What was known to us has been confirmed by a founding AAP member.
The IAC movement & AAP were propped up by the RSS/BJP to subvert democracy and bring down the UPA government.
https://t.co/QDYyOOTtw7
बिहार में बाढ़ फिर कहर बनकर टूटी है। लाखों लोग प्रभावित हैं, सैकड़ों गांव डूबे हुए हैं। कई लोगों की मौत और लापता होने की खबर है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है।
सबसे दुखद बात यह है कि बिहार में यह संकट नया नहीं है। हर साल बाढ़ आती है, मौतें होती हैं, परिवार उजड़ते हैं और लोग पलायन करते हैं। BJP की डबल इंजन सरकार बताए - पिछले 17 साल में इस सालाना त्रासदी से निपटने के लिए क्या किया? ज़मीन पर क्या बदला? बिहार के लोगों को हर साल राहत और आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
Satyagraha went live 9 hours ago. Since then, more than 10,000 people and groups have come forward.
That's how many struggles Indians are already fighting - quietly, convinced no one was listening.
We are listening. Every submission will be read. Already, we see stories in the topics of education, corruption, social justice, farmers, labour, health, women’s safety, land and environment.
Our team will go through each one, work out how we can help, and reach out where more details are needed. Where any genuine struggle needs to be amplified to be resolved, we will do it.
This is only the beginning. Satyagraha isn't a one-day campaign. It will run for years, and it will stand with every andolan, big or small.
Thank you for speaking up and for standing up for the Constitution.
If you haven't yet, tell me your story 👉 https://t.co/hJ8iARr5La
Across the country, people are fighting for their rights - and too often, fighting alone.
Gen Z, students, farmers, Adivasis, Dalits, women - every struggle has its own story. But a lone voice is often easier to silence.
‘Satyagraha’ is an initiative to bring these voices together on one map.
Bapu taught us that truth is our greatest weapon. But an even greater weapon is standing together with the truth.
If you too are fighting against any injustice, share your story. It will take just two minutes.
Your story will find a place on the Satyagraha map. You’ll see who else, like you, is fighting their own battle.
And I will do whatever I can - in Parliament, on the streets, through letters, wherever I am needed - to stand with you. As the Leader of the Opposition, that is my responsibility.
Tell me the story of your Satyagraha here:
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
पुणे में 'छात्रों की गूँज' के दौरान महाराष्ट्र के छात्रों ने अपनी पूरी समस्या मेरे सामने रखी थी - पेपर लीक, रुकी भर्तियाँ, महँगी पढ़ाई, बदहाल हॉस्टल, ज़हर जैसा खाना, और DBT में धोखाधड़ी।
मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा था - MPSC में सुधार कीजिए, परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी बनाइए, इन बच्चों की सुनिए।
कुछ नहीं हुआ। इसीलिए आज वही छात्र पुणे में सत्याग्रह पर बैठे हैं।
उनकी मांगे साफ़ हैं:
→ MPSC अध्यक्ष इस्तीफ़ा दें, और उनकी जगह एक ईमानदार, योग्य अधिकारी आए
→ 70,000+ ख़ाली सरकारी पद तुरंत भरे जाएं
ये मांगे नाजायज़ नहीं हैं। इन पर कार्रवाई चाहिए - आश्वासन नहीं।
महाराष्ट्र स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति ने अपना आंदोलन 'सत्याग्रह' पर दर्ज किया।
युवा कांग्रेस और NSUI इस आंदोलन के साथ लगातार खड़े थे - उनसे कहा है कि छात्रों की मांगे पूरी होने तक उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर लड़ते रहना। मैं ये मुद्दा महाराष्ट्र सरकार के सामने फिर से उठाकर इसके स्थायी समाधान की मांग करूंगा।
जो संस्था छात्रों का भविष्य तय करती है, उस पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है। हम इसे ऐसे ही नहीं चलने देंगे।
#Satyagraha
आज गांधी जयंती है।
और आज ही, हज़ारों नौजवान वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं - शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए।
उनकी माँग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। लोकतंत्र बचाओ।
और Modi-Shah सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ़ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा।
बापू ने यही सिखाया था - सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज़्यादा डराता है।
क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।
ज्ञानेश कुमार जाएँगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।
सत्य, अहिंसा और निर्भयता - यही बापू की सबसे बड़ी विरासत है।
उन्होंने सिखाया कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं, सत्य और अहिंसा के साथ डटे रहना ही सच्ची ताकत है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
पूरा देश वोट चोरी के खिलाफ़ गुस्से में है - मगर फिर भी BJP-EC की बेशर्मी देखिए कैसे खुलेआम वही किए जा रहे हैं।
कर्नाटक के बेलगावी में एक झटके में लगभग 15 हजार वोटरों के नाम मिटाने की साजिश चल रही थी।
सिर्फ़ तीन दिनों - 22, 23 और 24 सितंबर - में इतने नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए Form 7 की बाढ़ आ गई।
और निशाने पर कौन? मुसलमान, SC, ST और OBC। क्योंकि इनमें से ज़्यादातर लोग BJP के खिलाफ वोट डालते हैं।
मैंने वोट चोरी के इस तरीके का पहले ही पर्दाफाश किया था - Centralized तरीके से software के जरिए वोट delete किए जाते हैं। "चुनिंदा" लोगों के खिलाफ BJP और EC के लोगों द्वारा मिलकर automated तरीके से थोक में Form 7 भरे जाते हैं - और देखते ही देखते लाखों वोटर लिस्ट से गायब हो जाते हैं। और ये सब ऊपर से नियंत्रित किया जाता है।
कर्नाटक कांग्रेस के नेता इस वक्त कर्नाटक CEO के दफ़्तर में इसके दोषियों के ख़िलाफ़ FIR की मांग कर रहे हैं। CEO इस FIR से मना क्यों कर रहे हैं?
