"मैं साहब कांशीराम द्वारा शुरू किए सामाजिक राजनैतिक आंदोलन के प्रति सदा समर्पित रहूंगा/रहूंगी। मैं इस आंदोलन को मजबूत करने के लिए सदा प्रयासरत रहूंगा/रहूंगी और बाबा साहेब और साहेब कांशीराम के कारवां को मजबूत करने के हर ���ंभव प्रयास करूंगा/करूंगा।"
मान्यवर कांशीराम साहब के विचार और आंदोलन के प्रति समर्पित प्रत्येक व्यक्ति इसे रीट्व���ट करें। प्रत्येक रिट्रीट करने वाले को फॉलो करुंगा।
जय भीम! जय भारत!
प्रोफेसर विवेक कुमार जी ने News Anchor चित्रा त्रिपाठी की जुबान सिल दी।
मान्यवर कांशीराम साहब और बाबा साहब पर ऐसा वक्तव्य National News चैनलों पर कम देखने और सुनने को मिलता है।
बहन @Mayawati जी ने कभी राजनीतिक स्वार्थ में आकर वोट की परवाह नहीं की और परवाह की है तो सिर्फ दलित समाज की सम्मान स्वाभिमान की हैं बाबासाहेब अंबेडकर के मिशन की परवाह की है कांशीराम साहब के विचारों की ��रवाह की है
हो सकता है की टीवी मीडिया आज के बहनजी के बयान का दुरुपयोग करें और दोनो पार्टियों के बीच अलगाव पैदा ���रने के उद्देश्य से भड़काऊ शब्दावली का इस्तेमाल करे।
सावधान रहें। मैंने अपने विश्लेषण में ये स्पष्ट किया है। बहनजी ने क्लास तो लगाई है लेकिन बेहद शांत सहज अंदाज में।
स्वाभिमान की खातिर बहन मायावती
@Mayawati किसी से समझौता नहीं करते चाहे कोई गठबंधन का नेता हो या प्रत्याशी हो
इनेलो के पूर्व अध्यक्ष हरिजन शब्द का प्रयोग कर रहे थे बहन मायावती जी मंच पर बैठी थी बहन जी ने तुरंत ही पलट बार करते हुए हरिजन शब्द के प्रयोग पर इनेलो के पूर्व अध्यक्ष को ��ंविधान का पाठ पढ़ा दिया और बताया कि जब वह MA फर्स्ट ईयर की छात्रा थी तो 1977 में संविधान क्लब में उनको इनवाइट किया गया था और वहां पर जनता पार्टी का एक मंत्री बार-बार हरिजन शब्द का प्रयोग कर रहा था फिर किस प्रकार बहन जी ने उसे मंत्री को भरी सभा में सबके सामने बेइज्जत करके बाहर निकलवा दिया था जिससे वह शर्मिंदा होकर सभा को छोड़कर भागना पड़ा इसीलिए मैं कहता हूं की बहन मायावती की कभी स्वाभिमान और सम्मान से समझौता नहीं करते उसके लिए उन्हें कितना भी बड़ा किया क्यों न करना पड़े इसलिए बहन जी होना नामुमकिन
��पको बता दूं इसी शब्द को सुनकर मान्यवर काशीराम जी बहन मायावती जी से रात को 10:00 बजे उनके घर पर मिलने पहुंचे थे और उनको कहा था कि आप पर लिखकर क्या करना चाहते हैं तब बहन जी ने कहा मैं IAS बनकर अपने समाज की सेवा करना चाहती हूं तब मान्यवर साहब ने कहा मैं आपको इतना बड़ा नेता बनाऊंगा कि आपके पीछे IAS में फाइल लेकर घूमेंगे
वह दिन है और आज का दिन है बहन जी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा बहन जी मान्यवर कांशीराम ��ाहब की अंबेडकर मिशन मूवमेंट से जुड़कर बामसेफ की सदस्य बनकर फिर 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना करके 10 साल के अंदर अंदर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की 3 जून सन 1995 को मुख्यमंत्री बनी
