उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज पेश किया गया सन् 2026-27 का बजट लोक लुभावना ज्यादा तथा जनता के वास्तविक उत्थान एवं प्रदेश में सर्वसमाज व सभी क्षेत्र के विकास का कम प्रतीत होता है। फिर भी जो घोषणायें व आश्वासन आदि जनता को देने का प्रयास किया गया है उसकी सही से समयबद्ध तरीके से अमल जरूर हो ताकि ये केवल कागजी न रह जायें।
साथ ही, पिछले वर्ष के बजट का ज़मीनी क्रियान्वयनों का सही डाटा देकर बजट भाषण की परम्परा को वाकई में ठोस व विश्वसनीय बनाया जाता तो यह उचित होता, जबकि वर्तमान बजट भी अख़बारों की सुर्ख़ी बटोरने वाला ज्यादा प्रतीत होता है, जिससे एक बार फिर लोगों को अपने ’अच्छे दिन’ की उम्मीदों पर पानी फिर गया लगता है। वैसे भी उत्तर प्रदेश के लोगों को स्थाई आमदनी वाली रोज़गार व्यवस्था का इंतज़ार बना हुआ है, जिसको लेकर गंभीरता एवं सक्रियता आवश्यक।
इस सम्बंध में एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण पर भी सरकार का समुचित ध्यान देना ज़रूरी है। बैकलाग की भर्ती की भी जितनी जल्दी पूर्ति हो उतना बेहतर होगा।
वैसे भाजपा सरकार अगर बी.एस.पी. की चारों सरकार की तरह ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की संवैधानिक दायित्व को निष्ठा व ईमानदारी से निभाने का प्रयास करे तो यह देश व जनहित में उचित होगा। बजट भी इस दिशा में ही होना चाहिए अर्थात् बजट वर्ग व क्षेत्र विशेष का हितकारी तथा ख़ासकर करोड़ों ग़रीब एवं किसान-विरोधी ना होकर उनके जीवन सुधार का माध्यम हो तो यह सही होगा।
राजस्थान प्रदेश सहित तीन राज्यों की बैठक
इसके साथ ही, अखिल भारतीय स्तर पर पार्टी द्वारा गतिविधियों को अनवरत जारी रखने की प्रक्रिया में आज राजस्थान प्रदेश सहित तीन राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में उन तीनों राज्यों की अलग-अलग से हुई बैठक में वहाँ के राजनीतिक हालात के मद्देनज़र पार्टी संगठन की तैयारी तथा सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिये दिल्ली में हुई पिछली बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों के प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गयी तथा उन राज्यों के लोगों से अपने अच्छे दिन लाने के लिये यूपी की तरह पार्टी संगठन को मज़बूत बनाकर सत्ता प्राप्ति की ललक पैदा करने का आह्वान किया गया ताकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा जबरदस्त मेहनत एवं संघर्ष के बाद ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों को आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीने हेतु आरक्षण सहित जो अनेकों संवैधानिक अधिकार मिले हैं उनका सही से लाभ उन्हें मिल सके, जैसाकि यूपी में बी.एस.पी. की रही चारों सरकारों में उन्हें पहली बार मिलने की सुखद अनुभूति हुई।
मध्य प्रदेश राज्य के इन्दौर शहर में प्रदूषित पानी पीने से अनेक निर्दोष नागरिकों की मौत तथा अन्य अनेक लोगों के बीमार हो जाने की अति-दुखद एवं चौंकाने वाली ख़बर काफी चर्चा में है तथा ऐसी सरकारी ग़ैर-ज़िम्मेदारी व उदासीनता को लेकर लोगों में स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में व्यापक आक्रोश भी स्वाभाविक है।
वैसे तो लोगों को ख़ासकर साफ हवा और पानी आदि मुहैया कराना हर सरकार की पहली ज़िम्मेदारी होती है, किन्तु यहाँ अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था की तरह ही बुनियादी जनसुविधा के सम्बंध में भी सरकारी लापरवाही व भ्रष्टाचार आदि काफी घातक साबित हो रहा है तथा परिवार उजड़ रहे हैं, यह अति-दुखद व अति-चिन्तनीय।
इस प्रकार की नागरिकों के जान से खिलवाड़ करने की शर्मनाक घटना की रोकथाम के लिये राज्य सरकार को सख़्त से सख़्त क़दम उठाते रहने की ज़रूरत है। साथ ही, केन्द्र की सरकार को भी इसका उचित संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई ज़रूर करनी चाहिये ताकि देश के किसी अन्य राज्य में ऐसी दर्दनाक घटनायें ना होने पायें।
