संत जी ने बताया कि प्रारब्ध (पूर्व जन्मों के कर्मों का फल) से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता, लेकिन उसकी तीव्रता को कम किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने ये मार्ग बताए
@arvindchotia यह तो रिवाज है वोट मांगने जाए तब कोई खतरा नहीं और चुनाव जीत जाए और मंत्री मुख्यमंत्री बन जाए तो उसी वोट देने वाली जनता से खतरा क्या रिवाज है
डीके शिवकुमार के CM की शपथ लेने के बाद उनकी बेटी ऐश्वर्या ने कहा- सत्ता महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह मायने रखता है कि उस सत्ता का इस्तेमाल ��ैसे किया जाता है
पिता के साथ रिश्ते पर ऐश्वर्या ने कहा- वह उनके सबसे बड़े आलोचक भी हैं और सबसे बड़े समर्थक भी
पेट्रोल डीजल पर ₹2 ₹4 बढ़ने पर हाय तौबा मचाने वाले इस पर कुछ नहीं बोलेंगे
IPL के प्रशंसक न्यू चंडीगढ़ में सिर्फ टिकट के लिए नहीं, पानी के लिए भी लड़ रहे थे। राजस्थान रॉयल्स बनाम सनराइजर्स हैदराबाद एलिमिनेटर मैच के दौरान महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में भयंकर गर्मी में हजारों दर्शक पानी के लिए तरस गए।
मैच देखने, टीम को सपोर्ट करने और यादें बनाने आए थे, लेकिन आयोजकों ने बुनियादी सुविधा तक नहीं दी। इतने महंगे टिकट देते हैं तो क्या सिर्फ अंदर का खेल ही देखना है? बाहर दर्शकों का हाल भी तो देखो।
इतिहास में सबसे अधिक नफ़रत झेलने वाले दो धर्म /पंथ है - हिंदू और यहूदी।
लेकिन क्यों ❓
पश्चिमी देशों की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटियाँ भी हिंदू और यहूदियों को गलत ठहराने का कोई मौका नहीं छोड़तीं। ✍️
👉 Harvard University जैसी यूनिवर्सिटी फ़िलिस्तीन समर्थित आतंकी संगठनों को “फ्रीडम ���ाइटर” का दर्जा देने की कोशिश करती रहती हैं।
👉 वहीं भारत में Jamia Millia Islamia और Jawaharlal Nehru University जैसी जगहों पर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को प्रोपेगेंडा कहकर नकारा जाता है।
इन लोगों को यह विश्वास ही नहीं होता कि कश्मीरी पंडित अपने ही घर-आंगन में किस हाल में जी रहे थे।
एक खास समुदाय को अल्पसंख्यक कह�� जाता है,
जबकि वास्तविकता यह है कि वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है।
👉 उनके त्योहारों में चाहे कितना भी खून बहे —
👉 लेकिन हिंदुओं के त्योहार नफरत की वजह बना दिए जाते हैं।
सबसे बड़ी वजह यही है कि अब हिंदू और यहूदी चुप नहीं हैं।
👉 सदियों से चले आ रहे प्रोपेगेंडा की जंजीरों को तोड़कर
अब वे अपने ऊपर हुई प्रताड़ना का हिसाब रख रहे हैं,
👉 अपनी मातृभूमि और संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं,
👉 और अन्��ाय के खिलाफ खड़े हो रहे हैं।
हिंदू-यहूदी विरोध की असली वजह यही है कि
👉 हज़ारों सालों बाद भी इन लोगों ने
अपना धर्म, अपने संस्कार और अपनी पहचान सहेज कर रखी है।
👉 न धर्म छोड़ा,
👉 न संस्कार छोड़े,
👉 न अपनी जमीन से नाता तोड़ा।
आज भी इन दो आवाज़ों को कुचलने की कोशिश हो रही है।
लेकिन याद रखिए —हिंदू झुकेगा नहीं, रुकेगा नहीं।
अहमदाबाद विमान हादसा
“जानबूझकर किए गए कृत्य” का परिणाम?
इटली के दैनिक समाचार पत्र कोरिएरे देला सेरा ने नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच हुई हालिया चर्चाओं से परिचित दो सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसके अनुसार, अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच कर ���हे अधिकारियों का निष्कर्ष है कि यह दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं, बल्कि एक “जानबूझकर किए गए कृत्य” का परिणाम थी।
हालांकि, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की आधिकारिक रिपोर्ट जारी होने से पहले किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी माना जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जांचकर्ताओं ने यह निर्धारित किया है कि जून 2025 में हुआ यह हादसा इंजन में ईंधन की आपूर्ति बंद होने के बाद ���ुआ। जांच के अनुसार, यह घटना किसी यां��्रिक खराबी के कारण नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई कार्रवाई का नतीजा थी।
रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि जिम्मेदारी को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, हालांकि मुख्य संदेह कैप्टन सुमीत सभरवाल पर व्यक्त किया गया है। अख़बार के मुताबिक, दुर्घटना के लगभग एक महीने बाद यह जानकारी सामने आई थी कि वे अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित थे।