अनुपम खेर के तीखे सवाल सुनकर सुप्रीम कोर्ट के “जजों” का माथा ठनका..!
तीन तलाक पर सुनवाई से पहले ही कहा गयाः
“अगर" 'तीन तलाक' का मामला इस्लाम धर्म का हुआ, तो उसमें हम दखल नहीं देंगे।"
अगर आप धर्म के मामले में दखल नहीं देना चाहते, तो हिंन्दुओं के मामलों में दखल क्यों देते हैं? क्या हिंन्दू धर्म आपको धर्म नहीं लगता या मुसलमानों की धमकियों से डरते हैं?
अनुपम खेर ने उठाए कई अहम सवालः
राम मंदिर को क्यों नहीं मानते ?
गो हत्या पर चुप्पी क्यों?
जल्लिकट्टू पर रोक, लेकिन बकरीद की कुर्बानी क्यों मंजूर ?
दही हांडी खतरनाक, लेकिन तलवारबाजी धार्मिक ?
शिवजी पर दूध चढ़ाना बर्बादी, लेकिन मजार पर चादर चढ़ाना सही?
बुर्का धर्म का हिस्सा, लेकिन पर्दा प्रथा सामाजिक बुराई ?
हम दो हमारे दो परिवार नियोजन, लेकिन अधिक बच्चे अल्लाह की नियामत ?
भारत तेरे टुकड़े कहना अभिव्यक्ति की आजादी ?
सैनिकों पर पत्थर फेंकने वाले भटके हुए नौजवान ?
जवाब तो सुप्रीम कोर्ट को भी देना ही होगा
वो कोई कानून और संविधान से ऊपर नहीं हैं ।
पक्का प्रॉमिस के सहारे यूके से वापस हो जाएगी वामपंथन नताशा नरवाल?
दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में पुलिस पर हमले के लिए बांटा था मिर्च पाउडर, दंगों की प्लानिंग में थी शामिल!
जानिए कोर्ट ने क्यों दी नरवाल को UK जाने की परमिशन, @rupamjournalist
यह मामला मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम का है।
विकास अपने बीमार फौजी पिता को इलाज के लिए मेदांता लेकर गए थे, जिन्होंने कारगिल युद्ध, 1999 में देश के लिए दुश्मनों से लोहा लिया था,
विकास बताते है, मैं पैनल के द्वारा पिता का इलाज कराने अस्पताल लाया था,
अस्पताल को पैनल के जरिए जो फीस काटनी थी उन्होंने नॉर्मल फीस काट ली,
नॉर्मल फीस काटने के बाद कह रहे है की अन्डरटेकिंग भी देनी होगी, इसके लिए दबाव डालने लगे,
स्टाफ के लोग उनके साथ बदतमीजी करने लगे और उसके बाद उठकर चले गए,
जबकि विकास कह रहे है कि जब मैंने नॉर्मल फीस दी है और पैनल की सुविधा नहीं ले रहे है तो फिर कैसी अन्डरटेकिंग देनी होगी,
नियमानुसार, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को सरकारी स्वास्थ्य पैनल के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए,
आरोप है कि मेदांता हॉस्पिटल ने इस पैनल को स्वीकार करने से मना कर दिया,
एक कारगिल वॉरियर के बेटे का यह दर्द आज हर सच्चे देशभक्त को सोचने पर मजबूर कर रहा है,
यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि देश के लाखों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का दर्द है, जो रिटायरमेंट के बाद इलाज जैसी बुनियादी जरूरत के लिए इन बड़े अस्पतालों के चक्कर काटते हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत जो रूस से तेल खरीद रहा है और हमने जो उसे पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पेश किया था उसे हम वापस लेते हैं अब हम भारत पर कोई टैरिफ नहीं लगाएंगे
याद करिए अमेरिका ने पूरे डेढ़ साल तक टैरिफ टैरिफ का धुन बजाया और अमेरिका के धुन पर कांग्रेसी कुत्ते पप्पू चरसी लहंगा और चोली पहनकर ठुमके लगा रहे थे नरेंदर सरेंडर चिल्ला रहे थे
भारत ने हर बार अमेरिका को कड़ा जवाब दिया की कुतरे तेरे से जो होता है करले हम डरने वाले नहीं
और भारत में दुनिया के तमाम देशों के साथ व्यापार समझौता किया और अमेरिका को पूरी तरह से बाईपास कर दिया
यहां तक की बीच में एक बार डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी से फोन पर बात किया तो मोदी जी ने शानदार डिप्लोमेसी खेलते हुए ट्वीट पर लिखा कि आज डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया था और हमारी 45 मिनट बात हुई
यानी दुनिया को बता दिया की ट्रंप ने हमको सामने से फोन किया है हमको इस कुत्रे को फोन करने की जरूरत नहीं है
और अंततः डोनाल्ड ट्रंप को समझ में आ गया यह मोदी है यह कांग्रेसी कुत्ते नहीं है जो अमेरिका की धमकियों के आगे सरेंडर तो छोड़िए अपना पैंट चड्डी खोलकर झुक जाते थे
आज कुछ कांग्रेसी चमचे और कांग्रेसियों के फेक टुकड़े पर पलने वाले पत्रकार बता रहे हैं कि मनमोहन सरकार में भारत इतना मजबूत होता था उतना मजबूत होता था ब्ला ब्ला ब्ला
अबे कांग्रेसी कुत्तों देख लो मनमोहन सरकार में भारत कितना मजबूत था
