कृति सेनन अंतर्वस्त्र पहनकर राखी बाँध रही हैं। वीडियो आभूषण ब्रांड GIVA का है। विरोध के जवाब में कहा जाएगा कि कपड़े छोटे नहीं हैं, आलोचना करने वालों की सोच छोटी है।
तो ऐसा है, अगर कोई पुरुष नग्न होकर राखी बँधवाता तो इसका भी विरोध ही होता। ठीक है, कुत्ते को भी राखी बाँध दिया। बहुत बड़े सुधारवादी बन गए। सनातन में सभी जीव-जंतुओं के साथ सहज सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया गया है। लेकिन, ये इस सुधारवाद का दायरा थोड़ा और बढ़ाओ। ज़रा पता करो कि किसी कुत्ते को लेकर मक्का-मदीना ले जा सकते हो या नहीं।
जब भी कोई अपराध होता है तो पुलिस जाँच में सबसे अधिक माथापच्ची उसके प्रयोजन को खोजने में लगाया जाता है। Motive, मतलब इरादा क्या था अपराधी का। इस विज्ञापन के इरादे नेक नहीं लगते, ऐसा प्रतीत होता है जैसे सनातन धर्म की रीतियों को अपमानित करने ��े लिए ही इसे बनाया गया है। ठीक वैसे ही, जैसे 'मान्यवर' के आलिया भट्ट वाले विज्ञापन में कन्यादान का मजाक बनाया गया था।
मुझे कुत्ते से कोई समस्या नहीं है। चलो ये भी मान लिया कि एक कुत्ते को स्वर्ग ले जाने के लिए युधिष्ठिर अड़ गए थे। लेकिन, रक्षाबंधन स्पेन का टोमैटो फेस्टिवल नहीं है। ये एक धार्मिक त्योहार है। राखी बाँधना या बँधवाना अनुष्ठान का हिस्सा है। अनुष्ठान के कुछ नियम-क़ानून होते हैं। उसमें नग्नता अथवा अश्लीलता घुसाना सुधार नहीं कहलाएगा। तुम पूजा की थाली हटा दोगे, हिन्दू त्योहार को सेक्युलर बनाने के लिए। कुत्ता घुसा दोगे। महिलाओं के कपड़े उतरवा दोगे। फिर ज्ञान दोगे। आरती की थाली का कहीं कोई अता-पता नहीं है। तिलक का कहीं कोई अता-पता नहीं है। सेक्युलरिज़्म ऐसा नहीं चलता है।
कल को ये दारू पीते लोगों को रक्षाबंधन मनाते हुए दिखाएँगे। फिर कहेंगे कि हमने चीजों को आज के हिसाब से ढाला है। अभी कुत्ते पर प्रेम उमड़ रहा है, बकरीद आते ही पशुप्रेम के सारे दिखावे हवा हो जाएँगे। क्रिसमस पर दुनियाभर में 10 करोड़ टर्की पक्षी मारे जाते हैं, तब भी ये प्रेम गायब रहता है।
क्या केरल की मीडिया
शाहरुख़ से ये पूछेगी - सर आपने के���ल में सूअर की बोटी टेस्ट की ?
है हिम्मत केरल की किसी औलाद में ये पूछने की.
साले चादरमोद.. एक उत्तर भारतीय हीरोइन से
पूछ रहे हैं कि क्या उसने केरल में बीफ try किया.
हीरोइन ने मुँह पे थूक दिया और बोलीं
मैं शाकाहारी हूँ ✊
हमारी वफ़ादारी पाकिस्तान से है...
“7 स्कूल की लड़कियों को फंसाया, उनमें से दो का कलमा हो चुका है,
जैसे ही हमारा समय आएगा, हम उन्हें घरों में घुसकर निपटा देंगे।
हमारी सरकार आने दो.. हम तुम्हें दिखा देंगे.."
: YouTuber Fire Ninja ने भारत में रह रहे मजहब परस्त गद्दारो को Exposes कर दिया।
अपहरण कर के इस्लाम कबूल कराई जाती अपनी बच्चियों के लिए जब हम उठाते हैं आवाज, तब हमें रॉ (RAW) का एजेंट कहा जाता है..
पाकिस्तान के हिंदू ने कहा - "आये दिन हमको मुसलमानो का दुश्मन बता कर जारी हो रहे हैं फतवे*..
इजरायल का जासूस जैसे ताने मिलना तो है आम बात.
काश पड़ोसी मुल्क के संसाधनों पर पहला हक सनातनियों का होता..
#Pakistan #Hinduphobia
रोज़ी-रोटी की तलाश में UP-बिहार से पंजाब पहुँचे मजदूर कैसे जमींदारों के चंगुल में फँसकर बंधुआ मजदूर बन जाते हैं?
