#JusticeForTeachers
आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
💥 सांसद और विधायकों के लिए नियम बनाओ! 💥
यदि शिक्षक पर नियम लागू करना है,
तो वही नियम सांसद और विधायकों पर भी लागू हों।
बीच सेवा में टेट लागू करना अपमान है,
वर्षों की सेवा और अनुभव पर चोट है।
हम चुप नहीं रहेंगे।
हम अडिग हैं, हम संगठित हैं।
जो टकराएगा, सत्ता से दूर जाएगा।
#JusticeForTeachers ✊
@DrDCSHARMAUPPSS@SanjaySnghUPPSS@PMOIndia@narendramodi@CMOfficeUP@dpradhanbjp@jayantrld
🔥 पहले नंबर पर #JusticeForTeachers, सरकार समझ ले! 🔥
पुष्पा समझे थे क्या? फायर हैं!
शिक्षक आंदोलन अब केवल सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं,
यह वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण की आग है।
बीच सेवा में टेट लागू करना अपमान है,
हम चुप नहीं रहेंगे।
जो टकराएगा, सत्ता से दूर जाएगा।
हम अडिग हैं, हम संगठित हैं।
अब केवल चेतावनी नहीं,
सच और आक्रोश बुलंद हो चुका है।
#JusticeForTeachers ✊
@DrDCSHARMAUPPSS@SanjaySnghUPPSS@PMOIndia@narendramodi@CMOfficeUP@dpradhanbjp@jayantrld
जब-जब अन्याय बढ़ा है, इतिहास ने करवट ली है
1857 में सैनिकों ने सोचा था —
“अब और नहीं।”
वहीं से स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भड़की।
चंपारण में किसानों ने कहा था —
“अन्याय नहीं सहेंगे।”
वहीं से सत्याग्रह की ताकत दुनिया ने देखी।
इतिहास गवाह है —
जब व्यवस्था ने सीमाएं लांघीं,
तब संगठित समाज ने दिशा बदली है।
आज प्रश्न भी वैसा ही है।
पहले शिक्षामित्र हटे।
फिर स्कूल मर्ज हुए।
अब बीच सेवा में नई शर्तें।
हर दौर में कहा गया — “सुधार के लिए जरूरी है।”
लेकिन सुधार यदि अस्थिरता और असमानता लाए,
तो इतिहास उसे सुधार नहीं, संघर्ष का कारण लिखता है।
शिक्षक राष्ट्र की चेतना है।
और जब चेतना जागती है,
तो परिवर्तन अवश्य होता है।
यह समय विभाजन का नहीं,
इतिहास रचने का है।
#JusticeForTeachers
@DrDCSHARMAUPPSS@SanjaySnghUPPSS@PMOIndia@narendramodi@CMOfficeUP@dpradhanbjp@jayantrld