My Take on UFBU Circular
1. High level Committee should conclude in Time Bound manner and Govt must be a Party of it.
2. PLI formula should be Uniform and not Zero for anyone.
Members must be Justified with details.
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी ���्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्र��ंच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकाले��।
जो अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाता है,
वही बदलाव की शुरुआत करता है।
28, 29 और 30 सितम्बर —
तीन दिन, एक आवाज़, एकजुट संघर्ष।
#5DayBankingNow के लिए
आइए अपनी एकता और संकल्प को मजबूत करें।
Comrades, अब समय है साथ खड़े होने का।
Don’t mistake our commitment to public service for weakness.
During COVID, when many stayed home, bankers stood at the counters, handled cash, processed salaries, pensions, loans and essential banking services—putting ourselves and our families at risk.
We stood with the public then.
We stand with them now.
Respect bankers. Respect dialogue. Respect democracy.
We won’t be bullied. We won’t be silenced. We will stand together.
#Bankers #BankingSector #PublicSectorBanks #UnitedWeStand
@rupamsmail@Vitthalraj_mane@nsitharaman
Supporting a 5-day banking week means more time for families and hobbies, fostering a healthier workforce for India's economy. #5DayBankingNow#AIBEA@PMOIndia