पैरों में जंजीर, मारपीट और इतना शोषण कि भरपेट खाना और नींद तक नसीब नहीं।
‘अन्नदाता’ कहलाने वाले खेतों में काम करने वालों की ये हकीकत आखिर पंजाब पुलिस की नज़र से कैसे बची रही?
@jayeshmatiyal की रिपोर्ट #Punjab
पत्तलकार साहिबा “Gen Z लड़की” को भ्रमित कर रही थी, उसने ऐसा जवाब दिया कि बोलती बंद हो गयी।
आप 40 हजार दे दोगे अगले दिन मेरा रेप हो जाये तो मैं क्या करुँगी?
राहुल गांधी की ऐसी हरकत पर कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि वो ये सब करके गालीबाज़ों का नेता बनना चाह रहे..
आश्चर्य ये है कि देश में जनसमर्थन के बावजूद BJP और कब तक राहुल गांधी को ऐसेट की तरह यूज़ करने के लिए ये सब बर्दाश्त करती रहेगी
BJP वोटर्स को भी ये सब कमजोरी की निशानी लगने लगी है।
जो लोग धर्मस्थलों में लाखों हथियार छिपाकर रखे हुए हैं, उन्हें बाहर तो निकालेंगे ही। 1946 (बंगाल में डायरेक्ट एक्शन डे) को दोहराने की कोशिश करेंगे। तब सेना बाहर निकलेगी।
मोदी की जगह योगी लेंगे, यह निश्चित है।
"हमारी गोलियां इतनी सस्ती नहीं जो तुम जैसे काफ़िरों पर खर्च की जाएं"; फिर तलवारों से हिंदुओं पर टूट पड़े जिहादी
हिंदू महिलाओं के ऊपर पागल कुत्तों की तरह झपट रहे थे मुसलमान; गैंगरेप के बाद कर दिए टुकड़े-टुकड़े
1971 बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार की ख़ून जमा देने वाली सच्���ाई बता रही हैं @Shh_Shaili
🚨 शॉकिंग खुलासा 🚨
CJP को 26 मिलियन फॉलोअर्स कैसे मिले?
एनालिसिस क्या कहता है:
– अचानक हजारों कोऑर्डिनेटेड अकाउंट्स बनाए गए – शुरुआती फॉलोअर्स में 80% भारत के बाहर से – बॉट वेव के बाद भारी एल्गोरिदमिक पुश
इतने बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक ग्रोथ असंभव है बिना भारी फंडिंग और एल्गोरिदम सपोर्ट के।
सच ये है: CJP कभी स्टूडेंट मूवमेंट नहीं था।
ये एक अच्छी फंडिंग वाला संगठित राजनीतिक ऑपरेशन थाजो स्टूडेंट प्रोटेस्ट के भेष में चल रहा था।
और अब मेटा ने खुद इसकी पुष्टि कर दी है।
5 अगस्त के लिए @narendramodi और @AmitShah के प्रति यह राष्ट्र सदैव कृतज्ञ रहेगा। हमें इसी इच्छाशक्ति की पुनरावृत्ति देखनी है, बार-बार, कई बार!
नक्सलियों का सफाया, राष्ट्रद्रोही NGOs की फंडिंग पर शिकंजा, आंतरिक सुरक्षा पर किए गए कार्य आदि सराहनीय हैं। FCRA अगली कड़ी है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद विजय हाँसदा और उनकी पत्नी सुप्रिया मुर्मू के विवाह की तस्वीर वायरल हो रही है
विजय हसदा अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासी सीट से सांसद हैं
लेकिन विवाह ईसाई रस्मो रिवाज से हुई आपको मंच पर तमाम पादरी नजर आएंगे
तो लोग सवाल यह पूछ रहे हैं कि जब ��प क्रिश्चियन है इसी हैं तब आप एक आदिवासी का अधिकार क्यों खा रहे हैं ?