बिहार के प्रसिद्ध पटना विश्वविद्यालय के पाँच प्रतिष्टित कालेजों में ’लाटरी’ की नई व्यवस्था के तहत् प्रिन्सिपलों की नियुक्ति का मामला दिलचस्प होने के कारण देश भर में ख़ासकर मीडिया व शिक्षा जगत में काफी चर्चाओं में है।
स्थापित परम्परा से हटकर, ’लाटरी’ के ज़रिए नियुक्ति की एक प्रकार से विचित्र व्यवस्था लागू करने के कारण केवल कला (आर्ट्स) विषयों की पढ़ाई वाले 1863 में स्थापित पटना कालेज में कैमिस्ट्री के प्राध्यापक प्रो. अनिल कुमार प्राचार्य बन गये हैं, जबकि बिहार विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान की प्राचार्य प्रो. अल्का यादव विज्ञान की उच्च शिक्षा के लिए प्रख्यात पटना साइन्स कालेज की नयी प्रिन्सिपल नियुक्त हुयी हैं।
इतना ही नहीं बल्कि इसी प्रकार की नियुक्ति वाणिज्य महाविद्यालय में भी हुई है। यहाँ पहली बार कला संकाय की महिला प्राध्यापक डा सुहेली मेहता प्राचार्य बनी हैं, हालाँकि उनके विषय की पढ़ाई यहाँ इस कालेज में नहीं होती है।
साथ ही, महिला शिक्षा जगत में प्रसिद्ध मगध महिला कालेज को लम्बे इतिहास में दूसरी बार पुरुष प्रिन्सिपल मिले हैं। प्रो. एन. पी. वर्मा यहाँ के नये प्राचार्य होंगे जबकि प्रो. योगेन्द्र कुमार वर्मा की लाटरी पटना लॉ कालेज के प्रिन्सिपल के रूप में निकली है।
इसको लेकर लोगों में उत्सूकता है कि ’पारदर्शिता व तटस्था’ के नाम पर बिहार सरकार व वहाँ के चांसलर द्वारा इस प्रकार लाटरी के माध्यम से की गयी प्रिन्सिपल की नियुक्तियों को सही ठहरा कर क्या इस व्यवस्था को भाजपा-शासित अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा?
वास्तव में कालेजों के प्रिन्सिपल जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी पूरी पारदर्शिता, तटस्था व ईमानदारी के साथ नियुक्ति नहीं कर पाने की अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ही ऐसा घातक प्रयोग करना लोगों की नज़र में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुधार का कम तथा खराब करने वाला ज़्यादा प्रतीत होता है।
इसी प्रकार, इसी परम्परा को अपना कर आगे चलकर मेडिकल कालेजों, आईआईटी व अंतरिक्ष विज्ञान आदि जैसी सांइस की उच्च व विशिष्ठ संस्थाओं में भी गै़र-एक्सपर्ट नियुक्त किये जायें तो यह ताज्जुब की बात नहीं होनी चाहिए।
वैसे हमारी पार्टी का यह मानना है कि किसी भी विशिष्ठ क्षेत्र में इस प्रकार की मनमानी वाला विकृत प्रयोग ना किया जाये तो उचित। और इससे पहले कि यह रोग गंभीर होकर और ज़्यादा फैले केन्द्र की सरकार को इसका उचित व समुचित संज्ञान लेकर जन व देशहित में जितनी जल्द कार्रवाई करे उतना बेहतर, ऐसी सभी को उम्मीद।
3. मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल, माननीय उच्च न्यायालय तथा मा. मुख्यमंत्री जी भी मूर्ति लगाने में आ रही बाधाओं को दूर करके, तत्काल उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में संविधान निर्माता, भारतरत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति को सम्मानपूर्वक स्थापित कराएं, यह अनुरोध।
2. किन्तु कुछ जातिवादी सोच से ग्रसित अधिवक्ताओं द्वारा मूर्ति स्थापना का विरोध किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ वक्तव्यों के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं की गई। बाबा साहेब के विरोधियों को यह समझना होगा कि सदियों से उपेक्षित बहुजन समाज अब अपना सम्मान पाना चाहता है।
1. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट खण्डपीठ ग्वालियर में अधिवक्ताओं की माँग व उन्हीं के आर्थिक सहयोग से परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति लगाने की अनुमति माननीय कोर्ट द्वारा दी गई तथा कोर्ट के निर्देशन में ही स्थान का चयन एवं चबूतरा बनाया गया व मूर्ति भी बनकर तैयार हुई।
