लगभग 32 साल उम्र होने को है,इसमें से कई वर्ष चिंता और ओवरथींकिंग में ही गुज़र गए,समय का कोई अता पता नहीं चला,खैर!... मेहनत जारी है और मुकाम दूर कभी-कभी तो लगता है सबकुछ छोड़ कर कहीं दूर भाग जाऊं पंरतु खुद से भागना भी तो नामुमकिन है...!
मेरे जैसे लोग सिर्फ स्वप्न देख सकते है,पर उन्हें जी नहीं सकते वह प्रेम कर सकते है,पर उस प्रेम को पा नहीं सकते,हम सिर्फ कल्पनाओं में जीते है और वास्तविकता में मर जाते है...!
मेरे जैसे लोग सिर्फ स्वप्न देख सकते है,पर उन्हें जी नहीं सकते वह प्रेम कर सकते है,पर उस प्रेम को पा नहीं सकते,हम सिर्फ कल्पनाओं में जीते है और वास्तविकता में मर जाते है...!
ये रात मैंने हमेशा के लिए तुम्हारे नाम कर दि,तुम नासही पर मैं आज भी एकांत में आकर इसे जी भरकर देखता हूं,स्वयं से बातें करता हु और कभी-कभी सवाल भी करता हूँ कि आखिर ऐसा क्या हुँआ जो अब तुम नहीं हो और ये रात कहती हैं प्यारे इंतजार और फिर मैं इंतजार करने लग जाता हूँ,तुम्हारे आने का.!
ये रात मैंने हमेशा के लिए तुम्हारे नाम कर दि,तुम नासही पर मैं आज भी एकांत में आकर इसे जी भरकर देखता हूं,स्वयं से बातें करता हु और कभी-कभी सवाल भी करता हूँ कि आखिर ऐसा क्या हुँआ जो अब तुम नहीं हो और ये रात कहती हैं प्यारे इंतजार और फिर मैं इंतजार करने लग जाता हूँ,तुम्हारे आने का.!
कैसा जुल्म है ये जो बातें मुझे तुमसे अकेले में कहनी चाहिए थी उसे मैं सरेआम अज्ञात के रूप मे लिख रहा हूँ और तो और उसपे भी बड़ा जुल्म ये है कि मुझे मालूम भी नही कि तुम यह सब पढ़ती भी हो या नही...!
कैसा जुल्म है ये जो बातें मुझे तुमसे अकेले में कहनी चाहिए थी उसे मैं सरेआम अज्ञात के रूप मे लिख रहा हूँ और तो और उसपे भी बड़ा जुल्म ये है कि मुझे मालूम भी नही कि तुम यह सब पढ़ती भी हो या नही...!
कभी महसूस किया है एहसास का मरना वो एहसास जो कभी तुम्हारे जीवित होने का प्रमाण थे, जिन्हें महसूस करना ज़िन्दगी के सबसे सुंदर पल हुआ करते थे उन एहसासों के मर जाने के बाद ली गयी हर एक साँस सिर्फ और सिर्फ़ मौत का इंतज़ार करने जैसी लगती है,खैर!... वो मौत जिससे पहले डरते थे अब नही...!
कभी महसूस किया है एहसास का मरना वो एहसास जो कभी तुम्हारे जीवित होने का प्रमाण थे, जिन्हें महसूस करना ज़िन्दगी के सबसे सुंदर पल हुआ करते थे उन एहसासों के मर जाने के बाद ली गयी हर एक साँस सिर्फ और सिर्फ़ मौत का इंतज़ार करने जैसी लगती है,खैर!... वो मौत जिससे पहले डरते थे अब नही...!
लोगो के व्यूज़ पढ़ने और न्यूज़ देखने में प्रॉब्लम ये है कि आप बाते जानना शुरू कर देते है,फिर समझना और उसके बाद किसी न किसी निष्कर्ष पर पहोचना चाहते है...!
लोगो के व्यूज़ पढ़ने और न्यूज़ देखने में प्रॉब्लम ये है कि आप बाते जानना शुरू कर देते है,फिर समझना और उसके बाद किसी न किसी निष्कर्ष पर पहोचना चाहते है...!
रात में अचानक भीतर कहीं अचेतन मन में वो समस्त बातें जो अधूरी रह गई एक उम्र गुजर जाने के बाद अक्सर रातों में सपने में दिख जाती है,ख़ैर!...नींद यूंही बेवजह नही टूट जाया करती है...!
रात में अचानक भीतर कहीं अचेतन मन में वो समस्त बातें जो अधूरी रह गई एक उम्र गुजर जाने के बाद अक्सर रातों में सपने में दिख जाती है,ख़ैर!...नींद यूंही बेवजह नही टूट जाया करती है...!
समय का चक्कर चलता रहता है,ये किसी से छीनता है किसी को देता है,मैं पत्थर था पत्थर रहने दो,जीवन रूपी रोड़ के सहारे कहीं पड़ा रहूँगा,कोई यात्री कभी पैर रखकर सुस्ता लेगा या फिर बैठकर कुछ चीजों के फैसले नहीं हो सकते वो तो नियती भरोसे ही रहती है...!
समय का चक्कर चलता रहता है,ये किसी से छीनता है किसी को देता है,मैं पत्थर था पत्थर रहने दो,जीवन रूपी रोड़ के सहारे कहीं पड़ा रहूँगा,कोई यात्री कभी पैर रखकर सुस्ता लेगा या फिर बैठकर कुछ चीजों के फैसले नहीं हो सकते वो तो नियती भरोसे ही रहती है...!
अपने अनुभव से यह जान पाया हूं, कि हमे उस तथाकथित अंत से बचना चाहिए बाद जिसके मौत भी अपने आप में बदनामी का सबब बन जाती है, ठीक-ठीक अब समझ पाया हूँ कि ये जो कुछ भी जद्दोजहद है ये जिंदगी के लिए तो कतई नहीं है,हम तो बस एक महान मृत्यु की तलाश में भटक रहे है...!
अपने अनुभव से यह जान पाया हूं, कि हमे उस तथाकथित अंत से बचना चाहिए बाद जिसके मौत भी अपने आप में बदनामी का सबब बन जाती है, ठीक-ठीक अब समझ पाया हूँ कि ये जो कुछ भी जद्दोजहद है ये जिंदगी के लिए तो कतई नहीं है,हम तो बस एक महान मृत्यु की तलाश में भटक रहे है...!