1:-पहले वीडियो में जब पत्रकार उस वक्त के गृह मंत्री पी चिदम्बरम से सवाल पूछ रहा है कि डेविड हेडली उर्फ दाऊद गिलानी पूरे मुंबई की 3 महीने तक रेकी करता रहा और आपकी गुप्तचर एजेंसीओ ने उस पर कोई नजर क्यों नहीं रखी ? तो पी चिदंबरम कह रहे थे कि वह गोरा चिट्टा आदमी था अमेरिकी पासपोर्ट रखता था अमेरिकी आदमी था तो हम उसको कैसे पकड़ते
यानी अमेरिका से मनमोहन सरकार इतनी डर रही थी कि अमेरिकी पासपोर्ट रखने वाले आतंकियों से पूछताछ की भी हिम्मत नहीं थी
2:-दूसरे वीडियो में मनमोहन सरकार के विदेश मंत्री एसएम कृष्ण के मुंह पर अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन दिल्ली में कह रही है कि मुझे भारत की मनमोहन सरकार ने पूरी तरह से आश्वस्त कर दिया है कि अब मनमोहन सरकार ईरान से एक बूंद तेल नहीं खरीदेगी और मैं भारत सरकार के इस निर्णय से अमेरिकी संसद को और अमेरिकी सरकार को अवगत करवा दिया है
यानी कि तब अमेरिका तय करता था कि भारत किस से डीजल पेट्रोल खरीदेगा किससे नहीं खरीदेगा
3:- तीसरी वीडियो में उस वक्त का गृह मंत्री कह रहा है की 26/ 11 मुंबई हमले के बाद हमारे ऊपर पाकिस्तान को करारा जवाब देने का बहुत दबाव था मैं खुद पाकिस्तान को करारा जवाब देना चाहता था लेकिन उसी वक्त अमेरिका की विदेश मंत्री कोंडालिजा राइस भारत आई और मुझे और मनमोहन सरकार को हड़काते हुए कहा की खबरदार अगर तूने पाकिस्तान की तरफ नजर उठा कर भी देखा इतना मारेंगे इतना मारेंगे कि तुम लोग याद रखोगे
और हम डर गए और हम लोग किसी खजेले कुत्ते की तरह दुम दबा लिए और उसके बाद मनमोहन सिंह ने मुझसे कहा कि चिदंबरम अब हम सिर्फ कड़ी निंदा करेंगे
संविधान खुद ही गृहयुद्ध मे बाधा बन गया है....
और एक बात हमें माननी होंगी कि संविधान बुरा नहीं है समस्या है कि हमें ये लगता है इसे अम्बेडकर ने लिखा है।
अम्बेडकर ने संविधान लिखा ये बात उतनी ही झूठ है जितनी कि गांधीजी महात्मा है।
अम्बेडकर संविधान की ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमेन थे, इनके अधीन एक टीम थी जो रिसर्च कर रही थी।
दुनिया भर के संविधान उठाकर रखे गए थे और तब हमने उनमे से कुछ अच्छाई निकाली, डॉ राजेंद्र प्रसाद ने ही उसमे अनगिनत संशोधन करवा दिये थे।
संविधान की मूल प्रति मे जहाँ अधिकारों की बात है उस पृष्ठ पर राम भगवान का पुष्पक विमान वाला चित्र है,
नीति निर्देशक वाले पेज पर कृष्ण और अर्जुन का, वित्त वाले पेज पर नटराज का और वाणिज्य वाले पेज पर खुद अयोध्या के महाराज भागीरथ का चित्र बना है।
ऐसे और 22 चित्र है जो चीखकर गवाही देते है कि भारत एक हिन्दुराष्ट्र है। अम्बेडकर ने धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़ने से साफ मना कर दिया था, क्योकि उनका मानना था कि ये तो वैसे ही भारत के समाज मे है।
भारत मे कभी रिजिम चेंज या तख्तापलट नहीं हो सका क्योंकि समय रहते संविधान निर्धारित हो गया, कौन सा सैनिक कहाँ पोस्ट पर होगा ये राजनाथ सिंह के ऑफिस से तय होता है ना कि सैन्य अधिकारी की मर्जी से।
इसलिए भारत मे सेना तख्तापलट नहीं कर सकती।
भीड़तंत्र भी इसलिये लागू नहीं हो सकता क्योंकि किसी भी व्यवस्था पर किसी का भी कब्जा नहीं है।
आज़ादी है लोग चीखते ही इतना है कि गुस्सा निकल जाने के लिए हमेशा स्पेस होता है, भीड़तंत्र बांग्लादेश या नेपाल मे होता है क्योंकि वहाँ संविधान बेहद कमजोर है।
गौर कीजिये तख्तापलट सिर्फ वही हो रहे है जो देश समय रहते अपना संविधान लागू नहीं कर सके।
भारत मे हमने पूरा समय लिया, 1947 मे आजादी मिली लेकिन हम अंग्रेजो का अधिराज्य बने रहे। पूरे ढाई साल बाद हमने अपना संविधान लागू किया और बड़ी शांति से किया।
इसलिये ज़ब कोई कहे कि बीजेपी संविधान बदलेंगी तो वो सबसे बड़ा मूर्ख है।
संविधान मे महज 2-5 प्रतिशत बदलाव की जरूरत है, जिन्हे इंदिरा गाँधी ने आपातकाल मे असंवैधानिक रूप से जोड़ दिया था।
जैसे संविधान से सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्द हटाने है क्योंकि भारत सेक्युलर नहीं है बल्कि हिन्दुराष्ट्र है और ये संविधान खुद बिना कहे कहता है।
मोहन भागवत बिल्कुल ठीक कहते है कि हिन्दुराष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है वो हम पहले से है।
प्रश्न है कि क्या भारत को हिन्दू राज्य घोषित किया जाए?