क्यों आदिवासी ST से आप सांसद हैं जबकि वह सीट एक आदिवासी के लिए रिजर्व है तो वहां से किसी आदिवासी को चुना जाना चाहिए
हैदराबाद के होटलों में मटन के साथ बीफ़ मिलाया जा रहा है।
हैदराबाद के मल्लेपल्ली में मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद जहांगीर को मटन में बीफ़ मिलाकर रेस्तरां में सप्लाई कर रहे थे।
राजनीति है, चलती रहती है, लेकिन बीजेपी कितनी सूक्ष्म स्तर पर काम करती है, यह समझने के लिए कृपया इसे जरूर पढ़ें।
इस रणनीति में TMC की गुप्त चालों की जानकारी निकाल��� गई।
इसमें काम आया PK... यानी प्रशांत किशोर।
PK के पास अपार पैसा था... भारत में इतना पैसा सीधे रास्ते से नहीं आता।
ED ने उस पर दबाव बनाया, उसने बिहार में झुकाव दिखाया, वह खत्म हो गया, लेकिन TMC की सारी जानकारी बीजेपी तक पहुंच गई। इसके बदले उसे संरक्षण दिया गया।
PK खत्म हुआ... उससे I-PAC की जानकारी मिली।
और TMC को झटका लगना शुरू हुआ।
CAA के विरोध में ममता बनर्जी उतर गईं। वह अनावश्यक था। लेकिन उससे विचार-मंथन शुरू हुआ। और संघ का मंथन मतलब बहुत खतरनाक तैयारी होती है।
साधारण कपड़े पहने, पैरों में साधारण चप्पलें डाले हुए सेवान���वृत्त बैंक कर्मचारी / जिला परिषद के रिटायर्ड शिक्षक जैसे दिखने वाले साधारण, बिना पहचान वाले लोग... बैठते हैं... बात करते हैं... फिर अपनी-अपनी थालियां लेकर आलू की सब्जी, रोटी, दाल-चावल खाते हैं, अपनी थालियां खुद धोकर जगह पर रखते हैं और बातचीत करते हुए निकल जाते हैं।
इसी ��ौरान इन साधारण लोगों को समझ आया कि संसदीय शस्त्रागार में एक जंग लगा हुआ महाशस्त्र मौजूद है।
#SIR
यही वह हथियार था... इसे पूरी तरह संसदीय नियमों के अनुसार चलाया गया। पहली परीक्षा बिहार में हुई। इसके बाद ममता सतर्क हो गईं।
उनके पास बांग्लादेशी घुसपैठियों का आधार था। मरे हुए और बाहर रहने वाले लोगों के नाम पर वोट डाले जाते थे। उस हथियार को निष्क्रिय कर दिया गया।
आगे “छापा वोट” का तरीका था। विरोधी लोगों को मतदान के लिए बाहर निकलने ही नहीं देना, और ममता के मुस्लिम पुलिसकर्मी खुद बटन दबाते रहते थे।
किसके दम पर? प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के बल पर...
वहां चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आगे रखते हुए कई उपाय करके नई सख्त व्यवस्था बनाई।
वहां की समानांतर मुस्लिम पुलिस समर्थक व्यवस्था को तोड़ दिया गया।
क्लब व्यवस्था डर दिखाती थी, तो वहां केंद्रीय बल तैनात क��ए गए।
I-PAC पर छापे के दौरान ममता ने जो फाइलें तेजी से हटाई थीं, उसकी पूरी जानकारी PK ने दी ही थी, लेकिन वहां के I-PAC अधिकारी चंदेल और जैन को ED ने पकड़ लिया। और आधा काम पूरा हो गया।
92 लाख कथित बांग्लादेशी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। यह काम कठिन तो था ही, लेकिन अद्भुत भी था... क्योंकि ममता की मुस्लिम और जिहादी पुलिस नेटवर्क की बड़ी श्रृंखला तोड़नी थी।
“बाइक वाहिनी” दोपहिया वाहनों पर आतंक फैलाती थी, ���ह जानकारी पहले से थी। इसलिए मतदान से सिर्फ दो दिन पहले दोपहिया वाहनों पर रोक लगा दी गई। उन 48 घंटों में हर विधानसभा क्षेत्र के TMC अपराधियों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया। करीब दस हजार इस्लामिक और जिहादी तत्व जेल भेजे गए।
मतदान के बाद EVM कैसे ले जाए जाते हैं, कहां रखे जाते हैं — इसमें पुलिस और I-PAC की मिलीभगत थी।
इसलिए वहां पुलिस को मतदान केंद्रों और उनके आसपास से हटाकर केंद्रीय बल तैनात किए गए।
TMC की हर छ���टी-बड़ी जानकारी निकालकर यह रणनीति संघ के साधारण कार्यकर्ताओं ने छह-सात महीने पहले ही तय कर ली थी और समय आने पर लागू की।
जो सामान्य जनता की आंखों को दिखाई नहीं देता था, वही यहां बताया गया है...
जनता जो देख रही थी, पीड़ित हिंदू समाज जो सह रहा था... आज वह मुक्त हुआ। अगर बीजेपी सत्ता में नहीं आती, तो यह “बानो” कम से कम आधे हिंदुओं को खत्म कर देती, और बंगाल भारत का हिस्सा नहीं रहता... या फिर मुस्लिम बहुल र��ज्य बन गया होता।
मोदी और शाह ने हिंदुओं के लिए जो काम किया है, वह ऐतिहासिक है। बीजेपी के सभी 209 विधायक हिंदू हैं और विपक्ष में 70% मुस्लिम — यही नए बंगाल विधानसभा की तस्वीर है।
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