एक सच्ची कहानी एक नौजवान लड़के व गेब्रियल हाउस ऑफ केयर की -
गेब्रियल हाउस ऑफ केयर के पीछे की कहानी घर के विचार से बहुत पहले शुरू होती है। इसकी शुरुआत 1940 के दशक में एक युवा लड़के से हुई जिसे सिस्टिक फाइब्रोसिस होने का गलत निदान किया गया था - जिसका बाद में 40 के दशक में पता चला।
@Viveksbarmeri अरे सही में यार यह रोडवेज वाले बस स्टैंड पर नहीं रोकते हैं। यहां सहकार मार्ग पर रोक रहे हैं और मजे की बातें बस में कोई है भी नहीं और पूरा लाव लश्कर लेकर निकल पड़े अपने मंत्री
@dineshbohrabmr एक बस में बैठने के लिए इतना नाटक कर रहे हैं, अरे इसमें सवारियां भी होनी चाहिए भाई। और इनको पता है क्या रोडवेज वाले यहां रोक लेते हैं अरे वह बस स्टैंड पर नहीं रुकते हैं।