राष्ट्र और राज्य दो अलग शब्द है, अब समस्या ये है कि हिन्दू धर्म जीवित ही इसलिये है क्योंकि यह समय के साथ चलता रहा।
हिन्दू धर्म ने अब तक टेक्नोलॉजी और आधुनिकता का पूरा स्वागत किया, ऐसे मे हिन्दू धर्म को एक राज्य से जोड़ देने की कही वैसी क़ीमत ना चुकानी पड़े जैसी इतिहास मे कई सभ्यताओं ने चुकाई है।
हिन्दू राज्य एक चर्चा का विषय है मगर भारत एक हिन्दू राष्ट्र है इसमें कोई समझौता नहीं और ये खुद हमारा संविधान कहता है।
अंत मे रही बात अम्बेडकर की तो अम्बेडकर की इतनी हाईप वीपी सिंह के चक्कर मे है, ये दुष्ट वोट बैंक की एक नई इबारत ना लिखता तो आज अम्बेडकर का नाम महज वैसा ही होता जैसे अन्य चर्चित लोगो का है।
संविधान बनाने के लिए 22 समितियां थी और उनमे से अम्बेडकर ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष थे, मूल नेतृत्व डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था।
यदि किसी सवर्ण के मन मे संविधान को लेकर भ्रम है तो दूर कर ले क्योंकि राजेंद्र बाबू जाति के कायस्थ थे। इसलिए अगली बार कोई कहे कि सवर्ण संविधान बदलना चाहते है तो पेट पकड़ कर रखना ताकि हँसी ना छूट जाए।
अनुराग ठाकुर सही कहता है संविधान को ऐसे ऐसे मत लहराओ थोड़ा पढ़ भी लो।
ओ अंकिल
आज जो निजी क्षेत्र के 3 सबसे बड़े बैंक हैं यानी ICICI बैंक एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक यह तीनों कभी सरकारी हुआ करते थे लेकिन पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने इन्हें बेच दिया
आई सी आई सी का पूरा नाम इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया था ..यह भारत सरकार की ऐसी संस्था थी जो बड़े उद्योगों को लोन देती थी लेकिन एक झटके में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने इसका डिसइनवेस्टमेंट करके इसे प्राइवेट बना दिया और इसका नाम और आईसीआईसीआई बैंक हो गया
आज जो एचडीएफसी बैंक है उसका पूरा नाम हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया था यह भारत सरकार की एक ऐसी संस्था हुआ करती थी जो मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते ब्याज पर होम लोन देने का काम करती थी
नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने कहा सरकार का काम सिर्फ गवर्नेंस करना है होम लोन बेचना नही है
मनमोहन सिंह इसे जरूरी कदम बताते हैं और कहते हैं सरकार का काम सिर्फ सरकार चलाना है बैंक चलाना लोन देना नहीं
और एक झटके में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने एचडीएफसी बैंक को बेच दिया और यह निजी क्षेत्र का बैंक बन गया
इसी तरह की बेहद दिलचस्प कहानी एक्सिस बैंक की है
भारत सरकार की एक संस्था हुआ करती थी उसका नाम था यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया यह संस्था लघु बचत को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी यानी आप इसमें छोटे-छोटे रकम जमा कर सकते थे मनमोहन सरकार नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा की सरकार का काम चिटफंड की स्कीम चलाना नहीं है और एक झटके में इसे बेच दिया गया पहले इसका नाम यूटीआई बैंक हुआ और बाद में इसका नाम एक्सिस बैंक हो गया
इसी तरह आज आईडीबीआई बैंक है जो एक प्राइवेट बैंक है एक समय में यह भारत सरकार की संस्था हुआ करती थी जिसका नाम था इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया इसका भी काम उद्योगों को लोन देना था लेकिन मनमोहन सिंह ने इसे भी 60% बेच दिया था
अपनी यादाश्त को कमजोर न होने दो कभी
डिसइनवेस्टमेंट पॉलिसी को भारत में कौन लाया था जरा सर्च कर लो जब *नरसिंगा राव के समय में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे जब मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था मैक्सिमम गवर्नमेंट लेस गवर्नेंस उन्होंने कहा था कि सरकार का काम धंधा करना नहीं सरकार का काम गवर्नेंस देना है* ऐसा माहौल देना है कि लोग यह सब काम करें.
मनमोहन सिंह ने ही *सबसे पहले टोल टैक्स पॉलिसी लाई थी* यानी निजी कंपनियों द्वारा सड़क बनाओ और उन कंपनियों को टोल टैक्स वसूलने का परमिशन दो.
मनमोहन सिंह ने *सबसे पहले एयरपोर्ट की निजी करण* की शुरुआत की थी और सबसे पहला दिल्ली का *इंदिरा गांधी एयरपोर्ट को जीएमआर ग्रुप को* दिया गया.
आज चम्पक उछल उछल कर नाच नाच कर बेसुर रागा गाता फिर रहा है, "मोदी ने दोस्तो को बेच दिया..
