@TheSiyaScience यही खुबी है आम भारतीय 91% प्रतिशत वोटारो में ! स्किल डेवलपमेंट सरकार करवाती है ! स्किल को ख़ुद से खुद के उपयोग करने की शिक्षा भारत में नहीं है ! इसलिए करोड़ों स्किलों को कौड़ी के भाव में ख़रीद कर कम्पनी इनडायरेक्ट डाइरेक्ट देशी विदेशी,स्वदेशी भी आम जन को लूट रहे हैं
@TheSiyaScience लूटने की चाहत सभी शासन में रहती हैं ! इससे आज़ तक आम जनगण राहत नहीं मिली! शासन शोषण विना और राशन कमीशन विना भारत में ख़ास कर पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी भारत में कतई सम्भव नहीं ! राजशाही तभी चमकती हुई जब नौकरशाही साथ देती है!वर्षों गुलामी में रहने के वाबजूद गुलामी क़बूल
@REAL___HINDUVT रहने से टीम के सभी लाख से करोड़ यानी जितना चाहे शिक्षा, अर्थ, प्रेम, सेवा और सहयोग अर्ज़न कर सकते हैं !
अरस्तू और राधाकृष्णन भी एक एक पुरुष और महिला को समाज में रहने के लिए प्रेरित किये थे!योजना के विना आप पढ़ाई, लिखाई, दिखाई, कमाईं,धमाई आदि में शत-प्रतिशत सफ़ल नहीं हो सकते!
@REAL___HINDUVT कहता है शिक्षा और कर्म जरूरत के अनुसार सृजन की वस्तु है ! अकेला व्यक्ति का काम पागल के समान होता है ! समाज यानी टीम का काम शत-प्रतिशत सुरक्षित एवं सही होता है! सप्त दायित्व युक्त स्व-नियंत्रित सप्त जनीय समाज में रह सकने से और किसी एक शिक्षा और तदनुसार एक कर्म में पारंगत
@REAL___HINDUVT कपड़ा और मकान बनाते हैं ! स्व-कर्म के विना ख़ुद को फल नहीं मिलता ! जैसे तन तन में,मन मन में , यन यन में राम हैं --- मतलब भगवान हैं! तब हर कर्म में धन है! अर्थशास्त्र कहता है - दुनिया में अनार्थिक कार्य करने वाले भूखे ही मर जाते हैं ! अध्यात्म शास्त्र यानी सनातनी
@REAL___HINDUVT ज़रूर देगा! सनातन धर्म यानी एक मात्र मानव धर्म है जिसकी समानता किसी भी सम्प्रदाय में नहीं है! रोल्डगोल्ड को सोना समझने से वह सोना नहीं होता! परम तत्व को समझने के लिए सत् शिक्षा, सत् ज्ञान और सत् संस्कार हासिल करना पड़ता है! सत् और असत् कर्मी बनकर मनुष्य रोटी
@REAL___HINDUVT हम एक दूसरे से अनजान, अपरिचित, अज्ञात, अ-स्थानीय, अ-सामाजिक, अ-विश्वसनीय और दुश्मन बनकर रहते हैं !
दूसरी बात किसी का कर्म का फल से अगर आप असंतुष्ट हैं ! तो आप महामूर्ख हैं ! आपकी बेचैनी आपकी जलन है ! आप भी चोरी करो और तदनुसार सजा भले ही व्यवस्था न दे सकते! मगर ऊपरवाला
@PMOIndia गण को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! व्यवस्था पर आंखें बन्द कर सकलांग होते हुए भी विकलांग बनकर अकर्मण्य रहकर हम सरकारी सुविधा जैसे शिक्षा, सुरक्षा, चिकित्सा, चिकीर्षा, व्यवसाय, उद्योग और सेवा कैसे पा सकते! इसके लिए खुद को पहले दायित्व युक्त स्व-नियंत्रित समाज में रहना अनिवार्य
@PMOIndia हरेक स्थानीय क्षेत्र के आम साधारण जरूरत मन्द जनगण की आशा और आकांक्षा, आस्था और विश्वास, धर्म और राजनीति का मसीहा होते हैं देश देश के प्रधानमंत्री ! अति जरूरत मन्द यानी सम्पन्न , समृद्ध, शक्तिमान, धनवान, राजा, डाइरेक्ट इन डाइरेक्ट कम्पनी मालिक या सम्प्रदाय निर्विशेष प्रधान
@PMOIndia सु- कौशलित, स्व-निर्भरित और सदा प्रसन्नचित रह सकते हैं ! तो कौन आपको विरोध करेंगे? नहीं तो व्यवहारिकी सहयोग दीजिए! तब एक साधारण आदमी भी मिनटों सबकुछ कर सकता है ! इसके लिए खुद का एक सप्त दायित्व युक्त स्व-नियंत्रित सप्त जनीय समाज की जरूरत है!
