@sharatjpr@skbishnoi164@aajtak राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा गर्त में, लेकिन आपके इस प्रयास से व्यावसायिक शिक्षा शिक्षकों व शिक्षार्थी को नई दिशा देने में ऊर्जा प्रदान करी है.
आपका यह प्रयास निश्चित ही कुशल भारत कौशल भारत को दिशा देने में मिल का पथर साबित होगा
@VTAHaryana@NSDCIndia
व्यावसायिक शिक्षा की आवाज को बुलंद करने वाले आज तक के सीनियर पत्रकार @sharatjpr जी के साथ । धन्यवाद सर Thank you @aajtak
व्यावसायिक शिक्षकों की एक ही मांग स्थाई जॉब पॉलिसी लागू करो
12 वर्षों से हो रहें शोषण को बंद करो
5 से 14 माह का बकाया वेतन दिया जाए
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
@skbishnoi164@aajtak मुझे अफ़सोस रहेगा कि मैं इस मुद्दे को देरी से उठाया लेकिन पीएमओ ने सरकार से व्यवसायिक शिक्षा पर पूरी रिपोर्ट मँगा ली है और भविष्य में बड़े बदलाव के संकेत है। देरी होगी लेकिन बदलाव होगा।
व्यावसायिक शिक्षा- शिक्षकों का शोषण बंद करो
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
"ठेका प्रथा ने व्यावसायिक शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है। स्थाई जॉब पॉलिसी ही शोषण का स्थायी समाधान है।"
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
कौशल बन रहा है सफलता का नया मंत्र!
स्किलिंग के बढ़ते अवसरों ने करोड़ों युवाओं को आत्मविश्वास, रोजगार और नए भविष्य की राह दी है। आज का युवा केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि बदलती अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रहा है। #12YearsOfYuvaShakti
बाड़मेर के व्यावसायिक (वोकेशनल) शिक्षकों ने चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल को ज्ञापन सौंपकर स्थायी सेवा नीति लागू करने, लंबित वेतन का भुगतान करने तथा हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सरकारी सेवा में समायोजन की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि हरियाणा और दिल्ली में समान कार्य के लिए 35 से 38 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है, जबकि राजस्थान में मात्र 19,800 रुपये मानदेय मिलता है। कई शिक्षकों का 5 से 13 माह तक का वेतन भी बकाया है। प्रदेश में 5,155 व्यावसायिक शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकांश 30 जून के बाद रोजगार संकट की आशंका जता रहे हैं।
शिक्षकों ने ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी नौकरी नीति लागू करने की मांग की है। इस मांग को प्रदेश के 82 से अधिक जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन प्राप्त है।