मनमोहन सिंह करें तो - विनिवेश
मोदी करें तो - देश को बेचा .. !!!
2009-10 में मनमोहन सिंह ने 5 कंपनियां बेचीं
NHPC Ltd.-
OIL - ऑयल इंडिया लिमिटेड
एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
आरईसी - ग्रामीण विद्युतीकरण निगम
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
2010-11 में, मनमोहन सिंह ने 6 कंपनियाँ बेचीं!
एसजेवीएन - सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड
ईआईएल - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
CIL - कोल इंडिया लिमिटेड
पीजीसीआईएल - पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
MOIL - मैंगनीज अयस्क इंडिया लिमिटेड
एससीआई - शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया।
2011-12 में मनमोहन सिंह ने 2 कंपनियाँ बेचीं
पीएफसी - पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन।
ओएनजीसी - तेल और प्राकृतिक गैस निगम
2012-13 में, मनमोहन सिंह ने बेचीं 8 कंपनियां-
सेल - भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड
नाल्को - नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड
आरसीएफ - राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक
एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
OIL - ऑयल इंडिया लिमिटेड
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
HCL - हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
एनबीसीसी
👉 2013-14 में मनमोहन सिंह ने 12 कंपनियां बेचीं
एनएचपीसी - नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन
भेल - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
ईआईएल - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
सीपीएसई - सीपीएसई-एक्सचेंज ट्रेडेड फंड
PGCI - पावर ग्रिड कॉर्पोफ़ इंडिया लि।
एनएफएल - राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड
MMTC - धातु और खनिज व्यापार निगम
HCL - हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
आईटीडीसी - भारतीय पर्यटन विकास निगम
एसटीसी - स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन
एनएलसी - नेयली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन लिमिटेड
बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए कांग्रेस द्वारा प्रति व्यक्ति 6 से ₹10000 दिए गए थे। शर्त यह थी के कालाकोट पकड़ पहनकर उन्हें वकील दिखना होगा।
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जब ₹3000 आम आदमी लेता है तो वकील दिखने के लिए तो 6000 देना ही चाहिए। आखिर जॉर्ज का पैसा कब काम आएगा।
मेरे पास इनकम है, घर है, कार है, नौकरी है, व्यापार है, संपत्ति है। लेकिन वह तभी तक सुरक्षित है जब तक मेरा देश सुरक्षित है।
अगर देश देशद्रोहियों के हाथ में चला गया तो मेरी सारी संपत्ति या तो लूट ली जाएगी या आपके हवाले कर दी जाएगी।
यूक्रेन का उदाहरण दे दीजिए एक मूर्ख राष्ट्रपति के कारण आज 20 लाख यूक्रेनी पड़ोसी देशों में शरण लिए हुए हैं। पेट भरने के लिए लड़कियों को गलत काम करने पड़ रहे हैं। यूक्रेन के पड़ोसी बहुत अच्छे हैं। उन्होंने शरण दे दिया।
लेकिन आपके पास कौन से पड़ोसी हैं जो आपकी मदद करेंगे। पश्चिम में पैदायशी दुश्मन पाकिस्तान है, पूर्व में बांग्लादेश है, उत्तर में कम्युनिस्ट चीन है, गरीब नेपाल है, गरीब भूटान है, बर्बाद म्यांमार है। दक्षिण में समुद्र है।
जरा सोच कर देखिए बाहरी दुश्मनों और देश के भीतरी गद्दारों ने मिलकर अगर देश में तबाही ला दी तो सनातनी हिंदू कहां जाएंगे।
कई मामले में सरकार से हमारा विरोध हो सकता है, चुनाव में विरोध करेंगे भी लेकिन देश के साथ गद्दारी नहीं करेंगे। खूनी तख्तापलट नहीं होने देंगे। भारत को बांग्लादेश, और नेपाल नहीं होने देना है।
एकजुट हो जाइए। एक हो जाइए।
जब देश बचेगा तो आप और हम भी बचेंगे।
रूसी तेल-गैस खरीदने पर भारत समेत 5 देशों पर कोई टैरिफ नहीं', ट्रंप का बड़ा ऐलान
हाहाहा..... ये बहुत बढ़िया था गुरु.
डेढ़ साल खूब Tariff का गाना गाया... भारत पर जम कर Tariff लादा.... भारत ने कोई जवाब नहीं दिया.
विपक्ष ने खूब हल्ला गुल्ला किया.... Surrender नरेन्दर के नारे लगे.... Meme की बाढ़ आई.
फिर भारत ने काम से जवाब दिया...... Export Divert किया.... अमेरिका को जाने वाला सामान यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, middle east जाने लगा..... ढेरों देशों के साथ FTA किये....EU के साथ दुनिया की सबसे बड़ी डील की.
जहाँ विपक्ष कह रहा था कि लाखों नौकरियां ख़त्म होंगी.... उद्योग बंद होंगे.... यहाँ कोई नुकसान नहीं हुआ.
उधर अमेरिका में वहां के सुप्रीम कोर्ट ने इस Tariff को रद्दी की टोकरी में डाला.
ट्रम्प सरकार ने भारत पर tariff लगाने के लिए बकायदा कानून ही बना दिया.
और कमाल की बात है.. इस कानून बनाने के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका एक डील करता है रूस के साथ.... डीजल खरीदने की.
