गर्मी, धूप, बेहोशी, प्रोफेसर का सहारा और फिर सवालों की आँधी
क्या ये मदद थी या मौका, कौन पीड़ित कौन खिलाड़ी, पुलिस, political दबाव, भीड़ सच के साथ है या तमाशे के,
हम पढ़ाई कर रहे हैं इंसान बनने की या सिर्फ नंबरों की कहीं ऐसा तो नहीं कि असली परीक्षा में पूरा समाज ही फेल हो रहा