मत पूछ इस जिंदगी में बेगाने होते लोग देखी , अजनबी होता शहर
देखी हर इंसान को यहाँ, मैंने खुद से ही बेखबर देखी
रोते हुए नयन देखे, मुस्कुराता हुआ अधर देखी गैरों के हाथों में
मरहम, अपनों के हाथों में खंजर देखी ।
मत पूछ इस जिंदगी में, इन आँखों ने क्या मंजर देखी मैंने ☺️
शुभ प्रभात