देखु जो मैं दर्पण तो सामने तेरी
सुरत नजर आये मेरे कान्हा
मेरे वजूद में काश तूम ऐसे
उतर आऔ कान्हा
तुम रहो पास में और ये
वक़्त एक दम ठहर सा जाये
जो जिंदगी मिली है वो बस
एक तुम्हें देखते ही गुजर जाएगा
#स्वरा#sona146
मुस्कान है दबी सी
खलिश सी सीने में भी
हँसते है लब पर
आग सी है दिल में लगी
मैं वही हूँ पहली सी या बदल गई हूँ मैं
कोशिश करती हूँ खुद को ढूँढने की पर
खो गई हूँ मैं
*अच्छा लगता है मुझे*
*उन लोगों को*
*"सुबह का अभिवादन करना",*
*जो मेरे समक्ष न होते हुए भी*
*मेरे ह्रदय के बहुत पास होने का*
*एहसास दिलाते हे*
🌞सुप्रभातम🌞
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