मतलब.... जिसके कारण यह सब सियापा किया ट्रम्प ने.... उसी की गोद में जा कर बैठ गए.
और आज ट्रम्प ने भारत समेत 5 देशों के लिए कहा है.. कि उन पर कोई रोक नहीं है... रूस से तेल लेने पर 🤣
चिचा... ओ सुनहरी जुल्फों वाले चिचा.
भारत पर रोक थी भी नहीं... तुम्हारे ये Restriction और Tariff की बत्ती बना कर वहीं डाल दी है भारत ने..... जहाँ पहले भारत 1 मिलियन बैरल per day के हिसाब से रूसी तेल लेता था...... तुम्हारे Tariff और Restriction की नौटंकी के बाद आज 2-2.5 मिलियन बेरेल per day के हिसाब से ले रहा है....... और उसी तेल को Refine करके यूरोप और अब अमेरिका को भी बेच रहा है.
बाकि surrender surrender का विधवा विलाप करने वालों... देख लो असली surrender 😂😂
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने ध्रुव राठी @dhruv_rathee के खिलाफ मानहानि के मामले में वारंट जारी किया
अब यह वारंट इंटरपोल के द्वारा पूरी दुनिया के एयरपोर्ट पर प्रसारित कर दिया जाएगा
यह मामला मुझसे भी जुड़ा हुआ है अब मैं आपको विस्तार से बताता हूं यह मामला क्या है
2014 से पहले कांग्रेस किसी भी तरह से मोदी जी को और बीजेपी को महिलाओं के बीच में बदनाम करना चाहती थी
और इसके लिए उन लोगों ने एक नॉरेटिव बनाया कि बीजेपी आईटी सेल हमेशा महिलाओं के खिलाफ रहती है और यह लोग गंदी-गंदी गालियां देते हैं जबकि भाजपा आईटी सेल में कौन-कौन है उनके पूरे नाम बाकायदा सार्वजनिक होते हैं वह कोई किसी से छुपा नहीं होता
लेकिन यह लोग किसी को भी बीजेपी आईटी सेल का बता देते हैं और इसके लिए पहले पत्रकार स्वती चतुर्वेदी से एक किताब लिखवाई गई उसे किताब में बीजेपी आईटी सेल को बदनाम किया गया
उस वक्त अन्ना आंदोलन और बाबा रामदेव के आंदोलन के समय मैं दिल्ली में था
शुरू में मुझे अन्ना आंदोलन इसलिए पसंद था क्योंकि यह कांग्रेस के खिलाफ था
हालांकि बहुत जल्द मुझे पता चल गया यह सब रंगे हुए सियार है और कांग्रेस के ही दलाल हैं
और उसी दरम्यान दिल्ली में मुझसे ध्रुव राठी ने संपर्क किया और बोला कि मैं आपका एक इंटरव्यू करना चाहता हूं जिसमें मैं आपको भाजपा आईटी सेल का बंदा बताऊंगा आपको उसे इंटरव्यू के लिए काफी पैसे भी मैं दूंगा लेकिन शर्त यह है की पूरी स्क्रिप्ट हमारी होगी
मतलब की आपको ये बोलना है कि आपको भाजपा के द्वारा गंदी-गंदी गालियां लिखकर दे दी जाती हैं आपको भाजपा के द्वारा कौन-कौन सी महिला को कौन-कौन सी महिला पत्रकार को महिला नेत्री को टारगेट करना है वह दे दिया जाता है और गंदी-गंदी गालियां सब दे दी जाती है
तो मैंने सीधे पूछा कि आप इसके लिए मेरा इंटरव्यू क्यों चाहते हैं ? मैं तो बीजेपी आईटी सेल में हूं ही नहीं
तो ध्रुव राठी और उसके साथ के लोगो ने कहा कि चूंकि आपकी कई फोटो मोदी जी के साथ है उस वक्त मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन लोगों ने बोला कि इससे लोग आसानी से विश्वास कर लेंगे और हमारा जो उद्देश्य है वह पूरा हो जाएगा आप पैसा बोलिए आप कितना पैसा लेंगे??