4. ऐसे अवसरवादी व स्वार्थी तत्वों से पार्टी के लोग सतर्क रहें तथा श्री आकाश आनन्द का अब हौंसला भी ज़रूर बढाएं ताकि वह पार्टी के कार्याें में पूरे जी-जान से जुट जाएं। इसी प्रकार, पार्टी में अन्य जो भी लोग वापस लिए गए हैं उन्हें भी पूरा आदर-सम्मान दिया जाए, जो पार्टी हित में है।
3. किन्तु श्री आकाश आनन्द के मामले में ख़ासकर बहुजन समाज के कुछ स्वार्थी व बिकाऊ लोग, जिन्होंने पार्टी के वोटों को बाँटने व कमज़ोर करने के लिए अपनी अनेकों पार्टी व संगठन आदि बनाये हुये हैं, वे इस बात का मीडिया में आए दिन काफी ग़लत प्रचार करते रहते हैं।
2. तथा उनमें से कुछ में परिवर्तन आने व माफी माँगने के बाद फिर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में लेना भी पड़ता है। और जबसे पार्टी बनी है तो ऐसा किया जाता रहा है, जिन्हें पार्टी से कई-कई बार निकाला भी है और उन्हें वापस भी लिया है। ऐसा अन्य पार्टियों में भी होता है।
1. विदित है कि बीएसपी से जुडे़ कुछ लोग अपनी नासमझी, जोश व लापरवाही या विरोधी पार्टियों के षड्यन्त्र के बहकावे में आकर काफी ग़लती कर बैठते हैं, जिन्हें फिर पार्टी हित में सुधारने के लिए पार्टी की ज़िम्मेवारी से अलग करना व गम्भीर मामलों में निकालना भी पड़ता है।
आगरा में दलित समाज की बारात पर जातिवादी व सामंती तत्वों द्वारा हिंसा की ताज़ा घटना सहित यूपी के विभिन्न जिलों में भी गरीबों व दलितों आदि पर हो रही जुल्म-ज्यादती की बढ़ती घटनाएं अति-चिन्तनीय, जबकि बीएसपी के शासनकाल में सरकार हमेशा अन्याय के विरुद्ध इनके साथ खड़ी हुई दिखती थी।
3. साथ ही, ऐसी पार्टियों से जुड़े अवसरवादी दलितों को दूसरों के इतिहास पर टीका-टिप्पणी करने की बजाय यदि वे अपने समाज के सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों की अच्छाईयों एवं उनके संघर्ष के बारे में बताएं तो यह उचित होगा, जिनके कारण ये लोग किसी लायक़ बने हैं।
2. क्योंकि सपा भी दलितों के वोटों के स्वार्थ की खातिर यहाँ किसी भी हद तक जा सकती है। अतः दलितों के साथ-साथ अन्य पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि को भी इनके किसी भी उग्र बहकावे में नहीं आकर इन्हें इस पार्टी के भी राजनीतिक हथकण्डों का शिकार होने से ज़रूर बचना चाहिए।
1. विदित है कि अन्य पार्टियों की तरह आएदिन सपा द्वारा भी पार्टी के ख़ासकर दलित लोगों को आगे करके तनाव व हिंसा का माहौल पैदा करने वाले आ रहे इनके अति विवादित बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप व कार्यक्रम आदि का जो दौर चल रहा है यह इनकी घोर संकीर्ण स्वार्थ की राजनीति ही प्रतीत होती है।
आकाश आनंद ने सोशल मीडिया पर अपनी बुआ और बसपा सुप्रीमो मायावती से माफ़ी मांगी. तो उन्होंने माफ़ करते हुए वापस पार्टी में ले लिया. ऐसे सवाल ये है कि क्या आकाश आनंद को वापस बसपा में पॉवर हासिल होगी? बसपा पर बारीक नज़र रखने वाले पत्रकार @journalist_syed से जानिए. जिनसे बात की है हमारे ब्यूरो चीफ @abhishek6164 . #AkashAnand #Mayawati #BSP
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष,पूर्व मुख्यमंत्री परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी द्वारा माननीय अकाश आनंद जी को बहुजन महापुरुषों के मिशन मूवमेंट को आगे बढ़ाने के लिए पुनः बहुजन समाज पार्टी में वापसी करने के लिए धन्यवाद एवं @AnandAkash_BSP जी को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
#जयभीम
#अकाश_आनंद_जी
परम पूज्यनीय भारतरत्न डॉ भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर मेरा कोटि कोटि नमन।
बाबासाहेब की 135वें जयंती पर हम सभी संकल्प लें कि आत्मस्वाभिमान का मूवमेंट कभी रुकना नहीं चाहिए।