डॉ निखिल चन्द्र दास
@PMOIndia एक प्रतिशत सहयोग और सहायता दान करने के लिए कोई आम या साधारण संगठन, अरबपति सामाजिक संगठन के एक सदस्य भी तैयार नहीं है ! ऐसे व्यक्ति कोर्ट से लिखित लिखित शपथपत्र दाखिल कर खुद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बन जायें! हम अगर एक साल के अंदर शत-प्रतिशत सुरक्षित सुशिक्षित सु-सम्पन्नित
@PMOIndia इतना सभी को देखने आता है! साधारण जरूरत मन्द जाति धर्म लिंग निर्विशेष छोटे छोटे अपराधी , चोर, ठगी, बेईमानी आदि आदि आदि को भी हरेक स्थानीय आंखों से बड़े बड़े अपराधियों , आतंकवादियों को भी छोटे से लेकर बड़े बड़े घोटालों बाजों को भी मगर अपनी ओर से जिम्मेदारी और जवाबदेही का
@JagranNews सकेंगे! कोई भी पत्रकार या सरकार ऐसे सामाजिक संगठन कभी सवाल नहीं कर पायेंगे कि अरबों खरबों का फंड का फंडा कांग्रेस, बीजेपी,आप, टीएमसी, जे एम एम, आजसू का है या कोई चोरी या सीनाज़ोरी का, डकैती का या किसी धनवान का ! दूसरे के पैसों से राजनीति करने वाले कभी ईमानदार नहीं हो सकते
@JagranNews अगर ऐसे लोग बेरोजगार है तो रोटी कपड़े मकान की व्यवस्था कैसे होगी! कम कम संख्या में जाति धर्म लिंग राजनीति निर्विशेष सभी स्व-स्व-सामाजिक स्थानीय शैक्षिक और आर्थिक यानी सास्थाशाया शिक्षण समाज द्वारा उत्पादक या उत्पादिका बनकर अगर आ सके ! निश्चित रूप से अपना ख़र्च खुद ही वहन कर
@JagranNews बड़ा,अनजाना, अपरिचित समाज में सही ग़लत आदमी की पहचान कभी शत-प्रतिशत त्रुटिरहित नहीं होती ! एक आंख से करोड़ों लोगों का प्रत्यक्ष देखना आज़ भी मुश्किल है ! ऐसे भी लोग स्व-स्व- स्वार्थी नशा से नशित होकर आते हैं! स्थानीय सप्त दायित्व युक्त स्व-शासित सप्त जनीय समाज की सख्त ज़रूरत
@MousamMandal9 जी हां समाज में रहेंगे तो आप ही के सकारात्मक सहयोग से भारत में वास्तविक जनतांत्रिक व्यवस्था क़ायम हो सकती है! नकारात्मक ऐसा कोई राजनेता भी नहीं है देश में जो सत्ता पक्ष को आमजन की आम समस्या को भी झट से समाधान करने के लिए बाध्य हो जाय! खल नायक के विना कोई नायक नहीं बन सकता
@MousamMandal9 अ-स्थानीय, अ-सामाजिक, अ-विश्वसनीय , अ-परिचित पदाधिकारी का हरेक स्थान की समस्यायों का समाधान कर मुश्किल साबित होता है ! भारत की राजनीति को सामाजिक सरोकार से भरपूर कहा जाता है ! लेकिन आप का सामाजिक दायित्व मुक्त है ! जब आप खुद सप्त दायित्व युक्त स्व-नियंत्रित सप्त जनीय समाज
@MousamMandal9 आपकी प्रार्थना याचना का पर्याय बना रहेगा ! सभी सप्त जनीय स्व-शासित स्थानीय सामाजिक व्यवस्था के सभी लोग महीने में 100 से 1000 रुपए दान देकर योग्य और अनुभवी स्थानीय आंखों देखा उत्पादकी शिक्षक के विद्यार्थी बनकर सभी महीने एक लाख छब्बीस हजार कमा भी सकते हैं! अनजान -
@MousamMandal9 खुद का सप्त दायित्व युक्त स्व-नियंत्रित सप्त सप्त जनीय समाज बनाकर हरेक समाज प्रधान को अपने अपने स्थानीय क्षेत्र के लिए बराबर बराबर सप्त दायित्व युक्त स्व-नियंत्रित सप्त जनीय तत्काल और तत्क्षण कार्रवाई प्रेरणा समाज बनाकर सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को पत्र जारी किए विना
@DishaRajput24 वह नहीं हारेगा! मगर पार्टी नेता अगर दुराग्रह से लड़ेंगे तो एक भी सीट मिलना मुश्किल!!!!! मोदी इस युग में अधर्म का हत्यारा है! ट्रम्प की भाषा में मोदी सचमुच इस युग में फरिश्ता हैं! देशभक्ति से डूबे हुए जाति धर्म निर्विशेष सभी निम्न आय वर्गीय जनगण की भावना में वह भगवान हैं!