तो मैं सीधे कहा कि भाई दुनिया के किसी टकसाल में वह नोट छपा ही नहीं है जो जेपी सिंह को खरीद सके मैं अपनी मनमर्जी से लिखता हूं बचपन से शिशु मंदिर के स्कूल में पढ़ा हूं मेरे दादाजी अयोध्या के कलेक्टर रहे नैयर साहब की कहानी बचपन में मुझे सुनाते थे कि कैसे उन्होंने राम मंदिर के लिए क्या-क्या किया मुझे बचपन से यह सब बताया गया है कि कांग्रेस ने कैसे हिंदुओं का नरसंहार किया और जिस वक्त भारत के 80 परसेंट लोगों को पता नहीं होगा कि भगवान राम ताले में बंद है तो उसे वक्त हमें बचपन से यह बताया गया कि हमारे आराध्य भगवान राम ताले में बंद है तो मैं ऐसी विचारधारा का आदमी हूं कि कांग्रेस को जिंदगी में वोट देने की कल्पना तक नहीं कर सकता और अगर गलती से मेरी उंगली ईवीएम पर कांग्रेस के निशान को टच कर गई तो घर आकर अपनी उंगली काट दूंगा
फिर वह लोग समझ गए कि यह बंदा पैसे से बिकने वाला नहीं है तो चले गए
उसके कुछ महीने बाद मैंने देखा कि ध्रुव राठी ने एक बंदे का इंटरव्यू किया और उसे बीजेपी आईटी सेल का बताया और वही सारी बातें उसमें बोली गई कि हमको ऊपर से गालियां दे दी जाती हैं मतलब उन लोगों ने जो जो मेरे से बोलने को कहा था वह सारा बात वह व्यक्ति बोल रहा था और उसमें विकास पांडे जी @MODIfiedVikas का भी नाम यह लोग बार-बार ले रहे थे कि कैसे विकास पांडे इस गैंग के मास्टरमाइंड है
और मुझे सबसे बड़ा आश्चर्य उस इंटरव्यू के वीडियो को अरविंद केजरीवाल प्रशांत भूषण राहुल गांधी सहित विपक्ष का पूरा इकोसिस्टम ट्वीट किया और कोट करके लिखा कि यह आप लोग जरूर देखिए यह तो हिला देने वाला खुलासा है
जबकि वह पूरा झूठ था
उसके बाद विकास पांडे ने कोर्ट में मानहानि का क्रिमिनल केस किया जो व्यक्ति इंटरव्यू में यह सब बातें बोल रहा था उसका खुद का कहना है की ध्रुव राठी में पैसे देकर मुझे यह सब बुलवाया और अब जब मैं मुसीबत में हूं तो ध्रुव राठी और उनकी पूरी गैंग मेरा साथ छोड़ दिए मुझे अकेले यह मुकदमा लड़ना पड़ रहा है
और उस मुकदमे में ध्रुव राठी को भी अभियुक्त बनाया गया था ध्रुव राठी को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखना है लेकिन ध्रुव राठी 6 बार सम्मन भेजे जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हो रहा है और अब उसके खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए गए हैं
तिरंगे के नाम पर नौटंकी और झूठ फैलाने का आरोप: कॉकरोच पार्टी का असली चेहरा बेनकाब! 🇮🇳
दिल्ली में कॉकरोच पार्टी की तिरंगा यात्रा के दौरान जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया।
आम आदमी पार्टी के नेता बार-बार यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं कि देश में तिरंगा लहराना जुर्म हो गया है, लेकिन दिल्ली पुलिस के खुलासे ने इनके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि कनॉट प्लेस में इस कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति ली ही नहीं गई थी।
अभिजीत दीपके को तिरंगा फहराने के लिए नहीं, बल्कि उनके पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और कार्यक्रम में हिंसा व हंगामा भड़कने की आशंका के कारण हिरासत में लिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ संजय सिंह खुद सुबह और शाम, दोनों समय सफलतापूर्वक तिरंगा यात्रा निकालने का दावा करते हैं, तो दूसरी तरफ विक्टिम कार्ड खेलते हुए कहते हैं कि तिरंगा फहराना मना है।
तिरंगा हर भारतवासी के दिल में बसा है और इसका पूरा सम्मान है, लेकिन तिरंगे की आड़ में राजनीति करने और हंगामा मचाने की इजाज़त किसी को नहीं दी जाएगी!
देखिए, ये विस्तृत रिपोर्ट… ⬇️
Protest में अपने आपको ‘स्वतंत्र पत्रकार’ कहने वाले Content Creators/YouTubers उर्फ़ रीलबाज़ पैसा लेकर किसी भी पार्टी के लिए वीडियो बनाने के लिए तैयार हैं।
सबसे बड़ा Under Cover Investigation जो आपकी आँखें खोल देगा।
पत्रकार या रीलबाज़ ?
बड़े आए "Regime Change" करने वाले !!
कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है!
Indian youth are not fools, they will build India, not destroy India.
All genuine Indian youth are winning medals, steering in skilling, innovation, startups, technology & becoming cultural icons!
कंटेंट क्रिएटर प्रोटेस्ट के समय कैसे बन जाते हैं स्वघोषित जर्नलिस्ट?
शिवानी गौतम वाली टूलकिट एक्सपोज; हफ़्ता भर पहले बनी कंपनी से बनवाया प्रेस कार्ड
पुलिस को धमकाने वाली गैंग की असलियत बता रही हैं @pujaranaa
भारत में जो लोग खून खराब करना चाहते हैं जो सड़कों पर लाश देखना चाहते हैं उनके खिलाफ कारवाई कब होगी?
अर्णब गोस्वामी का सटीक विश्लेषण
दूसरा सबूत चिंताजनक है, जहाँ प्रशांत भूषण, जो फुल-टाइम ट्रोल और पार्ट-टाइम वकील हैं,
एक वीडियो कॉल पर कहते हैं जिसे रिकॉर्ड किया गया है। सबूत बहुत मजबूत हैं, उनके खिलाफ सबूत मौजूद हैं।
यह बातचीत वह राष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने दलाल कुणाल कामरा के साथ कर रहे हैं.
(ऑडियो कॉल की बातचीत): "अब कैसा देखते हैं?
Problem ये है ना कि देखो और हमारे पास options क्या हैं?
Options तो यही हैं कि भई हम revolution के through कुछ करा लें। अब उस revolution में तो बहुत खून खराबा होएगा क्योंकि ये लोग तो अभी तो पुलिस इस्तेमाल कर रहे हैं, paramilitary, अभी इन लोगों ने guns वग़ैरह नहीं इस्तेमाल करी हैं, पर वो सब भी करेंगे, Army को भी बुला सकते हैं।"
वह कहते हैं कि हमारे पास क्या विकल्प है? हमें एक क्रांति करनी होगी
और फिर बहुत खून-खराबा होगा जिसका मतलब है कि भारी रक्तपात होगा, फिर वह कहते हैं कि सेना बाहर आएगी और ऐसा ही होने वाला है.
