जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
"A person married under the Indian Christian Marriage Act cannot claim the Scheduled Caste (SC) quota, as they would thereafter be considered a Christian, and their native religion would be deemed to have been automatically renounced." ~ Madras High Court.
Year 1970 – Give your college seats
Year 1990 – Give your government jobs
Year 2025 – Give your private jobs
Year 2035 – Give your land and wealth
Year 2045 – Give your daughters
Year 2055 - Leave this country
Silence often leads to your end !
▪ Gwalior HC में जबरन Ambedkar की मूर्ति लगाने की कोशिश
▪ Lucknow में चाय वाले शर्मा जी को प्रताड़ित किया, दुकान पर जबरन फोटो लगाई
▪ Gaya में दुकानदार को जय भीम बुलवाया, मना किया तो SC/ST एक्ट की धमकी
क्या ये लोग सच में पीड़ित हैं? अगर हम अब भी नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी
We have not learned from our past mistakes. The early ceasefire is a missed opportunity.
Now, at the very least, India should not reinstate the Indus Water Treaty.
100 हिंदू परिवारों के बीच में एक मुस्लिम परिवार सुरक्षित रहता है...
लेकिन 100 मुस्लिम परिवारों के बीच में 50 हिंदू परिवार सुरक्षित नहीं रह सकते हैं...
बांग्लादेश इसका उदाहरण है।