70 के दशक में उस्ताद राशिद खान का जन्म UP के बदाऊं में हुआ था। उनके पुरखों ने ही रामपुरसहसवान घराना शुरू किया था। उन्हें तालीम अपने दादा गुरु उस्ताद निसार हुसैन खान से मिली।राशिद खान उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के भतीजे थे,जो विश्वविख्यात कलाकार थे।
#Raaggiri@YRDeshmukh@hvgoenka
गौर करिये, अधिकांश गानों में आशा जी की आवाज के खनक को प्रभावशाली बनाने के लिए हरेक संगीतकार ने किसी ना किसी खनक वाले instrument को use किया है।
Long live आशा जी
आशा जी को गुज़रे दो हफ्ते हो गए। उन्हें याद करते हुए तमाम लोगों ने वीडियो बनाए। उनकी आवाज़ की खनक अब भी कानों में ताज़ा है।आशा जी जैसे ज़िंदादिल कलाकार कम ही होते हैं। उनके हरदिल अज़ीज़ गानों की वीडियो देखिए। @ashabhosle ताई को पुनः श्रद्धांजलि
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लिखो की तुम हो हमारी तमन्ना,
चिपका लबों पर तुम्हारा ही पन्ना,
जिगर फेंकता है निगाहों से मरहम,
तुम पास हो तो न कहना न सुनना...
@IASassociation#CivilServicesDay@nitishwarKumar
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पंडित बिक्रम घोष बड़ी समृद्ध परंपरा से आते हैं। उनके साथ घटम पर- पं. सुरेश वैद्यनाथन, सितार- अभिषेक मलिक, ड्रम- सत्या मुखर्जी, वोकल- अंबरीष दास हैं। साथ में अनुष्वा-शैलजा का कथक।
इस वीडियो को देखकर यकीन हो जाएगा कि संगीत सिर्फ आत्मा की भाषा है।
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