अल्फॉन्सो और दशहरी आम के टेस्ट का फ्रॉड कब तक चलेगा? दुधिया मालदह/मालदा जिसने भी चखा होगा वो बता देगा कि विदेशियों को मूर्ख बनाने के लिए अल्फॉन्सो, ब्रांडिंग के अलावा कुछ भी नहीं।
जिन्हें भी आम के स्वाद की समझ है और मालदह खाया है, वो जानते हैं कि मैं क्या कह रहा हूँ। संभवतः ‘लंगड़ा’ आम भी इसी को कहते हैं।
दूधिया मालदह का छिलका पतला, आँठी भी पतली, गूदा सुगंधित और कसा हुआ। बाकी सारे आम शेक बनाने योग्य होते हैं, दूधिया मालदह अलौकिक होता है।
‘अरे पैसे मत देख तू! नंबर पाँच पर हैं हम लोग। एक और लेगा?’
‘ले तो लूँगा, बाद में तू कहेगा वॉलेट भूल गया।’
‘अरे UPI है इधर… फोन से ही गोलगप्पे का भी पैसे दे सकते हैं!’
‘जापान में भी काम करेगा? बात करा दे भाई, पेपर वर्क बाद में कर लेंगे!’
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रैली में: मित्रों! जापान वालों को तो गोलगप्पे खिला कर UPI दिला दिया। हम बनिए हैं, एक भी मीटिंग बर्बाद नहीं करते। बोलिए अच्छा किया कि नै किया?