिखता हो।
तुम नंगी हो कर एम्सटर्डम के बाजारों के शीशे में नाचों, तुम्हारी मुटल्ली देह भी किसी को पसंद आ जाएगी। हाँ, किसी योनि-केन्द्रित लौंडिया का नारीवाद यह तय नहीं करेगा कि दूसरी स्त्रियाँ रंडी बन कर ही घूमें क्योंकि तुम्हें रंडीपना बहुत पसंद है।
यह पोस्ट मैंने बहुत माइल्ड लिखा है। हिन्दू नारियों पर ऐसे आक्षेप का उत्तर मैं और भी अच्छी शब्दावली के साथ दे सकता हूँ।
@SauravDassss तुम चूतिए इसी कारण तीन बार लॉ में फेल हुए हो। तुम्हें लॉ की झाँट समझ नहीं है। और चिकने लूडो, तू तो डिफेंड कर रहा था पीएम की माँ को गाली देना। तू कैसे मॉरल हाय ग्राउंड ले रहा बे ल���ड़े?
Reporter : Dharmendra Pradhan had finally resigned. What you want to say?
Neha Bharti: Dekhiye mein Dalit Jatav hoon aur mein apne aap ko Hindu Nahi Maanti!!
Reporter: Are madam woh toh puri duniya ko pata chal gaya hai, resignation par boliye!!
Neha Bharti: Jo dalit Mandir Jaate hai, woh pagal hai.
Reporter : Are Madam, resignation par boliye!!
Neha Bharti : Mein manuwadiyo aur brahmanwadio se nahi darti, me hindu nahi hoon dalit hoon!!
Reporter : Bhag bc !! Tote ki tarah padh ke aayi hai!!
ये दीदी बारहवीं कक्षा की छात्रा है, NEET और CBSE के फुल फॉर्म तक बता नहीं सकी। इनका सत्य इतना क्रांतिकारी है कि ज़िंदा इंसान की ही तेरहवीं करवा दी, समोसा खिला कर!
ऊपर यमराज भी अपनी एक्सेल शीट चेक कर रहे होंगे। पता नहीं ये लोग अंबेडकर की कौन सी किताब फॉलो कर रहे हैं, जिसमें ये सब लिखा ह���।
मैं मोदी को राजनीति नहीं सिखा रहा, क्योंकि मैं एक पत्रकार हूँ। मोदी को राजनीति परिस्थितियाँ सिखा रही हैं, वह भी सीधे चेहरे पर तमाचा मार कर और थूक को चटवा कर।
मेरे शब्द कठोर नहीं हैं, सत्ता की चर्बी संघ और भाजपा के हर नेता और चाटुकार समर्थकों की आँखों पर चढ़ी हुई है। उसका निराकरण इस तरह के लुच्चों द्वारा झुकवा कर होते देखना प्रसन्न भी करता है कि तुम यही डिज़र्व करते हो, और दुखी भी कि क्या इस देश में नल्ले, अनपढ़ लोग शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र लिवा लेंगे!
IT सेलिए बहुत अच्छे चुटकुले लिख रहे हैं। एक को देख कर लगा कि वही चुटिया सलाहकार होगा जो ऐसे निर्णय लिवाता है। एक को तो IB, CBI, CID और CIA घर में रिपोर्ट करती है।
मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि यदि प्रधान से त्यागपत्र लेना ही था, तो मोदी को रील वाली बकलोली क्यों करवायी?
कब तक इसके पीछे छुप���गे कि 'देशहित में लिया निर्णय'? देशहित के निर्णय पुलिस का मनोबल तोड़ कर नहीं लिया जाता। देशहित के निर्णय में लाल क़िले पर खालिस्तानी झंडा नहीं होता। देशहित में सत्ता का ईगो आड़े नहीं आता। सत्ताधीश के ईगो और राजनीति से प्रेरित अनुप���्थित कार्रवाइयों ने इस राष्ट्र की बहुत क्षति कर दी है।