यह भारत के दलित मुख्यमंत्री बनने की ऐतिहासिक घटना थी
इस ऐतिहासिक घटना के बाद उत्तर प्रदेश शाहिद भारत और दुनिया के बड़े राजनेताओं में अपने आप को स्थापित कर दिया
"सवर्ण समाज में कुछ लोग पीछे रह गए कहकर 10% अलग से आरक्षण दे दिया तो एससी, एसटी समाज में उपवर्गीकरण क्यों? जो पीछे रह गए हैं उन्हें भी 5% अलग से दे दीजिए।" यही बात तो हम इतने दिनों से सभी ��लों से बोल रहें थे लेकिन वह यह बात नहीं बोलेंगे क्योंकि वह फूट डालकर राज करना चाहते हैं।
प्रोफेसर विवेक कुमार ने बहुत तर्कशील बात कही आज दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी सिंह अगर दलितों को प्रतिनिधित्व देना चाहती हैं तो प्रोफ��सर सहाब की बात पर अमल करे।
@DrLaxman_Yadav अखिलेश यादव जी को शायद 2019 से अबतक नही पता था गठबंधन क्यों टूटा?
बहन जी ने ये सभी बाते गठबंधन तोड़ते समय मीडिया को बता दी थी,तब अखिलेश चुप क्यों थे?
बहन जी ने कहा था अगर समाजवादी पार्टी अपने में सुधार लाती है तो हम फिर से गठबंधन में नजर आएंगे तब अखिलेश चुप क्यों थे?
Reservation क्यो जरुरी है नितीश राजपूत जी से सुनिए ?
क्या हुआ जब मायावती जी CM बनी थी ?
बहनजी के CM बनने से भले ही आर्थिक लाभ नही मिले हो लेकिन राजनेतिक व्यवस्था में आने का जो विश्वाश SC ST में आया था ��ो बहनजी की वजह से आया है।
दुनिया की जनसँख्या का 86% गैर हिन्दू है। 16% में से 5% एससी/एसटी है जो हिन्दू की वर्ण व्यवस्था से बाहर है। बचा 11%। 11% में सैकड़ो पंथ वगैरह है।
अब इस बाबा के अनुसार जो 86% गैर हिन्दू कृष्ण व राम को भगवान नही मानते वो "गधे" है। यह एक नालायक नाम ले रहा है, वो ग़ैर हिन्दू 86% में से व 5% एससी/एसटी में कोई भी हो सकता है। वैसे;
"गधा एक मेहनती पशु है वो फर्जी के आडम्बर, अंधविश्वास, कहानियां बनाकर लोगो को लुटता नही है और न ही हराम की खाता है, गधा अपनी मेहनत का खाता है"
यह बाबा नरेंद्र मोदी को काहे नही समझाता की विदेशों में जाकर;
"में बुद्ध की धरती से आया हूँ"
की ���गह "में कृष्ण व राम को धरती" से आया हूँ कहा करे।
विकास कुमार जाटव
आरक्षण से पहले देश सोने की चिड़िया थी। कई लाख गुरुकुल थे जिसमे शुद्र अथार्त ओबीसी व अछूत अथार्त एससी व आदिवासी के बच्चे भी पढ़ते थे। देश मे शांति थी।मजे ही मजे थे। धर्म का कार्य करके उच्च स्थान ब्राह्मण के लिए, राजपाट छत्रिय के लिए, व्यापार वैश्य के लिए था, इसे ब्राह्मण, छत्रिय, वैश्य का आरक्षण नही कहेंगे। सभी खुश थे। पूरी दुनिया भारत का लोहा मानती थी। फिर आया आरक्षण। आरक्षण के बाद यह हाल हो गया कि ओलम्पिक तक मे अपनी भद्द पिटवाकर वापस आते है।
हाय आरक्षण।
☺️☺️😊😊