अंध भक्तों का तो फिर भी ठीक था
पर ये अपने वाले भी किसी से कम नहीं है
जितना नुकसान दीन ए इस्लाम को अपनों ने दिया है शायद दूसरे न दे पाएं
ये साले अंधभक्तों से भी आगे निकल रह�� हैं
सुनीता उत्तर प्रदेश से जंतर-मंतर तक जुनैद से मिलने आई थीं, क्योंकि उन्होंने देखा था कि जुनैद निस्वार्थ भाव से बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद कर रहा है।
रोते हुए उन्होंने उससे कहा, "बेटा, तुम्हारी मां सहारनपुर से तुमसे मिलने आई है। तुम हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हो।"
जुनैद उसकी बात सुनकर अपने आंसू नहीं रोक पाया।
यही वो भारत है जिससे संघी नफरत करते हैं! RT ज़रूर करे