भारत में कैंसर, हृदय , गुर्दा रोग महामारी की तरह फ़ैल रहा है, Erectile dysfunction (ED) बहुत तेजी से बढ़ रहा है...इसके कई कारणों में से एक मुख्य कारण Food Adulteration हैं पर इसके लिए capital punishment नहीं है, गिरफ्तारी भी नहीं होती.कभी भी किसी बड़े रेस्टोरेंट पर न छापा पड़ता है और न कार्रवाई होती है क्यों ??? यह तो जंगलराज से भी गंभीर अपराध है , इसके अपराधियों का सामाजिक , आर्थिक एनकाउंटर क्यों नहीं ????
मैंने दो कॉमेडियन्स का वीडियो देखा, हँसी ढूँढ़ता रहा, मसखरी दिखाई दी,
सटायर ढूँढता रहा, संवेदन-शून्यता दिखायी दी.
परिहास ढूँढता रहा, बदतमीज़ी दिखाई दी.
एक वृद्ध महिला को कुर्सी और आदर देना अगर मज़ाक़ का विषय है, तो ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि मैं आजीवन मज़ाक़ बन के जीता रहूँ और एक दिन मज़ाक़ बनके ही इस निर्मम दुनिया से चला जाऊँ.
विरोध करना लोकतांत्रिक-अधिकार है, लेकिन मर्यादा से गिरना चारित्रिक-पतन है.
परमात्मा मुझे वो दिन न दिखाए कि मैं अपने महान भारतवर्ष में कभी जोकर-राज देखूँ.
मेरे बच्चों, जेन ज़ी के चिराग़ों, हँसने के लिए बीरबल के चुटकुले पढ़ लेना, पंचतंत्र की कहानियाँ पढ़ लेना, तेनालीराम के किस्से पढ़ लेना, लेकिन ऐसे भावना-शून्य जोकरों को अपनी मोबाइल स्क्रीन पर जगह देकर, अपने माता-पिता की परवरिश को लज्जित मत करना. जीते रहो!
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का वायरल वीडियो देखा और देखते ही बंद कर दिया। बिल्कुल हँसी नहीं आई। उदास कर गया। जिसने भी किया है, ग़लत किया है। किसी के भी खाते समय कैमरा लगा देंगे तो कुछ अजीब लम्हे क़ैद हो जाएंगे। अफ़सर कई दिनों से भाग रहे होते हैं। किसी का बीपी नीचे जा रहा होता है तो किसी का ऊपर। भूख लगना स्वाभाविक बात है। वहाँ पर खाने-पीने की चीज़ें इसीलिए रखी जाती हैं। पता है यह सब सोशल मीडिया का साइड इफेक्ट है लेकिन इस खेल में किसी की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। शर्मनाक है।
Video of the day for me
What a Perfect reply 👏 👌
By none other than @AnupamPKher Sir ji ..
Its Must watch for all
Don't miss this one..
Worth your 10 odd mins trust me
The earlier government made every possible attempt to stop Kumar Vishwas’s Ram Katha. Today, the picture has changed completely — CM Suvendu Adhikari himself is sitting and listening to Kumar Vishwas’s Ram Katha. This is the Bengal we wanted. This is Ram Rajya.
Jai Shri Ram!
Anyone would welcome auditing schools in Punjab or elsewhere.
only one request/suggestion: audit Punjab with the same eyes, the same questions and the same courage with which you audit governments elsewhere. Punjab deserves no special exemption—and AAP deserves no friendly exemption.
एक बात समझ नहीं आई। जंतर-मंतर वाले धरने में जब खुद CJP/BJP वाले कह चुके थे कि इस प्रदर्शन के अंतर्गत जो भी गतिविधियां हुईं, किसी के ऊपर कोई FIR नहीं लगेगी, तो स्वतंत्र भारद्वाज पर ही क्यों कार्रवाई हो गई?
स्वतंत्र भी उसी प्रदर्शन का हिस्सा था। दोनों तरफ कहा-सुनी हुई, मारपीट हुई। पुलिस को भी मारा गया था कई लोगों ने। लेकिन एक्शन सिर्फ एक तरफ चला गया। बाकी लोग जो पुलिस पर हाथ उठा रहे थे, वो कहां गए?