इस तरह से मोदी, शाह और ज्ञानेश मिल कर SIR के ज़रिए लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। ये देशद्रोह है।
इसलिए मैं कह रहा हूं ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे कर approver बन जाना चाहिए, और मोदी शाह के खिलाफ जांच होनी चाहिए।
Karnataka CM D.K. Shivakumar alleges a “big fraud” involving bulk Form 7 filings to delete voters during the SIR exercise.
The CM has now sat on an indefinite strike inside the Election Commission office, demanding action over the alleged mass voter deletions.
मैं आज बालाघाट आ रहा हूं।
उन आदिवासी परिवारों से मिलने, जिन्होंने बीमारी और BJP सरकार की उपेक्षा के कारण अपने मासूम बच्चों को खोया है। उनके साथ वक्त बिताकर उन्हें बताना चाहता हूं कि इस दुख में वो अकेले नहीं हैं - मैं उनके साथ हूं।
कुछ दिनों पहले केन-बेतवा आंदोलन के आदिवासी भाई-बहनों से भी मिला था। परियोजना के कारण आज उनके गांव डूब रहे हैं, मगर सरकार से उन्हें न पुनर्वास मिला न मुआवज़ा - मिला है तो प्रताड़ना, सरकारी दमन और हिंसा।
इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ के दौरान भी आदिवासी छात्रों ने बताया - स्कूल नहीं हैं, कॉलेज बदहाल हैं, हॉस्टल और खाना नर्क जैसा, परीक्षाओं में धांधली और उनके आरक्षण के अधिकार से खिलवाड़ हो रहा है।
मध्यप्रदेश के आदिवासियों की ये तकलीफें BJP-RSS की उस सोच का हिस्सा हैं जो उन्हें भारत के पहले मालिक नहीं, वनवासी मानती है। जल, जंगल, जमीन के साथ शिक्षा, रोजगार और सम्मान भी छीन लेना चाहती है और अहंकार में वो कुछ सुनना नहीं चाहती।
आदिवासी भाई-बहनों को आश्वस्त करता हूं कि मैं आपके साथ हर संघर्ष में खड़ा हूं - आपकी आवाज़ बुलंद करना मेरी ज़िम्मेदारी है और मैं इस बहरी सरकार को वो पूरी शक्ति के साथ सुनाऊंगा।
मोदी जी सामाजिक न्याय और बराबरी के ख़िलाफ़ हैं। उनका पूरा सिस्टम शिक्षा से नफ़रत करता है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि छात्र सोचें या सवाल पूछें।
इसका ताज़ा सबूत देखिए।
एक गुमनाम ट्वीट में बाबासाहेब अंबेडकर की "जाति का विनाश", ज्योतिबा फुले की "गुलामगिरी" जैसी कई ज़रूरी किताबों को युवाओं के दिमाग़ में "ज़हर" भरने वाला बताया गया।
अगले ही दिन, रविवार को, PMO के निर्देश पर शिक्षा मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से सिलेबस की जानकारी माँगी, और पूछा कि इन कोर्स में कितने छात्र पढ़ रहे हैं।
बेहद चौंकाने वाली बात है कि युवाओं के पेपर लीक, बेरोज़गारी और सुरक्षा के सवालों पर चुप रहने वाले प्रधानमंत्री, इंटरनेट ट्रोल्स के इशारे पर फ़ौरन काम करते हैं।