आज से 4 साल पहले मैने ��षिकेश से भानियावाला रास्ते में सफर किया था, वो रास्ता डबल लेन है, और बहुत घना जंगल है।
वह पर फोर लेन बनाना सही नहीं है।
ये सरासर पर्यावरण को नुकसान है।
Fearless protests hit Modi’s BJP in Rishikesh!
Common people are raging against 3,000 trees being slaughtered for road widening.
The “dead” public finally woke up - for trees.
Trees today.
Corruption tomorrow.
India is awakening
अगर दिल्ली पुलिस के सोनम वांगचुक को जबरदस्ती उठाकर ले जाने पर 50 ट्वीट करने और खूब गुस्सा दिखाने के बाद थोड़ा सा आक्रोश बचा हो, तो इसपर भी दिखाइए। ऋषिकेश के सात मोड़ इलाके में जंगल की कटाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को उत्तराखंड पुलिस जिस तरह उठाकर ले जा रही है, उ���पर भी आपका खून खौलना चाहिए।
कभी जंगल उजाड़ने वाली तो कभी छात्रों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करनी वाली यह एक निक्कमी, बेशर्म और तानाशाह सरकार है।
@uttarakhandcops
#RishikeshDeforestation
यह मुद्दा जितना चौंकाने वाला है , उतना ही खतरनाक भी और इसका सीधा असर लाखों माताओं और नवजात बच्चों की ज़िंदगी पर पड़ रहा है।
डिफेंस हॉस्पिटल vs सिविल हॉस्पिटल — फर्क सिर्फ़ सिस्टम का है , क्षमता का नहीं।
ARMY, NAVY, AIRFORCE में पैदा होने वाले लगभग 90% बच्चे नॉर्मल डिलीवरी से जन्म लेते हैं क्योंकि वहाँ डॉक्टर को किसी टारगेट, कमीशन या प्रेशर की चिंता नहीं होती। उनका सिर्फ़ एक काम होता है — मां और बच्चे की सेहत।
लेकिन सिविल सोसाइटी में 60–70% जन्म सिजेरियन से कराए जा रह�� हैं।
क्यों?
क्योंकि कई प्राइवेट हॉस्पिटल्स में डॉक्टर को हर महीने डिलीवरी टारगेट , रेवेन्यू शीट और सर्जरी कोटा पूरा करना होता है।
नतीजा –>>
जो डिलीवरी नॉर्मल हो सकती है, उसे भी सिजेरियन में बदल दिया जाता है।
चार्जेस :
> • सिजेरियन = ₹50,000 से ₹1,00,000+
> • नॉर्मल डिलीवरी = लगभग ₹10,000–₹25,000
यानी नॉर्मल डिलीवरी कराए तो हॉस्पिटल का प्रॉफिट कम। इसलिए खेल वहीं से शुरू होता है।
डॉक्टर भी दोषी नहीं, मजबूर होते हैं।
अगर रेवेन्यू नहीं लाओगे, तो निकाल दिए जाओगे — यह सच्चाई है।
कई डॉक्टर बताते हैं कि उन्हें हर महीने OTs फ़ुल रखने का दबाव होता है।
मेडिकल साइंस को बिजनेस प्लान में बदल दिया गया है।
सबसे बड़ा सबूत :
कोरोना लॉकडाउन में जब लोग घरों में फँसे थे, तब हजारों बच्चों का नॉर्मल डिलीवरी से घर पर ही जन्म हुआ।
वही बच्चे और वही ��ां — पर जब हॉस्पिटल पहुंचे तो “ऑपरेशन जरूरी है” बोल दिया जाता था।
यह सिर्फ़ हेल्थकेयर नहीं , यह संगठित लूट है।
भारत में सबसे ज़्यादा लूट स्वास्थ्य विभाग में हो रही है — कोई बिल पूछने वाला नहीं, कोई जांच नहीं, कोई पब्लिक ऑडिट नहीं।
सरकार को तुरंत जांच करनी चाहिए:
>• हर हॉस्पिटल का सिजेरियन रेट पब्लिक करना अनिवार्य हो
>• डॉक्टरों पर टारगेट-आधारित प्रेशर पर कानूनी रोक लगे
>• राज्य मेडिकल काउंसिल को रेगुलर ऑडिट करना चाहिए
>• मरीजों को “सेकंड ओपिनियन का अधिकार” कानून में दर्ज हो
>• प्राइवेट हॉस्पिटल्स के प्राइस कैपिंग लागू हो
देश में मातृत्व को बिज़नेस बनाना सबसे बड़ा अपराध है।
यह सिर्फ़ आंकड़ों की बात नहीं — यह लाखों परिवारों की मजबूरी, लूट और दर्द की कहानी है।
"सालभर कमाया 500 रुपए नहीं दे सकते..."
छत्तीसगढ़: सूरजपुर के राम��नुजनगर शासकीय महाविद्यालय का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें प्राचार्य विद्यार्थियों से पैसा लेते नजर आ रही हैं। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि प्रवेश पत्र में हस्ताक्षर करने के नाम पर 500 रुपए वसूले जा रहे हैं।
चारबाग रेलवे स्टेशन पर पुलिसकर्मी की दबंगई, बच्चे पर डंडा मारने के बाद बवाल।
#लखनऊ: चारबाग रेलवे स्टेशन से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिसकर्मी द्वारा बच्चे के हाथ पर डंडा मारने के बाद ह��गामा मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे के माता-पिता इस घटना पर भड़क गए और पुलिसकर्मी से बहस करने लगे। विवाद बढ़ने पर गुस्साई महिला ने पुलिसकर्मी को चप्पल मार दी, जिस पर पुलिसकर्मी ने उसे धक्का दे दिया। लेकिन महिला भी पीछे नहीं हटी और लगातार दो-चार चप्पल और जड़ दीं।
इस झगड़े को रोकने के लिए जब एक महिला पुलिसकर्मी बीच-बचाव करने आईं, तो आरोपी पुलिसकर्मी ने उन्हें भी धक्का दे दिया। चश्मदीदों का कहना है कि पुलिसकर्मी शराब के नशे में था।
यह ��ीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है, और अब पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जा रही है।
#viral #viralvideo
BIG NEWS 🚨 दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गयी. वर्मा जी दिल्ली से बाहर थे. उनके परिवार वालों ने आग बुझाने के लिए फ़ायर ब्रिगेड को फ़ोन लगाया.
मामला हाइकोर्ट के जज के घर का था तो बड़ी संख्या में पुलिस बल भी आई. आग ���ुझाने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से घर की जांच हुई तो एक पूरा कमरा नोटों से भरा मिला.
सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फरमान सुना दिया. पैसा खाकर ना जाने इस जज ने कितने गलत फैसले दिए होंगे.
न्यायपालिका ही जब भ्रष्टाचारी जज को सज़ा नही देगी तो कौन देगा. ट्रांसफर कोई सज़ा नही होती. यह बेहद संग��न आरोप है. जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलना चाहिए.
"लड़की के स्तन को पकड़ना, उसके पायजामे के नाडे को तोड़ना रेप या रेप की कोशिश के तहत अपराध नहीं"
◆ इलाहाबाद HC ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा
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