यह दोहरा चरित्र क्यों है? एक तरफ वादा कि कोई केस नहीं होगा, दूसरी तरफ जैसे ही थोड़ा दबाव बना, SC/ST और POCSO जोड़कर एक आदमी को निशाना बना लिया गया।
प्रदर्शन के नाम पर जो भी हुआ, वो सब का हिस्सा था। फिर सिर्फ एक तरफ की कार्रवाई क्यों? यही सवाल है।
बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब लोकतंत्र भारत से खत्म हो चुका है, यहां अब भीड़ तंत्र काम करता है।
तमाम प्रयासों के बाद भी हमारी निशू आजाद और उसके पिता संजय आजाद के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने FIR नहीं लिखी है, दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन काम करती है, दिल्ली में भाजपा सरकार है, स्वतंत्र भारद्वाज भी भाजपा के लिए काम करता था आज यदि कांग्रेस सरकार के राज्य में यदि कांग्रेस का कार्यकर्ता होता तो शायद वह अपने कार्यकर्ता के साथ खड़ी होती।
कंगना रनौत का अंदाज देखिये। मंडी लोकसभा क्षेत्र की DISHA की बैठक में अफ़सरों की क्लास ले रही हैं। सांसद निधि का हिसाब मांग रही हैं। ये तेवर वही सांसद दिखा सकता है जो भ्रष्टाचार का पैसा नहीं खाता। शाबास कंगना।
#kangnaranawat#KanganaRanaut#mandi#himachalpradesh
कहते हैं की इंडिया के जो बड़े बड़े सरकारी हॉस्पिटल जैसे AIIMS या सफदरजंग है उसमें देश के NEET टॉपर स्टूडेंट डॉक्टर बन कर आते हैं,
लेकिन मैने सफदरजंग हॉस्पिटल में अपने भाई को लेकर था तो इतना तो देख लिया कि भले ही वो NEET टॉपर हो लेकिन इंसानियत और मानवता इनके अंदर जरा सी भी नहीं है,
ये कहानी सिर्फ मेरे भाई की ही नहीं वहां के हर इस मरीज की है जो VIP नहीं था,
यदि वेंटिलेटर पर कोई मरीज है और यदि उसे कुछ सीरियस हुआ तो मरीज के साथ वाले आदमी जाकर डॉक्टर को बताएगा तो डॉक्टर तुरंत नहीं आते हैं, यदि दो डॉक्टर आपस में बात कर रहे हैं तो जब तक उनके बात खतम नहीं हो जाता है तब तक वो नहीं आयेंगे,
यहां तक कि मरीज को जो पानी या ग्लूकोज या किसी भी प्रकार की दवाई चढ़ रहा है और वो खत्म हो गया तो यदि आप जाकर डॉक्टर को बताओगे तो भी वो तुरंत नहीं आते हैं,
यदि आप जाकर ये कहेंगे कि मरीज का दवाई खत्म हो गया तो वो कहेंगे कि उस सिस्टम को ऑफ कर दीजिए हम थोड़ी देर में आते हैं और फिर अपने हिसाब से आयेंगे एक या डेढ़ घंटे बाद,
सफदरजंग में ना दवाई की कमी है ना डॉक्टर की बस कमी है तो डॉक्टरों के अंदर इंसानियत और मानवता की,
इनको कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मरीज के घर वालों पर क्या बीतता है या मरीज मर जाए तो उसके घरवालों पर क्या बीतेगा,
ऐसा लग रहा था कि सफदरजंग के डॉक्टर सिर्फ अपनी 8 घंटे की नौकरी करने और फर्ज निभाने आते हैं जो बहोत ही दुखद है 😢
प्राइवेट वाले पैसे लेते हैं लेकिन कम से कम मरीज को सीरियस लेते हैं।
आज पूरे 36 घंटे बाद मेरे भाई की डेड बॉडी मुझे मिल गई है और अब मैं उसे बिहार लेकर जा रहा हूं,
सरकारी व्यस्था के नाम पर ये व्यस्था लोगों कितना तड़पाती है कल से लेकर आज तक मैने समझ लिया है,
ये 36 घंटे काटना मेरे लिए 36 साल के बराबर था, शवगृह के बाहर भी मुझे नहीं रुकने दिया गया,
मै बगल में एक लॉज में रुका था और मेरा भाई मुर्दाघर में पड़ा था, जिस भाई के साथ खेला, खाया और बड़ा हुआ उसको मुर्दाघर में देखकर दिल इतना तड़प रहा था और विवश था कि मैं बयान नहीं कर सकता हूं,
मै सरकार से यहीं निवेदन करूंगा कि कृपया करके व्यस्था के नाम पर लोगो को ना तड़पाए,
सरकारी काम ठीक है लेकिन लोगों के भावनाओं का ख्याल रखना भी जरूरी है और कोई भी इंसान इतने देर तक अपनो को तड़पते हुए देख नहीं सकता है,
मेरे साथ तो 10 लोग थे तो मैं ये समय जैसे तैसे काट लिया लेकिन मैं यहां देखा कि कोई अकेले अपने बाप, बेटे और पति के शव के लिए तड़प रहा था और उन्हें सारी करवाई भी करनी थी और रोना भी था,
इसीलिए सरकार से कहना चाहूंगा कि इस व्यस्था में बदलाव करें और इसे आसान बनाए 🙏
"Army salaries are paid from our taxes," said a female tourist in Ladakh where traffic was being regulated.