अब देवियों और सज्जनों, यदि यहाँ एक ऐसा व्यक्ति है, जो राहुल गांधी का जाना-माना सलाहकार और समर्थक है, जो कह रहा है कि रक्तपात अपरिहार्य है.
मैं आज रात आपसे पूछता हूँ, उन सभी मेहनती, संभ्रांत भारतीयों से जो यह कार्यक्रम देख रहे हैं, हम दफ्तर जाते हैं, क्या हमें खून-खराबे की जरूरत है?
हमारे बच्चे स्कूल जाते हैं, क्या हमें खून-खराबे की जरूरत है?
हमें अस्पताल जाना होता है, हमें अपना दैनिक जीवन जीना है, यह देश 7 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, हम बहुत अच्छा कर रहे हैं.
पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है और हर कोई कह रहा है कि भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन प्रशांत भूषण जैसे लोग, जो अपने स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन का चुनाव भी नहीं जीत सकते,
वह कह रहे हैं कि भारत में खून-खराबा होगा। क्या आप इसकी अनुमति देंगे?
प्रशांत भूषण, मैं आपको बता दूं, आप हारने वाले हैं, आप जैसे लोग राष्ट्रीय हित के खिलाफ हैं, आप देशद्रोही हैं.
आप हारने वाले हैं, आप बेनकाब होने वाले हैं, आप एक विफल व्यक्ति हैं और इस देश में रक्तपात के जरिए क्रांति भड़काने के आपके प्रयास में आप पूरी तरह असफल रहेंगे.
और क्रांति? यह आदमी?
यह एक अमीर आदमी है, प्रशांत भूषण। वामपंथी भाषा बोल रहे हैं,
मैं अपना मुंह बंद रखता हूँ, मैं प्रशांत भूषण के बारे में और कुछ नहीं कहूंगा, वरना इस आदमी के बारे में कहने के लिए बहुत कुछ है.
खास तौर पर, कश्मीर पर उनका और अरुंधति रॉय का रुख जानिए। ये लोग भरोसे के लायक नहीं हैं. वैसे भी कोई उन पर भरोसा नहीं करता, लेकिन मैंने यह कह दिया.
ये आंदोलन खत्म क्यों नहीं होगा, इसका जवाब अब साफ है। क्योंकि ये आंदोलन रहा ही नहीं, ये धंधा बन गया है। और धंधा कोई खुद खत्म नहीं करता।
पहले आंदोलन इसलिए होते थे कि सरकार सुने। अब आंदोलन इसलिए होते हैं कि एल्गोरिदम सुने। सरकार सुने न सुने, व्यू आना चाहिए, फॉलोवर बढ़ना चाहिए।
इस नए धंधे का मॉडल बहुत सिंपल है।
लागत लगभग जीरो है। एक माइक, एक प्रेस लिखा कार्ड जो खुद ही छपवा लो, और एक नारा जो हर बार काम करता है, संविधान खतरे में है।
मार्केटिंग फ्री है। गाली गलौच को दिखाओ, अराजकता बताओ, लोकतंत्र खत्म, संविधान खत्म बताओ, इसके बाद भीड़ ही कैमरा बन जाती है, भीड़ ही उस वीडियो को वायरल कर देती है। आपको कुछ करने की जरूरत नहीं।
और मोनेटाइजेशन पक्का है। एक बार वीडियो वायरल, फॉलोवर आए, फॉलोवर आए तो फिर मेल आएंगे - पार्टी के लिए रील बना दो, पैसे देंगे। दिन में क्रांति, रात में बिलिंग।
इसीलिए ये खत्म नहीं होगा। आप सोचते हैं ठंड बढ़ेगी तो चले जाएंगे, पुलिस हटाएगी तो चले जाएंगे, कोर्ट डांटेगा तो चले जाएंगे। नहीं जाएंगे।
ये छात्र नहीं हैं कि नौकरी मिलते ही चले जाएंगे, ये किसान नहीं हैं कि फसल कटते ही चले जाएंगे। ये कंटेंट क्रिएटर हैं। इनके लिए जंतर-मंतर ही ऑफिस है।
बेंगलुरु के स्टार्टअप की तरह - प्रॉफिट हो न हो, हर दिन फंडिंग के लिए नया पिच। जब तक दर्शक रुक कर देखेगा, तब तक ये धंधा चलता रहेगा।
पत्रकारिता का रेट कार्ड देख लीजिए, इसके बाद सोचिए कि इस आंदोलन में शामिल कॉकरोच, कम्युनिस्ट और भाड़े की भीड़ का रेट कार्ड क्या होगा?
यहाँ मैं एक और बात कहना चाहूँगा। जब उन्होंने कैप्टन स्मित मछार के बारे में बोला है, तो आज मैं आपके दर्शकों से कहता हूँ कि इस देश में दो विचारधाराएँ हैं। एक वो है, जो हम्माम अल-हमामी के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोलती।
कैप्टन स्मित मछार के पक्ष में कांग्रेस के प्रथम परिवार का एक शब्द नहीं आया, जो गाजा पर इतना गमजदा था। सीडब्ल्यूसी का प्रस्ताव 19 अक्टूबर 2023 को आया, राहुल गांधी का ट्वीट आया कि क्राइम अगेंस्ट ह्यूमैनिटी हो रहा है। उसके बाद अनेक अवसरों पर सोनिया गांधी जी के अखबारों में आर्टिकल आए, पर कैप्टन स्मित मच्छर पर एक भी शब्द नहीं। क्यों?
