हिंदुत्व के लिए लिखना |
अब दिन प्रतिदिन मुश्किल हो रहा है |
क्योंकि आए दिन अकाउंट रिपोर्ट किया जा रहा है |
और अकाउंट की रीच रोज समाप्त करवाई जा रही है |
हिंदुओं भाईयो साथ दो अन्यथा हिम्मत टूटने की कगार पर |
कृपया हमारे अकाउंट को फोलो करें और कमेंट में राम राम लिखें |
अन्यथा हमारा अकाउंट जल्दी ही गुप्त होने की स्तिथि में आजाएगा |
इतिहास में पहली बार है |
जो हजारों संत हिंदू राष्ट्र के संकल्प के साथ |
लाखों हिंदुओं की भीड़ को लेकर पद यात्रा कर रहे हैं |
संतों के इस संकल्प को आप करोड़ों हिंदुओं के जोश की आवश्यकता |
एक नीला कबूतर कह रहा है id को ब्लॉक
करबा कर ही दम लेगा.
क्यूंकि इस जहरीले अम्बेडकरवादी को
ये ड्यूटी मिली है...
क्या आप सभी मित्र इन जहरीले कबूतरों को जवाब नही दें सकते...???
अगर ये पोस्ट आप तक पहुंचे तो
जय श्री राम🙏
जरूर लिखें
एक हिंदू भाई ने 350 साल पुराना गुरू ग्रंथ
साहिब जी सम्भाल कर रखा है
जो महाराजा रणजीत सिंह जी के घर में था
और महाराणी जिंद कौर यहा लेकर आए थे
पशुपति नाथ काठमांडू नेपाल
मेरे पापा की शादी 1999 में हुई थी, उस समय राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थीं। शादी में मेरे नाना ने दहेज में पापा को एक राजदूत मोटरसाइकिल दी थी। शादी को अभी एक महीना ही हुआ था कि एक दिन पापा अपनी राजदूत लेकर कुछ काम से बाजार गए।
शाम के करीब 6 बजे वे लौट रहे थे। हमारे गांव के रास्ते में एक पुल पड़ता है, जहां अक्सर चोरी-छिनैती की घटनाएँ होती थीं। जब पापा उस पुल पर पहुँचे, तो कुछ लोग उन्हें रोक लिए। उनके गले में हरा गमछा था और हाथों में कट्टा लिए हुए थे।
उन्होंने पापा से कहा — “मोटरसाइकिल छोड़ दो और पैदल निकल जाओ।”
पापा ने उनसे बहुत विनती की, यहाँ तक कहा — “हम यादव हैं, लालू यादव को वोट देते हैं।”
लेकिन उन लोगों ने एक न सुनी और उनकी राजदूत मोटरसाइकिल छीन ली।
उस दिन के बाद पापा का पूरा नजरिया बदल गया।
पहले वो लालू यादव के कट्टर समर्थक थे, उन्होंने उस घटना से सबक लिया — और आज तक कभी भी जाति के नाम पर लालू यादव का समर्थन नहीं किया।