Don't know more details but this comment is a degradation of the soldiers sacrifice.
Army personnel also pay taxes.
Being border area, Ladakh has security sensitivities.
Middle Class is asking all governments..
If we pay Global Standard Taxes
Do we have Global Standard facilities ?
Overall our Public Schools, roads, breathing air and drinking water ? States need to answer this.
Personal Income Tax, GST, Tolls, Cess, Fuel Taxes, Local Taxes..
I don’t object to contributing . But after everything I contribute, what am I getting back?
Why can’t India’s middle class get the Singapore deal as a starter— lower taxes, better roads, better transport, better civic infrastructure and greater accountability for every rupee it pays from every authority that extracts a tax in one or other form.
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में सभी तरह के एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के- निर्माण, स्टोरेज और बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. इस नए आदेश के बाद अब यूपी में नकली और मिलावटी डेयरी आइटम नहीं बेचे जा सकेंगे.
#Uttarpradesh#DairyProducts
What escalation fear? One side the enmy was in attacking position in our own territery. And other side we were in fear of escalation? To whome we were accountable? US? It was a weak govt. Bajpai govt was the weakest one.
Op Safed Sagar. IAF pilots faced great difficulty in going through flying circuit to attack Munthodhalo due to its close proximity to LoC. Air Chief Tipnis & rest of COSC, sought permission to fly through Pakistani territory. It was rejected by CCS on grounds of 'escalation'. 1/2
दिल्ली से चलकर डिब्रूगढ़ जाने वाली राजधानी ट्रेन यूपी के प्रतापगढ़ से होकर गुजरती है, लेकिन वहां रुकती नहीं है।
इस वजह से दिल्ली की यात्रा करने वाले यात्रियों को कम अवधि की ट्रेन पकड़ने के लिए या तो इलाहाबाद जाना पड़ता है या फिर लखनऊ।
राज्यसभा में प्रतापगढ़ से आने वाले तीन सांसद हैं और लोकसभा में दो सांसद हैं। इन सभी के अलावा, कई और लोगों को दिल्ली तक ट्रेन से यात्रा करनी होती है।
मेरा सरकार से अनुरोध है कि दिल्ली से डिब्रूगढ़ जाने वाली (20504) और डिब्रूगढ़ से दिल्ली आने वाली (20503) अप-डाउन राजधानी ट्रेन का प्रतापगढ़ स्टेशन पर 2 मिनट का स्टॉपेज दिया जाए।
हम नई राजधानी ट्रेन नहीं मांग रहे हैं, बल्कि दशकों से चल रही ट्रेन का स्टॉपेज मांग रहे हैं, ताकि यात्रियों को यात्रा में आसानी हो।
: राज्य सभा में @ShayarImran जी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज और अमन चोपड़ा @AmanChopra_ के मध्य बातचीत का पॉडकास्ट देखा। अमन चोपड़ा की तैयारी, विनम्रता और वाकपटुता की प्रशंसा किए बिना नहीं रहा जा सकता। वह इस तैयारी से गए थे कि स्वामी जी को निरुत्तर कर देंगे। स्वामी जी भी विद्वान और प्रगल्भ व्यक्ति हैं। उनकी अपनी पक्षधरता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से उनकी खुन्नस है। इस खुन्नस में वह उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जी के पक्ष में बल्लेबाजी कर रहे हैं। इस बिंदु पर अमन चोपड़ा भारी पड़े हैं। अमन चोपड़ा को पत्रकार रहकर निष्पक्ष रहना है लेकिन निष्पक्ष रहने के बहुत फायदे हैं। वह प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की असफलता को झट से स्वीकार कर लेते हैं लेकिन स्वामी जी प्रतिपक्षियों के नकारेपन को नहीं।
यहीं अमन चोपड़ा उनपर हावी हैं।
यह पॉडकास्ट देखने लायक है। शंकराचार्य जी महाराज का आक्रोशित होना, उनके शिष्यों का उद्वेलित होना और अमन चोपड़ा का कूल रहना, इस पॉडकास्ट की विशेषता है। अमन चोपड़ा जितने विनम्र दिखे हैं, वह उतने ही दृढ़ हैं। अडिग। यह उन्हें एक मंजा हुआ पत्रकार बनाती है।
असली इंटरव्यू यही है। वह नहीं कि समोसा कैसा लगा! जिलेबी कैसी है? वह भी नहीं कि आम काटकर खाते हैं या चूसकर।