चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर आज श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर परिसर स्थित सूर्य मन्दिर पर विधि विधान पूर्वक ध्वज का आरोहण किया गया। भगवा रंग के इस ध्वज पर 'ॐ' अंकित है।
मन्दिर के प्रवेश द्वार से बाएं परकोटा के नैऋत्य कोण पर स्थित सूर्य मन्दिर के १९ फिट ७ इंच ऊंचे ध्वज दंड पर ९ फिट ३ इंच लंबाई वाले ध्वज की चौड़ाई ४ फिट ७ इंच है।
On the Ashtami day of Chaitra Navratri, dhwajarohan was carried out at the Mandir located within the Shri Ram Janmabhoomi temple complex, following all Vedic rituals. The saffron-colored dhwaj bears the symbol ‘Om’.
The Mandir is situated at the southwest corner of the left parikrama area from the mandir’s main entrance. The dhwaj has been hoisted on a flagstaff measuring 19 feet 7 inches in height, while the flag itself is 9 feet 3 inches long and 4 feet 7 inches wide.
@Asharamjibapu__ यह वाणी बताती है कि संत सदा सत्य और सज्जनों के पक्ष में खड़े रहते हैं। इतिहास गवाह है—जब-जब संतों ने समाज को जाग्रत किया, विरोध और बदनामी हुई; पर अंततः सत्य ही विजयी हुआ और संतों का तेज और अधिक प्रकट हुआ।
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मेरे लिए कोई लिखे-लिखवाए मेरे को फिक्र नहीं क्योंकि मेरे सत्संगी जानते हैं कि कबीर के लिए क्या नहीं किया था, नानकजी के लिए क्या नहीं किया, जब भी संत आते धरती पर और सज्जनों का पक्ष लेते तो दूसरे आदमी उन संतों को ही बदनाम करके समाज और संत के बीच खाई खोदते हैं।
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वैद्यनाथ क्षेत्र यह याद दिलाता है कि उपचार केवल बाहरी साधनों से नहीं होता बल्कि चेतना का संतुलन ही वास्तविक औषधि है। शिव यहाँ वैद्य बनकर यही संतुलन लौटाते हैं। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻 https://t.co/z79Fwa0JTd
शिवपुराण और स्कंदपुराण में नागेश्वर उस ज्योति के रूप में वर्णित है जो सर्प—अर्थात विष, भय और अहंकार—को अपने नियंत्रण में रखती है। यह कथा समझाती है कि शिव केवल संकट से बाहर नहीं निकालते, बल्कि भीतर जमे भय को भी मूल से काट देते हैं।
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शिवरात्रि का उपवास, मौन, मानसिक शिवजी का पूजन, ध्यान, मेरे को बहुत फायदा हुआ। मैं 1000 वर्ष अलग से तपस्या करूं तो शायद इतना फायदा नहीं होता जितना शिवरात्रि का एकांत, मौन, प्रीतिपूर्वक, ध्यान-धारणा में मुझे लाभ हुआ।
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विश्ववासी #महाशिवरात्रि का अवश्य लाभ लें।
शिवरात्रि का व्रत न करने से पाप लगता है लेकिन करने से ऐसी बुद्धि होती है जैसी सतयुग, त्रेता और द्वापर के लोगों की होती थी और वही पुण्यलाभ प्राप्त होता है जो उस काल में मिलता था ।
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समाज का जितना कानूनी ढंग से भला नहीं होता, उससे करोड़ गुना भलाई सत्संग के द्वारा, मंदिरों, धार्मिक संस्थाओं के द्वारा होती है। प्रदेश के लोग नींद नहीं कर पा रहे, भारत के लोग इतने शोषित होने के बाद भी आराम की नींद करते हैं ये सब धार्मिक स्थानों को यश जाता है।
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@Asharamjibapu__ हमारे मां बाप ने कितनी मेहनत और कितना कष्ट सहकर जननी ने हमें जन्म दिया है और पिता ने कितनी तकलीफें उठाकर हमें पाला-पोसा , पढ़ाया-लिखाया है।ऐसे देव तुल्य माता पिता का पूजन ये हमारे देश की संस्कृति है, पाश्चात्य कल्चर नही है।
#AsharamjiBapuQuotes#14फरवरी_मातृ_पितृ_पूजन_दिवस
@Asharamjibapu__ हमारे मां बाप ने कितनी मेहनत और कितना कष्ट सहकर जननी ने हमें जन्म दिया है और पिता ने कितनी तकलीफें उठाकर हमें पाला-पोसा , पढ़ाया-लिखाया है।ऐसे देव तुल्य माता पिता का पूजन ये हमारे देश की संस्कृति है, पाश्चात्य कल्चर नही है।
#AsharamjiBapuQuotes#14फरवरी_मातृ_पितृ_पूजन_दिवस
सब मिलेगा, लेकिन मां-बाप नहीं मिलेंगे। कितना कष्ट सहकर जननी ने हमें जन्म दिया है और पिता ने कितनी तकलीफें उठाकर हमें पाला-पोसा , पढ़ाया-लिखाया है। अब उनसे मुंह मोड़कर युवक-युवती, आई लव यू, आई लव यू करके एक-दूसरे को फूल दे, एक-दूसरे को काम की नजर से देखें तो जीवनी शक्ति का ह्रास होता है। दिल-दिमाग कमजोर हो जाएगा, संतान कमजोर आएगी। ये हमारे देश की संस्कृति नहीं है, पाश्चात्य कल्चर है।
#AsharamjiBapuQuotes
#14फरवरी_मातृ_पितृ_पूजन_दिवस
@Asharamjibapu__ त्रिकाल सत्य,
अंदर का सुख सेवा, सद्गुण और शांति से प्रगट होता है बाहर के सुख को ही सब कुछ मान लें तो खालीपन ही हाथ आता है।
आत्मसुख ही सच्चा सुख है।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ त्रिकाल सत्य,
अंदर का सुख सेवा, सद्गुण और शांति से प्रगट होता है बाहर के सुख को ही सब कुछ मान लें तो खालीपन ही हाथ आता है।
आत्मसुख ही सच्चा सुख है।
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