अगर आप परफ़ेक्शन की तलाश में हैं, तो मैं वो नहीं हूँ। लेकिन अगर आप ईमानदारी और वफ़ादारी चाहते हैं, तो मैं वही हूँ। I explain what you read and watch. #meribaate
करोड़ों रुपये खर्च कर बने ।
एक्सप्रेसवे का पहली ही बारिश में ,
क्षतिग्रस्त होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
अगर निर्माण में लापरवाही हुई है,
तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी।
जनता को टिकाऊ और सुरक्षित बुनियादी ढांचे का अधिकार है।
करप्शन?
@LegalAdvisour अगर किसी और पार्टी का नेता ऐसा करता, तो अब तक टीवी डिबेट से लेकर सोशल मीडिया तक हंगामा मच चुका होता।
सवाल सिर्फ़ इतना है कि आस्था का पैमाना सबके लिए एक जैसा क्यों नहीं है?
अगर भावनाएँ सच में आहत होती हैं, तो विरोध भी बिना पक्षपात के होना चाहिए। पर ये तो मोदी जी है इन्हें क्या ।
@SirAbdullahSidd कमाने की मजबूरी अपनी जगह है।
लेकिन इंतज़ार का दर्द सिर्फ़ वही समझ सकता है,
जो रोज़ उसे जीता है।
इस पोस्ट में उस एहसास को बहुत अच्छे से लिखा है आपने भाई।
इस पोस्ट को पढ़कर उन लाखों महिलाओं का ख़्याल आया जो अपने पूरे जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ़ इंतज़ार मे गुज़ार देती है।
@CommonBS786OM अगर सच में किसी धार्मिक स्थल पर ऐसा हुआ है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। कानून का पालन सबके लिए एक जैसा दिखना चाहिए, तभी लोगों का भरोसा बना रहेगा। किसी भी धर्म के लोगों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उनके साथ अलग व्यवहार हो रहा है। जनता सिर्फ़ एक ही चीज़ चाहती है—निष्पक्षता ।
@ArinOmPawar2003 PR से नहीं, ज़मीनी नतीजों से देश की पहचान बनती है।
दावे बड़े हैं, लेकिन जनता नतीजे देखना चाहती है।
अगर रिपोर्ट सही है, तो कारण और समाधान दोनों पर चर्चा होनी चाहिए।
विकास का असली पैमाना ज़मीनी हकीकत होती है, सिर्फ़ प्रचार नहीं।
जनता सवाल इसलिए पूछती है क्योंकि असर उसी पर पड़ता है।
देश की तरक्की।
सिर्फ़ नई परियोजनाओं से नहीं,
बल्कि उनकी गुणवत्ता और जवाबदेही से तय होती है।
जनता टैक्स इसलिए देती है।
कि हर काम समय पर,
ट्रांसपेरेंसी के साथ और टिकाऊ तरीके से पूरा हो।
विकास का मतलब भरोसा भी है।
भरोसे से ही जनता सरकार चुनती है,
ओर सरकार बस कार खरीदती है ।
@Mountain4u अभी तक नहीं देखी।
लेकिन जितना विवाद बढ़ रहा है ,
उतनी ही जिज्ञासा भी बढ़ रही है।
पहले तथ्य सामने आने चाहिए।
विवाद अपनी जगह,
लेकिन फिल्म की गुणवत्ता का फैसला दर्शक ही करेंगे।
सुना है फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी, लेकिन हटाए जाने को लेकर अलग-अलग दावे है।
पर फिल्म👌🏻
सतलुज फिल्म फिर से विवादों में घिरी जानिए पूरा रीजन क्या है पूरी गाइडलाइंस....
दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज फिर से सुर्खियों में बनी हुई है बताया जा रहा है आईटी रूल्स के खिलाफ है
आईटी रूल्स 2021 के तहत इस फिल्म को ott से हटाया गया है सतलुज फिल्म को ott पर आए हुए दो दिन पूर्ण हुए थे
सीधा-सीधा आरोप लगा है पार्ट 3 का पालन न करना ऐसा क्या है पार्ट 3 में जिसने सीधे तौर पर उल्लंघन कर दिया
Ott content cbfc के दायरे में नहीं आता इसलिए इसे ott से हटाने का फैसला किया गया।
सतलुज फिल्म पंजाब के मानव अधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है।
सतलुज फिल्म देखी हो तो बताएं कैसी है मैं अभी तक नहीं देखी। कैसा क्रेज है इसका..?
1/2
एक ओर देश, एक ओर यात्रा और वही एक ओर अवॉर्ड......!
मोदी जी अभी इंडोनेशिया दौरे पर हैं और मोदी जी किसी देश में जाएं और सम्मान ना पाएं ऐसा हो नहीं सकता।
इंडोनेशिया ने उनको सर्वोच्च सम्मान ' Bintang Adipurna ' नवाजा है।
लेकिन क्या आपको पता है ये सम्मान किसको मिलता है?
. देश की एकता और सुरक्षा को मजबूत करने वाले को।
. राष्ट्र की प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले को।
. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संबंध मजबूत करने वाले को।
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि मोदी जी ने इनमें से कौनसा काम किया है?
आप लोगों को पता है क्या ?
@shaheena451 आस्था के मामले में चुप्पी नहीं, पारदर्शिता चाहिए। सच जो भी है, देश के सामने आना चाहिए।
करोड़ों लोगों की श्रद्धा का सवाल है
इसलिए जांच भी निष्पक्ष होनी चाहिए और जवाब भी साफ़ होना चाहिए।
अगर सब कुछ ठीक है तो जांच से डर किस बात का?
सवाल पूछना गुनाह नहीं है,
जवाब देना जिम्मेदारी है।
गरीबी सिर्फ़ इस बात से तय नहीं होती ,
कि कौन बच्चे पैदा कर रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अवसर और सामाजिक परिस्थितियाँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं
किसी वर्ग को दोष देने से समाधान नहीं निकलता, लेकिन समान अवसर देने से कई पीढ़ियों की ज़िंदगी बदल सकती है
पर ये उल्टी सोच वाले🐮
सोशल मीडिया पर राय देना आसान है,
लेकिन ज़िम्मेदारी के साथ राय देना मुश्किल।
किसी भी खबर पर प्रतिक्रिया देने से पहले ,
उसके तथ्य और स्रोत देख लेना ही समझदारी है।
एक सही जानकारी, हज़ार अफ़वाहों पर भारी पड़ती है।
और अच्छी सोच के साथ अपनी बात लिखना ,
हमेशा ही कारगार रहा है ।
@CommonBS786OM अगर लोगों को E20 को लेकर कोई वाजिब चिंता है, तो सरकार और वाहन बनाने वाली कंपनियों को पारदर्शी डेटा और स्पष्ट जवाब देने चाहिए।
अगर कहीं भ्रम है, तो उसे स्पष्ट करना सरकार और संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी है।
या सारे फैक्ट विपक्ष ही चेक करता रहेगा ।
@SCD41451 विकास का मतलब सिर्फ़ घोषणाएँ या दिखावटी बदलाव नहीं है; इसमें रोज़गार, अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित माहौल, मज़बूत बुनियादी ढाँचा और लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार शामिल हैं। अगर इन क्षेत्रों में कोई कमी है, तो खुली चर्चा और जवाबदेही, दोनों ही ज़रूरी हैं।
@SirAbdullahSidd हर बढ़ा हुआ बिल फ्रॉड नहीं होता, लेकिन अगर किसी को संदेह है तो उसे अपने मीटर, लोड और बिल की जांच ज़रूर करानी चाहिए।
अगर एजेंसी गलत है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर बिजली की खपत बढ़ी है तो बिल बढ़ना भी स्वाभाविक है।
तथ्यों के आधार पर बात होगी तो लोगों का भ्रम भी दूर होगा।