देखिए, दो प्रकार के पायलट हैं। एक हैं कैप्टन हमाम अल-हमामी, जो सही दिशा में ले जा रहे प्लेन के पायलट पर कुल्हाड़ी से अटैक करना चाहते हैं और प्लेन को क्रैश कराना चाहता हैं। उसी प्रकार इस देश में भी वो विचारधारा है, जो कुल्हाड़ी से भारतीय समाज और विशेषकर हिंदू समाज को टुकड़े-टुकड़े में करना चाहती है। कभी क्षेत्र के नाम पर, कभी प्रांत के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर, कभी जाति के नाम पर कुल्हाड़ी चलाकर टुकड़े करके प्लेन को क्रैश करना चाह रही है। और दूसरे के प्रतीक तो इसके प्रतीक हैं विपक्ष के नेता।
इसको शब्दशः न लिया जाए, प्रतीकात्मक रूप में वो राहुल गांधी और उनके समकक्ष नेता हैं। क्योंकि इसीलिए वे कैप्टन स्मित मछार के पक्ष में नहीं बोल रहे हैं
दूसरी तरफ, कैप्टन स्मित मछार का विचार क्या है? अपने ऊपर आघात सहकर भी श्री हनुमान चालीसा का जाप करते हुए उस जहाज को बचा रहा है। उस विचार के प्रतिनिधि हम लोग और हमारे नेता मोदी जी हैं।
ये दो पायलटों की लड़ाई है। एक पायलट जो जहाज को क्रैश करवाना चाहता है, किसी तरीके से भारत क्रैश हो जाए।
किसी भी प्रकार से किसी भी विशाल को लेकर भारत में भ्रम और अराजक उत्पन्न हो जाए यह प्रचार कर दो या ब्रह्म फैला दो कि भारत की अर्थव्यवस्था खराब हो जाए, सेना पर आक्षेप लगा दो, HAL, LIC, वैक्सीन, EVM—अब आप ये कहो कि इलेक्टोरल रोल, किसी भी चीज को लेकर कैसे भी ले जाकर प्लेन को क्रैश कराना है। और दूसरा पायलट हैं मोदी जी, जो अपने ऊपर आघात सहकर भी उसकी सेफ लैंडिंग करवाने के लिए ले जा रहे हैं।
सोमवार को राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 11 याचिका दायर की गईं।
याचिकाकर्ता नेताओं ने छल प्रपंच कर सुप्रीम कोर्ट क्या देश के 145 करोड़ नागरिकों को धोखा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जरा पढ़ तो लीजिए, आप अपने सिर के बाल नोंच लेंगे।
1- उन याचिकाओं के साथ वकालतनामा नहीं लगाया गया ।
2-अदालत की फीस में 220 रुपये कम जमा की गई।
3-कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधार कार्ड की ऐसी फोटोकॉपी संलग्न की गई थी, जिसे पढ़ा नहीं जा सकता ।
4-याचिका के साथ कुछ आवश्यक कानूनी दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए ।
5-फॉर्म में प्रतिवादी के नाम में गलती मिली।
6- कुछ याचिकाकर्ताओं के पते आधे अधूरे और गलत ।
7- याचिका के साथ किसी पुराने संबंधित फैसले की कॉपी संलग्न नहीं की गई ।
8-इसके अलावा छपाई और प्रिंट की इतना खराब था जिसे पढ़ने में समस्या भी सामने आई।
9-दो महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट की कलर कॉपी जमा नहीं की गई।
10-याचिका के पन्नों पर क्रम गलत लिखा था।
11-क्षेत्रीय भाषा में शामिल किए गए कुछ पन्नों का अनुवाद याचिका के साथ नहीं दिया गया।
प्रश्न यह है कि याचिका में सब कुछ गलत था तो सही क्या था?
अब फैसला खुद कर लीजिए गठबंधन एक याचिका सही से दाखिल नहीं कर सके, उनके हाथ में देश आ जाए तो देश का क्या हाल बनाएंगे।
यह धोखाधड़ी अक्षम्य है। यह अनर्गल याचिकाएं रद्द होनी चाहिए।
#SupremecourtOfIndia
@ECISVEEP
आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 12.10.2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर हुए उपद्रव के संबंध में अधिवक्ता दिगंत मिश्रा, दिव्यांश बिष्ट व अन्य द्वारा दायर रिट याचिका (AOR: उत्कर्ष जायसवाल) का उल्लेख (mention) किया। मामले की सुनवाई 15.10.2026 को तय की गई है।
प्रमुख मांगें:
• न्याय व्यवस्था में बाधा डालने वाले राजनीतिक नेताओं पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई
• न्यायालय परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध
• अदालतों के आसपास विरोध-प्रदर्शनों को नियंत्रित करने हेतु निष्पक्ष नियम
• CCTV फुटेज और सुरक्षा रिकॉर्ड का संरक्षण
• विचाराधीन मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए दिशा-निर्देश
अदालतें न्याय के मंदिर हैं, राजनीतिक अखाड़ा नहीं।
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