भाजपा द्वारा छत्तीसगढ़ में बिहार स्थापना दिवस मनाने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। क्या बिहार में भी छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस मनाया जाता है? यदि नहीं, तो छत्तीसगढ़ में बिहार स्थापना दिवस मनाने का क्या औचित्य है? यह निर्णय कहीं न कहीं क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय संस्कृति की उपेक्षा का प्रतीक प्रतीत होता है।
छत्तीसगढ़ की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, जिसका उत्सव मनाना यहां की सरकार और राजनीतिक दलों की प्राथमिकता होनी चाहिए। मगर जब अपने राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को नजरअंदाज कर दूसरे राज्य का स्थापना दिवस मनाया जाता है, तो यह स्थानीय जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
सवाल यह भी उठता है कि क्या यह वोट बैंक की राजनीति है? क्या यह राज्य की राजनीतिक आत्मनिर्भरता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाता? छत्तीसगढ़ को अपनी संस्कृति और पहचान को महत्व देना चाहिए, न कि बाहरी राजनीतिक समीकरणों के तहत अपनी अस्मिता को दरकिनार करना चाहिए।
#Chhattisgarh
उत्तरप्रदेश के फतेहपुर में दो मालगाड़ियो के टकराकर भीषण रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना दुःखद है। रेलवे में कर्मचारियों की कमी के कारण प्रबंधन की व्यवस्था कमजोर हो गई है, इसलिए लगातार रेलवे हादसे बढ़ रहे है। जानकारी के लिए बता दूं कि रेलवे में 3 लाख रिक्त पद है। #TrainAccident
मंडल बिका है, मीणा नहीं। बाबा साहाब अम्बेडकर के अपमान को किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं करूंगा। अमित शाह की परछाई को भी बहुजन समाज से माफी मांगनी पड़ेगी। #तड़ीपार_माफ़ी_मांग
सरस्वती मन्नाडे जो आरोप पुलिस पर लगा रही है वह सामान्य आरोप नहीं है। Vishnu Deo Sai जी इनका नार्को टेस्ट करवाइए अगर सरस्वती मन्नाडे जी के आरोप सही होगी तो तत्काल एसआईटी गठित कर मामले की जांच करवाइए ताकि कोई निर्दोष बेवजह जेल में बंद ना रहे।
@bhupeshbaghel@vishnudsai
नगीना लोकसभा सांसद Chandra Shekhar Aazad जी आज संसद भवन नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार कांड में भाजपा शासित छत्तीसगढ़ की सरकार द्वारा सतनामियों पर दमनात्मक तरीके से की गई कार्रवाई को लेकर संसद परिसर में तख्ती लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
लोहारीडीह में राहत मिल सकती है लेकिन बलौदा बाजार कांड में हमारे सतनामी भाइयों को क्यों नहीं ?
लोहारीडीह कांड में 23 लोगो को राहत मिली जमानत, हत्या और आगजनी मामले में जेल में थे बंद
@bhupeshbaghel@Gururudrakumar@drshivdahariya
https://t.co/2pF6tNyXps
लोहारीडीह में राहत मिल सकती है लेकिन हमारे सतनामी भाइयों को क्यों नहीं ?
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दंगे न रोक पाने वाली सरकार अगर @RahulGandhi जी, को रोक कर अपनी कामयाबी समझती है, तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है। सत्ता का दुरुपयोग कर जनता की आवाज को दबाना, देश और संविधान को कमजोर करने का प्रयास है।
किसान नेता राकेश टिकैत का हिरासत में से थाने से चकमा देकर निकलना और पुलिस का उनके पीछे भागना हमें ब्रिटिश हुकूमत के दौर की याद दिलाता है, जब सरकारें जनता की आवाज़ को कुचलने के लिए हरसंभव कोशिश करती थीं। मौजूदा हालात में भी किसानों के प्रति सरकार और प्रशासन का तानाशाही रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है। यह स्थिति न केवल किसानों की आवाज़ को दबाने का असफल प्रयास है, बल्कि सरकार के अहंकारी रवैये को भी उजागर करती है। आज, जब संवाद और समाधान की जरूरत है, ऐसी हरकतें लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं। इतिहास गवाह है कि जनता की एकजुटता के सामने कोई सत्ता टिक नहीं सकती। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सर्वोपरि है, और इसे नजरअंदाज करना देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।