सड़कों पर गड्ढे, सीवरेज और ड्रेनेज पर वीडियो बनाकर सरकार की पोल खोलोगे तो "आतंकवादी" घोषित करके गिरफ्तार कर लिया जाएगा!
संतोष पंडित की कहानी से सबक लेने का वक्त आ गया है दोस्तों!
प्रदर्शन ख़त्म हो गया, मीडिया के कैमरे चले गए, उसके बाद सूने पड़े जंतर मंतर की सफाई की सेवा इस तरह की गई। इससे पार्टी को वोट नहीं मिलना क्योंकि सड़कें वोट देने नहीं आतीं, लेकिन शाबाशी तो मिलनी चाहिए @CongressSevadal के कार्यकर्ताओं और संगठक @srinivasiyc को
देहरादून में भी राहुल गांधी का स्टूडेंट्स से संवाद ठीक रहा। ऐसे जितने कार्यक्रम हो जिसमें दो तरफ़ा संवाद हो,बुनियादी मुद्दों पर बात हो,उसका स्वागत करना चाहिए।
राम के नाम डॉक्यूमेंट्री में एक बहुत साधारण आदमी दिखाई देता है। शायद किसी गाँव का। उससे राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर राय पूछी जाती है।
मैं उसके शब्द नहीं, उसका मूल भाव लिख रहा हूँ।
वह कहता है, "मंदिर बनाना है तो बना लो। उसमें झगड़े की क्या बात है? लेकिन किसी की मस्जिद गिराकर मंदिर बनाना ठीक नहीं। अपना मंदिर बनाना हो तो पास में बना लो, दूसरा बना लो, बड़ा बना लो। बनी हुई चीज़ क्यों गिरानी?"
यही हम थे, आज से लगभग 35 साल पहले। जिसके बारे में भाजपा कहती है कि हिन्दू तब सो रहा था।
आज वही "जागा हुआ हिन्दू", संघ परिवार की नज़र में, हर असहमति और हर बनी हुई चीज़ को गिराने को तैयार दिखाई देता है।
इसी सिलसिले में अब आज़म ख़ान की बनवाई हुई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया गया है।
मुझे फिर उसी आदमी की बात याद आती है। बनी हुई चीज़ गिराना ठीक नहीं।
यह इतनी सी समझ हमने कब और कैसे खो दी? और क्या यह हमें कभी वापस मिलेगी?
Just Speak
FDA Maharashtra has launched grievance redressal portal for citizens. It is AI enabled platform, having auto assignment, auto escalation and built in accountability with traceability features .
https://t.co/597si71Z6E
#TukaramMundhe#FDA
तुकाराम मुंडे हे केवळ एक प्रशासकीय अधिकारी नसून ते महाराष्ट्रातल्या लोप पावत असलेल्या नैतिक मूल्यांचे नेते आहेत.
त्यांचं काम ते इतक्या चोखपणे करत आहेत की बघून डोळे निवतात.
त्यांच्या मूल्यव्यवस्थेवर आणि विवेकी अस्तित्ववादावर एक लेख लिहितोय.
लवकरच इथे वाचू शकाल.
तोपर्यंत 🫡 @Tukaram_IndIAS
सैराट चित्रपटातून प्रसिद्धी मिळालेला अभिनेता अरबाज शेख याने वडिलांच्या उपचारादरम्यान आलेला अनुभव सोशल मीडियावर मांडल्यानंतर सोलापुरातील नोबेल हॉस्पिटल चर्चेत आले. रुग्णांना रुग्णालयाशी संलग्न असलेल्या मेडिकलमधूनच औषधे घेण्यास भाग पाडले जात असल्याचा आरोप त्याने केला होता. या तक्रारीची अन्न व औषध प्रशासनाने तातडीने दखल घेत संबंधित मेडिकलची तपासणी केली. तपासात काही गंभीर नियमभंग समोर आल्यानंतर औषध विक्री तात्पुरती बंद करण्याचे आदेश देण्यात आले. या कारवाईनंतर अरबाजने व्हॉट्सॲप स्टेटसद्वारे सर्वांचे आभार मानत हा विषय आता संपल्याचे सांगितले असून त्याने यापूर्वी शेअर केलेला व्हिडिओही हटवला आहे.
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