Hello Guys Happy Republic day to all 🙂
So today I am going to present some data from census ,let's start from 2 pics ,one from post independence first census of 1951,and other from census 2011
@sunandamitra मेरी बुलेट का क्रैंक ही 17 किलो का है,और उसके ऐल्युमीनियम की क्वॉलिटी भी अलग है,जबकि नए मॉडल वाली बुलेट में 4 किलो का क्रैंक है,हर 10 साल में एक बार इंजन खुलवा कर बनवा देते है बस,फिर आराम से चलती रहती है
एक उदाहरण से समझाता हूं इन कंपनियों का खेल
मेरे पास सन 82 मॉडल की बुलेट है
उसमें लगे इंजन पार्ट्स और स्टील की क्वॉलिटी इतनी अच्छी है कि उसके पार्ट्स खराब नहीं होते
पर इसी जगह तो नई बाइक्स आ रही है मार्केट में,वो 10 साल से ज्यादा चल नहीं पाती सस्ती क्वालिटी के पार्ट्स की वजह से
10 साल हो गए दिल्ली नोएडा में
कौन से नाले की कौन से विचित्र गैस AC को खराब करती है आज तक समझ नहीं आया
हर AC में दो साल बाद गैस भरवाना,फिर अगले साल पूरा फिटिंग चेंज करवाना,अब तो गैस 3 महीने में भरवाना पड़ेगा
अब नया AC खरीदो
इस बार हमने लिविंग रूम में नए AC की जगह Rent में AC लिया
@SerpentForce@Pantoprazole_1 हा जिहादी आतंकवादी बहुत जिम्मेदार लोग होते है,हर घटना को उनके द्वारा संपादित की जाती है,उसकी वो सीना ठोक कर जिम्मेदारी लेते है
Bhos+di के
कितने ही घटिया आदमी हो बे तुम
सरकारी तंत्र की नाकामी को ईश्वरीय सत्ता की क्रूरता बता कर उन्हें बचा रहा
अबे सारी शर्म हया बेच खाए हो क्या बे
या अभी तू शर्म हया को उर्दू शब्द बता कर इसमें भी हिंदू मुस्लिम ले आएगा बे
बहुते नीच किस्म के व्यक्ति हो बे तुम
बेचारे बुजुर्ग राधेश्याम अग्रवाल ICU में भर्ती रह गए, इलाज कराने आए परिवार के 8 लोगों को मौत ने लील लिया। कभी-कभी ईश्वरीय क्रूरता अपनी सारी सीमाएँ पार कर जाती हैं।
बेटे विवेक ने अस्पताल के नज़दीक में होटल लिया, ताकि पास में रहेंगे तो अच्छे से ध्यान दे पाएँगे। मालवीय नगर में लगी आग में उनकी मृत्यु हो गई। पत्नी प्रेमलता भी नहीं बचीं। बहू तर्जनी की भी मौत हो गई। बेचारी पोती जीविस्का भी जलकर मर गई। एक अन्य पोती वारिया बेंगलुरु से बीमार दादा को देखने आई थी, अब वो भी इस दुनिया में नहीं है। बेचारे बच्चों की क्या ग़लती थी! साले अशोक गोयल अपने जीजा की देखभाल के लिए आए थे, वो भी मारे गए। साली कमला भी इसी आग में स्वाहा हो गईं। साढ़ूभाई जिमरी भी नहीं बच पाए।
आठ जानें चली गईं, बेचारे बुजुर्ग अबतक आईसीयू में भर्ती हैं। ये ख़बर सुनने के बाद उनकी जीने की इच्छा भी ख़त्म ही हो जाएगी। चार्वाक-जाबालि-मक्खलि के दर्शन में विश्वास रखने वालों के लिए अच्छा केस है ये।
और हाँ, व्यवस्था की एक छोटी सी चूक कितना कुछ छीन लेती है - ये इसका भी एक सटीक उदाहरण है। ये भी नहीं कह सकते कि परिजन इस त्रासदी की व्यथा से उबर जाएँ, क्योंकि यहाँ रोने वाला भी शायद ही कोई बचा है।